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थाईलैंड से मूर्ति लाया था शख्‍स, शुल्‍क देने से किया मना, हाईकोर्ट बोला- नीलामी से पता लगाएं कीमत

बॉम्‍बे हाईकोर्ट ने कस्‍टम‍ विभाग को दिया निर्देश. (File pic)

बॉम्‍बे हाईकोर्ट ने कस्‍टम‍ विभाग को दिया निर्देश. (File pic)

कस्‍टम विभाग (Customs Department) को शक है कि यह मूर्ति बेशकीमती है. इसकी कीमत 5 लाख रुपये आंकी गई है. इस पर उस पर्यटक से इसका शुल्‍क चुकाने के लिए कहा.

  • News18Hindi
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    मुंबई. मुंबई (Mumbai) में थाईलैंड (Thailand) से मूर्ति लाने का एक मामला कस्‍टम (Customs Department) में उलझा हुआ है. दरअसल एक भारतीय पर्यटक (Indian Tourist) कुछ साल पहले बैंकॉक गया था. वहां से वह धातु की एक मूर्ति लाया था. इसे कस्‍टम विभाग ने जब्‍त कर लिया था. कस्‍टम विभाग को शक है कि यह मूर्ति बेशकीमती है. इसकी कीमत 5 लाख रुपये आंकी गई है. इस पर उस पर्यटक से इसका शुल्‍क चुकाने के लिए कहा. लेकिन पर्यटक ने मना कर दिया और बॉम्‍बे हाईकोर्ट चला गया.

    अब बॉम्‍बे हाईकोर्ट ने कस्‍टम विभाग को निर्देश दिया है कि वो इस मूर्ति की नीलामी कराए ताकि इसकी असल कीमत पता चल सके. वहीं पर्यटक का दावा है कि उसने यह मूर्ति बैंकॉक में एक सड़क किनारे की दुकान से 1250 रुपये में खरीदी थी. ऐसे में कस्‍टम विभाग की मांग जायज नहीं है.

    इस मूर्ति के चार सिर और आठ भुजाएं हैं. वहीं हाईकोर्ट का कहना है कि कस्‍टम विभाग इसकी नीलामी करे. ताकि लोग आएं और इसे देखें. इससे यह पता चल सके कि क्‍या ये सच में बेशकीमती है.

    बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और जस्टिस जीएस कुलकर्णी की खंडपीठ 21 सितंबर को नेपियन सी रोड के रहने वाले आदि बी दुभाष की एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी. इसमें जुलाई 2014 और सितंबर 2019 के सीमा शुल्क अधिकारियों द्वारा पारित आदेशों को चुनौती दी गई थी, जिसमें शुल्‍क और जुर्माना चुकाने के लिए कहा गया था.

    याचिकाकर्ता ने वकील गौतम और अश्विन अंखड़ के माध्यम से कहा कि उन्होंने 2002 में बैंकॉक के एक स्ट्रीट मार्केट से धातु की चार मूर्तियां खरीदीं और सीमा शुल्क अधिकारियों ने उनमें से तीन को ‘गैर-प्राचीन’ मूर्ति के रूप में मंजूरी दे दी. वहीं एक मूर्ति को जब्‍त कर लिया गया. इसे बैंकॉक में एक स्ट्रीट वेंडर से 1250 रुपये में खरीदा गया था. अधिकारियों द्वारा इसकी 5 लाख रुपये कीमत लगाई गई. उस पर जुर्माना लगाया गया, जो मनमाना था.

    अंखद ने पीठ को बताया कि यह जांचने के लिए किया क्‍या मूर्ति सच में प्राचीन है, इसके लिए मुंबई में रेडियोकार्बन डेटिंग की कोई सुविधा नहीं है. यह भी कहा गया है कि भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) कोई उपयुक्त प्राधिकारी नहीं है, जो उक्त मूर्ति की उम्र की घोषणा करे.

    वकील ने कहा कि जहां कस्‍टम विभाग ने इस मूर्ति को एक प्राचीन वस्तु के रूप में घोषित किया, वहीं थाईलैंड के फाइन आर्ट्स एंड एनशियंट डिपार्टमेंट ने प्रमाणित किया था कि यह प्राचीन वस्तु नहीं थी.

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