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भीमा-कोरेगांव केस: वरवर राव को बड़ी राहत, मेडिकल आधार पर मिली 6 महीने की जमानत

वरवर राव (फाइल)
वरवर राव (फाइल)

बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने भीमा-कोरेगांव हिंसा (Bhima Koregaon case) के आरोपी 81 साल के वरवर राव (Varavara Rao) की खराब सेहत को देखते हुए छह महीने की जमानत दी है. राव 28 अगस्त, 2018 से ट्रायल का इंतजार कर रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 22, 2021, 1:07 PM IST
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पुणे. महाराष्ट्र के भीमा-कोरेगांव हिंसा (Bhima Koregaon case) मामले में कवि वरवर राव (Varavara Rao) को आखिरकार सशर्त जमानत मिल गई है. बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने मेडिकल आधार पर राव की जमानत अर्जी मंजूर कर ली. हाईकोर्ट ने 81 वर्षीय वरवर राव को छह महीने के लिए जमानत दी है. राव 28 अगस्त, 2018 से ट्रायल का इंतजार कर रहे हैं.

जस्टिस एसएस शिंदे और जस्टिस मनीष पिटाले की बेंच ने कहा कि
अदालत ने कहा कि वरवर राव को 50 हजार रुपये का व्यक्तिगत बांड जमा करने के साथ-साथ ही इतनी ही राशि के दो मुचलके देने होंगे. छह महीने बाद वरवर राव या तो सरेंडर करेंगे या फिर अपनी जमानत की अवधि को बढ़ा सकते हैं. वरवर राव को मुंबई से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई है. उन्हें शहर में ही रहना होगा और किसी भी वक्त जांच के लिए एजेंसियों के समक्ष पेश होना होगा.

कोर्ट ने कहा कि वरवर राव कोर्ट की प्रक्रिया से संबंधित कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं दे सकते. जमानत की अवधि के दौरान वह सह-आरोपियों के साथ किसी तरह का कोई संपर्क भी नहीं साध सकते.
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बता दें कि हाईकोर्ट में 1 फरवरी को वरवर राव को चिकित्सा आधार पर जमानत देने की याचिका पर बहस पूरी हो गई थी. अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. यह रिट याचिका उनकी पत्नी हेमलता ने दाखिल की थी. उन्होंने अपनी याचिका में दावा किया था कि उचित चिकित्सा सुविधा न देकर व कैद में रखा जा रहा है. इससे वरवर राव के मौलिक अधिकारों की अवहेलना हो रही है.

गौरतलब है कि यह मामला 31 दिसंबर 2017 में पुणे में आयोजित एल्गार परिषद के कार्यक्रम में कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने से जुड़ा है. पुलिस का दावा है कि इस भाषण की वजह से अगले दिन कोरेगांव-भीमा में हिंसा फैली.

क्या है भीमा-कोरेगांव हिंसा?
बता दें कि 1 जनवरी 2018 को महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव में पेशवा बाजीराव पर ब्रिटिश सैनिकों की जीत जश्न मनाया जा रहा था. तब हिंसा भड़क उठी, जिसमें एक शख़्स की जान गई और उस दौरान कई गाड़ियां भी फूंकी गयी थीं.

क्यों भड़की थी हिंसा?
भीमा-कोरेगांव में दलित और बहुजन समुदाय के लोगों ने एल्गार परिषद के नाम से वाड़ा में कई जनसभाएं की थीं. जनसभा में अधिकतर मुद्दे हिन्दुत्व राजनीति के खिलाफ थे. इस मौके पर कई बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाषण भी दिए थे. इसी दौरान अचानक हिंसा भड़क उठी. भाषण देने वालों में गौतम नवलखा, वरवर राव समेत कई अन्य बुद्धिजीवी थे. हिंदुत्व राजनीति के खिलाफ हो रहे भाषणों के चलते बिगड़ा था माहौल.

कौन हैं वरवर राव?
वरवर राव एक तेलुगु वामपंथी कवि और मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं. वो अपनी कविताओं के लिए जाने जाते हैं. उन्हें तेलुगु साहित्य का एक प्रमुख मार्क्सवादी आलोचक भी माना जाता है. राव दशकों तक इस विषय पर तमाम छात्रों को पढ़ाते रहे हैं. राव, वीरासम (क्रांतिकारी लेखक संगठन) के संस्थापक सदस्य भी रहे हैं.

साल 1986 के रामनगर साजिश कांड सहित कई अलग-अलग मामलों में 1975 और 1986 के बीच उन्हें कई बार गिरफ्तार और फिर रिहा किया गया. उसके बाद वरवर राव 2003 में रामनगर साजिश कांड में बरी हुए. 2005 में उन्हें फिर जेल भेज दिया गया. उन पर माओवादियों से कथिततौर पर संबंध होने के भी आरोप लगते रहे हैं. (PTI इनपुट के साथ)
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