मानसून के बाद मुंबई पर लेप्टोस्पायरोसिस का खतरा मंडराया, जानें क्या होती है ये बीमारी और कितनी है खतरनाक

भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक मानसून मुंबई पहुंच चुका है.

भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक मानसून मुंबई पहुंच चुका है.

Leptospirosis In India: लेप्टोस्पायरोसिस इंसानों में जानवरों के जरिये फैलता है, ऐसा तब होता है जब इंसानों का कोई हिस्सा जहां चोट लगी हो या स्किन कटी फटी हुई हो वो ऐसे पानी के संपर्क में आ जाती है

  • Share this:

मुंबई. देश की आर्थिक राजधानी मुंबई (Mumbai) में हुई भारी बारिश ने उसके हालात खराब कर दिए हैं. ऐसे में बृह्न्मुंबई म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन (BMC) ने गुरुवार को लेप्टोस्पायरोसिस (Leptospirosis) को लेकर परामर्श जारी किया है. मुंबई में हुई भारी बारिश और आने वाले दिनों में मूसलाधार बारिश के अनुमान के बाद नगर निगम ने लेप्टोस्पायरोसिस के मामलों के बढ़ने की चेतावनी जारी की है. लोग अगर पानी में उतरते हैं, या सड़कों भरे पानी में बगैर गम बूट पहने चलते हैं तो ऐसे लोगों को संक्रमण का ज्यादा खतरा है. अगर कोई जिसके पैरों में या शरीर के किसी हिस्से में चोट लगी हुई है और वो रुके हुए पानी में चलता है तो उसे लेप्टोस्पायरोसिस का मध्यम खतरा है.


लेप्टोस्पायरोसिस होता क्या है ?

ये एक तरह का दुर्लभ बैक्टीरियल संक्रमण होता है, लेप्टोस्पायरोसिस इंसानों में जानवरों के जरिये फैलता है, ऐसा तब होता है जब इंसानों का कोई हिस्सा जहां चोट लगी हो या स्किन कटी फटी हुई हो वो ऐसे पानी के संपर्क में आ जाती है जहां किसी जानवर का पेशाब पड़ा होता है. अलग अलग तरह के जानवर इस सूक्ष्मजीव के वाहक हो सकते हैं. लेकिन उनमें इस बीमारी के कोई लक्षण नज़र नहीं आते हैं. लेप्टोस्पायरा जीनस बैक्टीरिया की कई प्रजातियों से लेप्टोस्पायरोसिस होता है. और इस वजह से लोगों को वेल्स डिजीज या मेनिन्जाइटस हो सकता है जो जानलेवा हो सकती है. शहरी क्षेत्रों में इंसानों से इंसानों में लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमण के साक्ष्य नहीं पाए जाते हैं. लेप्टोस्पायरा जानवर जैसे चूहों, कुत्तों में पाया जाता है. ये संक्रमण कटी फटी त्वचा, आंख, और नाक के ज़रिये फैलता है.


उपचार भी जानिये
हल्के मामलों में डॉक्टर एंटीबायोटिक्स जैसे डॉक्सीसाइक्लिन या पेनिसिलिन लिख सकते हैं. लेप्टोस्पायरोसिस के गंभीर मरीजों को कुछ वक्त अस्पताल में गुज़ारना पड़ सकता है जहां उन्हें नसों के माध्यम से एंटीबायोटिक्स दिया जाएगा. ये इस पर भी निर्भर करता है कि लेप्टोस्पायरोसिस कौन से अंग पर असर डाल रहा है, किसी किसी को कुछ मामलों में सांस लेने के लिए वेंटिलेटर की ज़रूरत भी पड़ सकती है. अगर ये किडनी पर असर डालती है तो डायलिसिस की ज़रूरत भी पड़ सकती है, साथ ही नसों के माध्यम से तरल पदार्थ भी दिया जाता है जिससे शरीर में पानी और पोषक तत्वों की कमी ना हो.


अगर संक्रमण ज्यादा है तो अस्पताल में कुछ हफ्तों से महीनों तक गुजारने पड़ सकते हैं. इस संक्रमण में सबसे ज़रूरी होता है ये जानना कि मरीज का शरीर एंटीबायोटिक पर किस तरह प्रतिक्रिया दे रहा है, और संक्रमण से अंगों पर कितना नुकसान पहुंचा है. गर्भवती महिलाओं में लेप्टोस्पायरोसिस भ्रूण पर असर डाल सकता है. कोई भी महिला अगर गर्भधारण के दौरान इस संक्रमण का शिकार होती है तो उसे निगरानी के लिए अस्पताल में वक्त गुजारना पड़ सकता है.


लक्षण पर एक नज़र



संक्रमण के 5 से 14 दिन के भीतर अचानक लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षण उभरते हैं. हालांकि इसके निषेचन (अंडे सेना) की अवधि 2 से 30 दिन की रहती है. इस दौरान बुखार, ठंड लगना, बलगम आना, डायरिया, उल्टी या दोनों, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द खासकर पीठ और पिंडलियों में, लाल चकत्ते पड़ना, आंख में खुजली और पीलिया जैसे लक्षण सामने आते हैं. लेप्टोस्पायरोसिस के गंभीर लक्षण हल्के लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षण चले जाने के कुछ दिन बाद उभरते हैं. लक्षण इस बात पर भी निर्भर करता है कि कौन सा अंग संक्रमित हुआ है. इसकी वजह से किडनी, लिवर फेलियर, सांस में तकलीफ, और मेनिन्जाइटिस जैसी दिक्कतें हो सकती हैं जो जानलेवा भी हो सकती हैं.


भारत में लेप्टोस्पायरोसिस मामले को लेकर क्या है स्थिति

लेप्टोस्पायरोसिस भारत के पांच राज्यों और एक केद्र शासित प्रदेश में पाया जाता है. इनमें गुजरात, महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और अंडमान निकोबार आइलैंड शामिल है. 2005 में गुजरात में इसके 392 मामले सामने आए थे जिसमें 81 की मौत हो गई थी. इनमें से ज्यादातर मामले दक्षिणी जिले सूरत, नवासारी, वलसाड में मिले थे.



वहीं इसी साल महाराष्ट्र में 2,355 मामले सामने आए थे जिसमें 167 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी. केरल में इस दौरान 976 मामले दर्ज हुए थे. वहीं कालीकट में 282 मामले सामने आए थे. इसी तरह बीते दस सालों में कोट्टायम में 900 मामले दर्ज हुए हैं. तमिलनाडु में 2765 लोगों के संक्रमित होने की रिपोर्ट है. हाल ही में चेन्नई के अस्पताल से मिली रिपोर्ट के मुताबिक लेप्टोस्पायरोसिस की वजह से होने वाले रीनल फेलियर के मामले 31 फीसद से घटकर 7.5 फीसद रह गए हैं.

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज