कोरोना से हुई मौतों में महाराष्ट्र ने 11,617 पुराने केस और जोड़े; केंद्र ने उद्धव सरकार से मांगी जानकारी

महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने राज्य में कोविड-19 से मृत्यु के कुछ मामले दर्ज नहीं होने की खबरों को खारिज करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि राज्य सरकार पारदर्शी तरीके से काम कर रही है. फाइल फोटो

महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने राज्य में कोविड-19 से मृत्यु के कुछ मामले दर्ज नहीं होने की खबरों को खारिज करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि राज्य सरकार पारदर्शी तरीके से काम कर रही है. फाइल फोटो

Coronavirus in Maharashtra: कोविड से हुई मौत के आंकड़ों में सुधार करने की प्रक्रिया महाराष्ट्र में 17 मई को शुरू हुई थी, मौत के ये मामले एक हफ्ते पुराने हैं, जो रोजाना अपडेट की जाने वाली सूची में शामिल नहीं हो पाए हैं.

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नई दिल्ली. महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में कोरोना से हुई मौतों की संख्या में गुरुवार को 1,522 मौतों को भी जोड़ा है. ये मौतें पहले ही हो चुकी हैं. इस तरह राज्य में कोविड से हुई मौतों के आंकड़े को सुधारने की प्रक्रिया में एक दिन में सबसे ज्यादा मामले जोड़े गए हैं. केंद्र सरकार ने पूरे मामले पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है. महाराष्ट्र में बृहस्पतिवार को कोरोना वायरस के 12,207 नए मरीजों की पुष्टि हुई और 393 लोगों की मौत हुई. इसके बाद राज्य में कुल मामलों की संख्या 58,76,087 हो गई और मरने वालों की संख्या 1,03,748 पहुंच गई है.

स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि बृहस्पतिवार को आए मामले बीते तीन दिन में रिपोर्ट हुए मामलों की तुलना में थोड़े ज्यादा है. पिछले कुछ दिनों से संक्रमण के दैनिक मामले घटकर करीब 10,000 रह गए थे. इस साल नौ मार्च को राज्य में 9927 मामले आए थे. दिन में कुल 11,449 मरीजों को संक्रमण से उबरने के बाद अस्पतालों से छुट्टी दी गई. इसके बाद संक्रमण से मुक्त होने वाले मरीजों की संख्या 56,08,753 हो गई है. राज्य में संक्रमण से मुक्त होने की दर 95.45 और मृत्यु दर 1.77 प्रतिशत है. राज्य में 1,60,693 मरीज संक्रमण का इलाज करा रहे हैं.

केंद्र ने महाराष्ट्र और बिहार को लिखा

कोविड से हुई मौत के आंकड़ों में सुधार करने की प्रक्रिया महाराष्ट्र में 17 मई को शुरू हुई थी, मौत के ये मामले एक हफ्ते पुराने हैं, जो रोजाना अपडेट की जाने वाली सूची में शामिल नहीं हो पाए हैं. राज्य सरकार ने कुल 11,617 मामले जोड़े हैं. तीन हफ्ते पहले महाराष्ट्र में कोविड से हुई मौतों की संख्या 10,645 थी, ऐसे में देखे तो राज्य सरकार ने कम से कम 11 फीसदी मामले 17 मई के बाद कोविड से हुए मौतों के कुल मामलों में जोड़े हैं. सूत्रों के न्यूज18 को बताया कि केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र और बिहार सरकार को कोरोना से हुई मौतों की संख्या में सुधार करने के मामले में पत्र लिखा है. पिछले 15 दिनों में महाराष्ट्र ने 7,535 मौतों की पेडिंग संख्या को अपने जोड़ा है.
आंकड़े 48 घंटे के भीतर अपडेट करने आदेश

राज्य के स्वास्थ्य विभाग के महामारी विभाग में कार्यरत डॉ. प्रदीप अवाटे ने कहा कि जून के पहले दस दिनों में कोविड से हुई 8404 पुरानी मौतों को जोड़ा गया है. इनमें 5410 मामले एक हफ्ते पुराने हैं. हमने सभी जिला प्रशासन से मौत के आंकड़े 48 घंटे के भीतर अपडेट करने को कहा है. हालांति स्टाफ की कमी और तकनीकी कारणों की वजह से यह हमेशा संभव नहीं है.

गुरुवार को मुंबई में 655 नए मरीज सामने आए हैं और 22 संक्रमितों ने दम तोड़ा है. इसके बाद राजधानी में कुल मामले 7,13,495 हो गए हैं और 15,055 लोगों की जान जा चुकी है. मुंबई संभाग, जिसमें शहर के उपनगर आते हैं में 2058 मामले आए हैं और 145 लोगों की मौत हुई है. संभाग में कुल मामले 15,56,872 हो गए हैं और मृतक संख्या 29,339 पहुंच गई है. मार्च 2020 के बाद से मुंबई में कोरोना के मामले 7.13 लाख हो गए हैं, जबकि मरने वालों की संख्या 15,055 है.



राजेश टोपे बोले- आंकड़ों में हेराफेरी नहीं

महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने राज्य में कोविड-19 से मृत्यु के कुछ मामले दर्ज नहीं होने की खबरों को खारिज करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि राज्य सरकार पारदर्शी तरीके से काम कर रही है. राज्य में मृत्यु के 11,000 मामले कोविड-19 से मौत के आंकड़ों में दर्ज नहीं होने की खबरों पर टोपे ने मीडियाकर्मियों से कहा, ‘‘हर जिले में कोविड-19 के निजी और सरकारी अस्पताल हैं.

सरकारी अस्पतालों में कोरोना वायरस से मृत्यु के आंकड़े नियमित अद्यतन किये जाते हैं, वहीं निजी अस्पतालों के आंकड़ों में देरी हो जाती है और इसलिए मामलों की संख्या में असमानता है. सभी निजी अस्पतालों से कोविड-19 से मृत्यु के मामलों की सूची नियमित देने को कहा गया है.’’ मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों के मुख्य सिविल सर्जन को निर्देश दिया है कि अगर संक्रमण से मौत के मामलों की जानकारी नियमित नहीं दी जाती तो कार्रवाई की जाएगी. पोर्टल पर डाटा एंट्री ऑपरेटर आंकड़े दर्ज करते हैं और दुर्भाग्य से कई बार समय पर जानकारी नहीं डाली जाती.’’

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