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भंडारा हादसा: अस्पताल की बड़ी लापरवाही आई सामने, नवजातों के वॉर्ड में नहीं था कोई स्टाफ!

घटनास्थल की तस्वीर
घटनास्थल की तस्वीर

Bhandara Hospital Fire: महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने बताया कि 10 में से 3 बच्चों की मौत जलने से हुई, जबकि बाकी बचे 7 बच्चों की मौत दम घुटने से हुई. फिलहाल इस हादसे को लेकर जांच के आदेश दे दिए गए हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 9, 2021, 2:48 PM IST
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भंडारा. महाराष्ट्र के भंडारा जिले के एक अस्पताल में लगी आग (Fire in Hospital) ने हर किसी को हिला कर रख दिया. नवजात शिशु विशेष देखभाल इकाई (Special Newborn Care Unit) में शुक्रवार देर रात आग लगने से 10 बच्चों की मौत हो गई. इन बच्चों की उम्र महज एक से तीन महीने के बीच थी. हादसे को लेकर प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई है. महाराष्ट्र पुलिस के बड़े अधिकारियों ने सीएनएन न्यूज़ 18 से कहा कि जब बच्चों के वॉर्ड में आग लगी उस वक्त वहां कोई स्टाफ नहीं था, जबकि यहां 24 घंटे स्टाफ की ड्यूटी रहती है.

सूत्र ने कहा, 'पहली नजर में हमें पता चला है कि इस वार्ड में बिना अटेंडेंट के छोड़ दिया गया था. जब शुरुआत में आग भड़की तो वार्ड के अंदर कोई मौजूद नहीं थी.'

महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने बताया कि 10 में से 3 बच्चों की मौत जलने से हुई, जबकि बाकी बचे 7 बच्चों की मौत दम घुटने से हुई. फिलहाल इस हादसे को लेकर जांच के आदेश दे दिए गए हैं. ये घटना देर रात करीब 2 बजे हुई है. ड्यूटी पर मौजूद नर्स को वॉर्ड में आग की जानकारी सबसे पहले लगी थी. इस दौरान 17 शिशुओं मे से सिर्फ 7 को बचाया जा सका.



मृतकों के परिजनों को मुवाजा
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का ऐलान किया है. राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने लापरवाही करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने की मांग की है. उन्होंने कहा कि इस मामले की ठीक तरह से जांच की जानी चाहिए और दोषियों को खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए. उधर बीजेपी विधायक राम कदम ने कहा है कि पीड़ित परिवारों को 1-1 करोड़ रुपये मिलने चाहिए.

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DM से मांगा गया जवाब
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने शिशुओं की मौत की घटना पर दुख व्यक्त करते हुए शनिवार को जिले के कलेक्टर से कहा कि वो 48 घंटे के भीतर इस मामले में तथ्यात्मक रिपोर्ट दें. आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो के मुताबिक, एनसीपीसीआर ने भंडारा के कलेक्टर को चिट्ठी भेजकर कहा कि इस मामले की जांच की जाए.
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