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अदालत ने सुधा भारद्वाज को 50,000 रुपये के मुचलके पर जेल से रिहा करने की अनुमति दी

अदालत ने सुधा भारद्वाज को 50,000 रुपये के मुचलके पर जेल से रिहा करने की अनुमति दी

इंदौर हाई कोर्ट ने मॉब लिंचिंग के बाद गिरफ्तार किए गए तस्लीम को जमानत दे दी है.

इंदौर हाई कोर्ट ने मॉब लिंचिंग के बाद गिरफ्तार किए गए तस्लीम को जमानत दे दी है.

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (National Investigation Agency) की विशेष अदालत ने सुधा भारद्वाज (Sudha Bharadwaj) को नकद मुचलका जमा कराने की अनुमति दी, जिससे वह बुधवार या बृहस्पतिवार को जेल (Jail) से बाहर आ सकेंगी. वह अभी मुंबई (Mumbai) की भायखला जेल में बंद हैं. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत द्वारा उनकी रिहाई के लिए लगाई अन्य शर्तों में उनका अदालत के न्यायाधिकार क्षेत्र के भीतर रहना और उसकी अनुमति के बिना मुंबई छोड़कर नहीं जाना शामिल हैं.

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    मुंबई. भीमा-कोरेगांव मामले (Koregaon-Bhima case) में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (National Investigation Agency) की विशेष अदालत ने बुधवार को कहा कि वकील-कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज (Sudha Bharadwaj) को 50,000 रुपये के मुचलके पर जेल (Jail) से रिहा किया जा सकता है. भारद्वाज को एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में बॉम्‍बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) से तकनीकी खामी के आधार पर जमानत मिली है. अदालत ने भारद्वाज को नकद मुचलका जमा कराने की अनुमति दी, जिससे वह बुधवार या बृहस्पतिवार को जेल से बाहर आ सकेंगी. वह अभी मुंबई की भायखला जेल में बंद हैं. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत द्वारा उनकी रिहाई के लिए लगाई अन्य शर्तों में उनका अदालत के न्यायाधिकार क्षेत्र के भीतर रहना और उसकी अनुमति के बिना मुंबई छोड़कर नहीं जाना शामिल हैं.

    बंबई उच्च न्यायालय ने एक दिसंबर को भारद्वाज को तकनीकी खामी के आधार पर जमानत प्रदान कर दी थी और विशेष एनआईए अदालत को उनकी जमानत की शर्तों और रिहाई की तारीख पर फैसला लेने का निर्देश दिया था. इसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता को बुधवार को विशेष न्यायाधीश डी ई कोठलिकर के समक्ष पेश किया गया.

    भारद्वाज को गैरकानूी गतिविधियां (रोकथाम) कानून के प्रावधानों के तहत अगस्त 2018 में एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में गिरफ्तार किया गया था. शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली एनआईए की याचिका मंगलवार को खारिज कर दी थी. भारद्वाज मामले में उन 16 कार्यकर्ताओं और विद्वानों में पहली आरोपी हैं, जिन्हें तकनीकी खामी के आधार पर जमानत दी गई है.

    इसे भी पढ़ें :- कोरेगांव-भीमा मामला: सुधा भारद्वाज 3 साल बाद आज होंगी रिहा, जमानत में ये शर्तें हैं शामिल

    यह मामला 31 दिसंबर 2017 को पुणे के शनिवारवाड़ा में एल्गार परिषद की संगोष्ठी में भड़काऊ भाषण देने से जुड़ा है. पुलिस का दावा है कि इसके अगले दिन पुणे के बाहरी इलाके कोरेगांव-भीमा में भाषण की वजह से हिंसा भड़की. पुलिस का यह भी दावा है कि इस संगोष्ठी को माओवादियों का समर्थन हासिल था. बाद में इस मामले की जांच एनआईए को सौंप दी गई थी.

    Tags: Bombay high court, Court, Mumbai, National Investigation Agency

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