पुणे: ना वेंटिलेटर मिला, ना एंबुलेंस, घर पर हुई कोविड पेशेंट की मौत; ठेले पर ले गए शव
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पुणे: ना वेंटिलेटर मिला, ना एंबुलेंस, घर पर हुई कोविड पेशेंट की मौत; ठेले पर ले गए शव
मामला महाराष्ट्र स्थित पुणे का है.

महाराष्ट्र (Maharashtra) के पुणे (Pune) में कोरोना वायरस (Coronavirus) से संक्रमित एक पेशेंट की घर पर ही मौत हो गई. इससे पहले वह अस्पताल गया था, जहां वेंटिलेटर नहीं मिला और जब मौत हुई तो एंबुलेंस का इंतजाम भी नहीं हो पाया.

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  • Last Updated: September 12, 2020, 8:40 AM IST
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पुणे. महाराष्ट्र (Maharashtra) के पुणे (pune) में कोरोना संक्रमित मरीज से जुड़ी लापरवाही का ऐसा मामला सामने आया है जो तमाम दावों-वादों की पोल खोल रहा है. यहां 40 वर्षीय एक कोरोना मरीज को पहले तो किसी अस्पताल में वेंटिलेटर वाला बेड नहीं मिला और इसके बाद घर पर ही उसकी मौत हो गई. इतना ही नहीं शव ले जाने के लिए एंबुलेंस भी नहीं मिली, जिसके चलते शव ठेले पर ले जाया गया. यह मामला पुणे शहर से लगभग 20 किलोमीटर दूर खानापुर गांव का है. यह घटना बुधवार की बताई जा रही है और एक वीडियो वायरल होने के बाद शुक्रवार को इसकी जानकारी सामने आई.

वीडियो में पीपीई सूट पहने चार लोगों को गांव से ठेले पर शव ले जाते देखा जा सकता है. मछली का व्यापार करने वाला यह शख्स और उनका भाई दोनों सोमवार को कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे. अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार खानापुर गांव के सरपंच निलेश जावलकर ने कहा कि दोनों पास के ही एक निजी अस्पताल में गए. अस्पताल ने उन्हें डिस्चार्ज करने के लिए 40,000 रुपए मांगे, तब उन्होंने मुझे और गांव वालों को बुलाया. हमने पैसे इकट्ठा किए और वहां गए. तब तक अस्पताल ने कहा कि उनके पास वेंटिलेटर बेड नहीं है.

दान में मिला बैग पुलिस से मिला
सरपंच ने कहा कि फिर उन्होंने जिला परिषद और स्थानीय प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों पर बात की. उन्होंने भी वेंटिलेटर वाले बेड्स ना मिलने की बात कही. सरपंच का दावा है कि दोनों भाइयों के पास घर लौटने के सिवाय कोई रास्ता नहीं था. दोनों छोटी सी झोपड़ी में रहते थे, जहां बुधवार रात 11.30 बजे शख्स की मौत हो गई. रिपोर्ट के अनुसार सरपंच ने कहा कि हमने जिला परिषद के साथ-साथ स्वास्थ्य अधिकारियों को फोन किया, लेकिन कोई एंबुलेंस नहीं मिला. सभी ने कहा कि एंबुलेंस नहीं है.
जावलकर ने कहा कि ग्रामीणों ने अंततः शव को ठेले पर ले जाने का फैसला किया. सरपंच, एक पुलिस पाटिल, स्थानीय सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र के एक डॉक्टर और एक स्थानीय युवक ने पीपीई किट पहनी और शव को श्मशान ले गए. सरपंच ने कहा कि 'हमें स्वास्थ्य केंद्र से पीपीई किट मिली, शव को लपेटने के लिए हवेली पुलिस स्टेशन से एक प्लास्टिक बैग मिला. पुलिस ने बताया कि बैग उन्हें दान में मिला था.'



हमें नहीं पता शव ठेले पर क्यों ले गए?- स्वास्थ्य अधिकारी
रिपोर्ट के अनुसार तालुका स्वास्थ्य अधिकारी सचिन खरात ने कहा कि '40 वर्षीय व्यक्ति को पहले एक कोविड केयर सेंटर में भर्ती कराया गया था. यह केयर सेंटर एक निजी अस्पताल के करीब था. शख्स को सांस लेने में तकलीफ थी. फिर उन्हें पास के एक निजी अस्पताल में ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने कहा कि उन्हें वेंटिलेटर की ज़रूरत है और उनके पास वेंटिलेटर नहीं है. मैंने हमारे चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिया था कि वे अस्पताल में मरीज को ऑक्सीजन लगाने के लिए कहें जब तक कि उसे वेंटिलेटर बेड नहीं मिल जाता. लेकिन मरीज और उसका भाई घर वापस चले गए.'

यह पूछे जाने पर कि मरीज कोविड केयर सेंटर से घर वापस कैसे जा सकते हैं? इस पर खरात ने कहा, 'हम यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या हुआ.' उन्होंने कहा, 'एक मरीज के अंतिम संस्कार के लिए उचित व्यवस्था करना ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी है. मुझे नहीं पता कि वह शव को ठेले पर क्यों ले गए?'
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