कोरोना की दूसरी लहर का धारावी पर असर कम, क्या एंटीबॉडीज के चलते कम आ रहे हैं केस?

रविवार को धारावी में सिर्फ 76 नए केस सामने आए.

रविवार को धारावी में सिर्फ 76 नए केस सामने आए.

Coronavirus: मुंबई में कोरोना के कुल मामले 5 लाख को पार कर गए हैं. जबकि इसमें धारावी का योगदान सिर्फ 5,676 केस का है. रविवार को यहां सिर्फ 76 नए केस सामने आए.

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  • Last Updated: April 12, 2021, 1:28 PM IST
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(सिमांतनी डे)

मुंबई. कोरोना वायरस (Coronavirus) के संक्रमण के चलते पूरे महाराष्ट्र में कोहराम मचा है. यहां रविवार को कोरोना के अब तक के सबसे ज्यादा 63,294 नए मामले सामने आए. राजधानी मुंबई में भी हालात तेज़ी से बिगड़ रहे हैं. मुंबई में पिछले 24 घंटे के दौरान 9,986 नए मामले सामने आए हैं और 79 मरीजों की मौत हो गई. लेकिन राहत की बात ये है कि कोरोना की दूसरी लहर का असर एशिया की सबसे बड़ी स्लम बस्ती धारावी (Dharavi) में ज्यादा नहीं दिख रहा है.

पिछले साल यहां बड़ी मुश्किल से कोरोना के संक्रमण पर काबू पाया गया था. यहां छोटे से इलाकों में 6 लाख से ज्यादा लोग रहते हैं. ऐसे में झुग्गियों में रहने वाले लोग कोरोना के प्रोटोकॉल को फॉलो नहीं कर पाते. इसके बावजूद पिछले साल यहां तेज़ी से बढ़ रहे कोरोना के केस को रोकने में कामयाबी मिली थी. धारावी मॉडल की विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी तारीफ की थी. पिछले साल 25 दिसंबर को यहां कोरोना का कोई नया केस नहीं आया था. इस साल भी धारावी का रिकॉर्ड ठीक ठाक रहा है. जनवरी में तीन ऐसे दिन आए जब यहां से कोरोना का कोई नया केस नहीं मिला.

कम केस के पीछे क्या है वजह?
मुंबई में कोरोना के कुल मामले 5 लाख को पार कर गए हैं. जबकि इसमें धारावी का योगदान सिर्फ 5,676 केस का है. रविवार को यहां सिर्फ 76 नए केस सामने आए. आखिर इतने कम केस आने की वजह क्या है? सरकारी और गैर-सरकारी अधिकारियों, साथ ही साथ डॉक्टरों का मानना ​​है कि यहां लोगों में पिछले साल कोरोना की एंटीबॉडीज बन गई होगी. इसके अलावा यहां टीकाकरण अभियान भी चल रहा है. साथ ही लोगों को कोरोना को लेकर जागरूक भी किया जा रहा है.

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बड़े बिल्डिंग के मुकाबले झुग्गियों में केस कम!



धारावी में काम करने वाली ARMMAN नाम की एनजीओ की चीफ प्रोग्राम ऑफिसर कार्लाइल परेरा का कहना है कि उन्होंने भी ये ट्रेंड देखा है कि मुंबई में बड़े बिल्डिंग के मुकाबले झुग्गियों में कोरोना के केस कम आ रहे हैं. उन्होंने बताया, 'हमें भी शुरू से ही ये ट्रेंड दिखा है. हमें डर था कि पहली लहर के दौरान झुग्गी बस्तियों में कोरोना ज्यादा फैलेगा. लेकिन वैसा नहीं हुआ. ऐसा नहीं है कि झुग्गी की आबादी प्रभावित नहीं हुई थी, लेकिन जनसंख्या घनत्व को देखते हुए, मामले तुलनात्मक रूप से कम थे, और अब भी हैं.'



SERO सर्वे की रिपोर्ट

पिछले साल सीरो सर्वे के दौरान पता चला था कि झुग्गी में रहने वाले 57 फीसदी लोगों में कोरोना की एंटी बॉडीज़ बन गई थी. जबकि मुंबई के अलग-अलग बिल्डिंग में रहने वाले सिर्फ 16 फीसदी लोगों में एंटी बॉडी दिखी थी. हालांकि यहां ये बता दें कि सीरो सर्वे के सैंपल धारावी से नहीं लिए गए थे. डॉक्टर फोर यू के फाउंडर डॉक्टर रविकांत सिंह का कहना है, 'पिछले साल लॉकडाउन के दौरान बिल्डिंग में रहने वाले ज्यादातर लोग अपने घरों में थे. जबकि झुग्गी में रहने वाले काम के लिए बाहर निकले थे. ऐसे में हो सकता है कि इन्हें पहले ही कोरोन हो गया हो. और इन सब में एंटी बॉडी बन गई हो.'
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