पुणे के अस्पताल ने 3 दिन तक नहीं दिया कोविड-19 पीड़ित का शव, जांच के आदेश

IMA के मुताबिक पिछले साल कोरोना की पहली लहर में देश के 730 डॉक्टरों की मौत हो गई थी. (सांकेतिक फोटो)

कोरोना संक्रमण के दौरान मरीजों के अस्पताल में भर्ती होने के बाद कई बार परिजनों को उनके इलाज और वास्तविक स्थिति के बारे में पता ही नहीं चल पाता. ऐसा ही एक केस महाराष्ट्र के पुणे से आया है, जहां कोरोना मरीज की मौत के 3 दिन बात तक अस्पताल ने उसका शव परिजनों को नहीं दिया.

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    पुणे. कोरोना संक्रमण की स्थिति महाराष्ट्र में थोड़ी स्थिर होती दिख रही है, लेकिन स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की स्थिति ठीक नहीं है. राज्य के पुणे जिला स्वास्थ्य विभाग से इंसानियत को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है. यहां कथित रूप से अस्पताल के बिल का भुगतान नहीं होने पर अस्पताल ने एक कोरोना वायरस संक्रमित का शव उसके परिजनों को नहीं दिया. ये घटना तालेगांव दाभाडे के एक मेडिकल कॉलेज-अस्पताल की है, जिसके उजागर होने के बाद अस्पताल खिलाफ जांच का आदेश दिया गया है.

    जिला प्रशासन ने अस्पताल के खिलाफ दी गई शिकायत की जांच के लिए एक 8 सदस्यीय समिति बनाई है. इस समिति में जिला स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, बी जे मेडिकल कॉलेज और सासून जनरल अस्पताल के एक डॉक्टर, खाद्य और औषधि प्रशासन के एक अधिकारी, जिला स्वास्थ्य अधिकारी तथा जिला सिविल सर्जन शामिल हैं. जिला सिविल सर्जन अशोक नंदापुरकर ने कहा कि - मावल से शिवसेना के लोकसभा सदस्य श्रीरंग बर्णे की ओर से शिकायत मिली है कि अस्पताल प्रबंधन ने बिलों का भुगतान नहीं किये जाने पर कथित तौर पर एक कोविड-19 पीड़ित के शव को तीन दिन तक रोक कर रखा गया था. उन्होंने जानकारी दी कि 8 सदस्यीय समिति शिकायत पर जांच के लिए मंगलवार को अस्पताल का दौरा करेगी.



    बर्णे ने पीटीआई-भाषा से बातचीत में कहा है कि मावल के एक गरीब रोगी की पिछले दिनों कोरोना वायरस संक्रमण से मृत्यु हो गयी थी और महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना के माध्यम से मेडिकल बिल का भुगतान किये जाने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने मृतक के परिजनों से और पैसा मांगा. अब इस मसले की जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.

    (Disclaimer: यह खबर सीधे सिंडीकेट फीड से पब्लिश हुई है. इसे News18Hindi टीम ने संपादित नहीं किया है.)