कोरोना वायरस भी तोड़ नहीं सका मुंबई वालों का हौसला, दोबारा पटरी पर लौटने को तैयार
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कोरोना वायरस भी तोड़ नहीं सका मुंबई वालों का हौसला, दोबारा पटरी पर लौटने को तैयार
मुंबई जल्द ही नए सिरे से एक बार फिर रेस के मैदान में कदम रख चुकी है.

15 साल पहले आये जलसंकट जैसी कुदरती आपदा के बाद आज फिर मुंबई दुनिया की सबसे बड़ी महामारी कोरोना वायरस (Coronavirus Pandemic) की चपेट में है. पर इसके बावजूद मुंबईकरों के स्पिरिट में कोई कमी नहीं है.

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  • Last Updated: July 26, 2020, 10:43 PM IST
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मुंबई. मुंबई (Mumbai) में आज से ठीक 15 साल पहले याने 26 जुलाई 2005 को जलप्रलय का एक ऐसा भीषण मंजर को देखने को मिला था कि आज भी "मुंबई में होगी तेज बारिश" यह खबर सुनते ही मुंबईकरों के दिल की धड़कने तेज हो जाती है. 15 साल पहले आये जलसंकट जैसी कुदरती आपदा के बाद आज फिर मुंबई दुनिया की सबसे बड़ी महामारी कोरोना वायरस (Coronavirus Pandemic) की चपेट में है. पर इसके बावजूद मुंबईकरों के स्पिरिट में कोई कमी नहीं है.

आज पूरा देश जहां "26 जुलाई कारगिल विजय दिवस" मना रहा है वहीं मुंबईकरों के लिए भी यह 26 तारीख कभी न भुलाने वाला दिन है. 26/11 को हुए आतंकी हमले को इस साल पूरे 12 साल होने जा रहे हैं. वहीं इस साल 26 जुलाई को मुंबई कोरोना वायरस से लड़ रही है. देश में कोरोना के सबसे ज्यादा मामले मुंबई में है. मुंबई में कोरोना के मामले 1 लाख का आंकड़ा पार कर चुके हैं वहीं अब तक 6 हजार से भी ज्यादा लोगों की यहां मौत हो चुकी है.

कोरोना महामारी के काल में कभी न रुकनेवाली मुंबई को भी लगभग चार महीने का ब्रेक लगा. किसी को भूखा सोने न देनेवाले इस शहर से लाखों मजदूरों को मज़बूरी में पैदल ही पलायन करना पड़ा. 15 साल पहले आये जलप्रलय में जहां आधी मुंबई डूब गयी थी वहीं आज 15 साल के बाद कोरोना की महामारी ने सड़कें सुनसान कर दी हैं.



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आज भी दिखाई दे रहा मुंबईकरों का हौसला
पर कहते हैं ना, शहर या गांव सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं होता शहर बनाता है वहां रहने वाले लोगों से, उनके जज्बे और हौसले से. यही हौसला आज भी मुंबईकरों में दिखाई दे रहा है. मुंबई अब धीरे-धीरे फिर एक बार पटरी पर आने की कोशिश कर रही है. लॉकडाउन, अनलॉक के अनेक चरण, मिशन बिगिन अगेन. हम नाम चाहे कुछ भी दे सकतें है पर मुंबई अब दोबारा खड़ी हो रही है. पहले भी बंद नहीं हुई थी बस, रोजमर्रा की जिंदगी में शहर को थोड़ा ब्रेक चाहिए था कुछ बदलाव के लिए. बाकि प्रशासन और अन्य जरूरी कामकाज चल ही रहे थे.

अस्पताल, सरकारी कामकाज, सुरक्षा, वर्क फ्रॉम होम ऐसे कई मामलों में सिर्फ दुनिया नहीं बल्कि वक्त के साथ ही चल रहा था. पर अब इस कोरोना ने भले ही मायानगरी मुंबई का चेहरा बदल दिया हो पर जज्बा वही है. मुंबई जल्द ही नए सिरे से एक बार फिर रेस के मैदान में कदम रख चुकी है. अब बस पहले जैसी दौड़ना बाकी है. इसमें कोई शक नहीं है कि कोरोना ने मुंबई को बदल दिया है पर यह बात यकीन के साथ कह सकते हैं कि मुंबई के हौसले को नहीं छू पाई.

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धारावी मॉडल की दुनिया में चर्चा
एशिया के सबसे बडे़ मुंबई में स्थित स्लम "धारावी" हिम्मत और एकता के साथ कोरोना को पछाड़ रही है. अब "धारावी मॉडल" की चर्चा अंतर्राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म पर भी एक बेहतरीन उदाहरण की तरह साबित हो रही है. खुद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)ने धारावी में कोरोना कंट्रोल के तरीकों की सराहना की है. WHO चीफ टेड्रोस एडहानोम ने धारावी मॉडल की तारीफ करते हुए कहा है कि मुंबई जैसे मेगासिटी के धारावी में कोरोना को नियंत्रित करना बताता है कि कोरोना पर काबू पाया जा सकता है. मुंबई की यही खास बात जाहिर करता है कि मुंबईकरों का हौसला आज भी बुलंद है जो लड़ना और जीतना दोनों जानते हैं.

देश में स्थिति कैसी भी हो मुंबई हमेशा से ही सुर्ख़ियों में रहता है. फिर बात चाहे तरक्की की हो या आपदा की मुंबई ने जितना लोगों को दिया है उतना ही इस शहर ने झेला भी है. पर हमेशा की तरह न मुंबई कभी थमी है न मुंबईकर कभी रुका है. बस अपने बुलंद हौसले के साथ मुंबई एक बार फिर देश की तरक्की में अपना मजबूत सहयोग देने के लिए तैयार हो रहा है.
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