मध्य रेलवे की महाराष्ट्र सरकार से मांग, सभी रेल कर्मचारियों को फ्रंटलाइन वर्कर्स घोषित करें

मध्‍य रेलवे ने की महाराष्‍ट्र सरकार से मांग. (File pic)

मध्‍य रेलवे ने की महाराष्‍ट्र सरकार से मांग. (File pic)

मध्य रेलवे के मुंबई डिवीजन में अब तक 9000 कर्मचारियों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है लेकिन किसी को फर्स्ट डोज लग पाया है तो किसी को दोनों डोज, क्योंकि वैक्सीन की किल्लत रेलवे को भी है.

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मुंबई. मध्य रेलवे (Central Railways) ने अपने कर्मचारियों को फ्रंटलाइन वर्कर (Frontline Workers) घोषित करने की मांग की है. इसके लिए महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra Government) को पत्र लिखा गया है. पत्र के जरिए सभी रेल कर्मचारियों को फ्रंटलाइन वर्कर्स घोषित करने की मांग की गई है. मध्य रेलवे के जीएम द्वारा राज्य सरकार को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि महाराष्ट्र में अब भी कोरोना मामले ज्यादा हैं और ऐसे में ड्यूटी के दौरान ज्यादा लोगों के संपर्क में आने से उन्हें संक्रमण होने का खतरा बना हुआ है. ऐसे में सभी रेल कर्मचारियों को फ्रंटलाइन वर्कर्स घोषित करके उन्हें वैक्सीनेशन में प्राथमिकता दी जाए.

ओडिशा और केरल सरकार रेल कर्मचारियों को फ्रंटलाइन वर्कर्स घोषित कर चुकी हैं. इसी के आधार पर मध्य रेलवे के जीएम की तरफ से महाराष्ट्र सरकार से यह मांग की गई है.

मध्य रेलवे में कुल करीब 1 लाख कर्मचारी हैं. जबकि मुम्बई डिवीजन में 32 हजार कर्मचारी काम करते हैं. रेलवे अपने स्तर पर अलग-अलग जगहों पर वैक्सीनेशन सेंटर खोलकर करीब 51 फीसदी कर्मचारियों का वैक्सीनेशन कर चुकी है. लेकिन किसी को फर्स्ट डोज लग पाया है तो किसी को दोनों डोज.

मध्य रेलवे के मुम्बई डिवीजन में अब तक 9000 कर्मचारियों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है लेकिन किसी को फर्स्ट डोज लग पाया है तो किसी को दोनों डोज, क्योंकि वैक्सीन की किल्लत रेलवे को भी है.
रेलवे द्वारा राज्य सरकार को पत्र लिखने की मुख्य वजह यह है कि अगर रेलवे कर्मचारियों को फ्रंटलाइन वर्कर्स घोषित कर दिया जाता है तो उन्हें वैक्सीन लगवाने में प्राथमिकता मिलेगी. मध्य रेलवे के सीपीआरओ शिवाजी सुतार ने बताया कि रेलवे के कर्मचारी 24 घंटे काम कर रहे हैं.


इसलिए ज्यादा पब्लिक के संपर्क में आने से उन्हें संक्रमण का खतरा ज्यादा है. इसलिए हमने राज्य सरकार से निवेदन किया है कि रेल कर्मचारियों को फ्रंटलाइन वर्कर्स घोषित कर उन्हें वैक्सिनेशन में प्राथमिकता दें. फिलहाल रेलवे को अब इस पत्र पर राज्य सरकार के जवाब का इंतजार है.

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