Cyclone Tauktae: शिवसेना ने राज्यपाल पर लगाया भेदभाव का आरोप, सामान में लिखा- महाराष्ट्र के साथ अन्याय क्यों?

शिवसेना सांसद संजय राउत. (फाइल फोटो)

शिवसेना सांसद संजय राउत. (फाइल फोटो)

Saamna Editorial: सामना ने संपादकीय में विधान परिषद में 12 मनोनित होने वाले सदस्यों का भी मुद्दा उठाया है. लिखा है, ' भारतीय जनता पार्टी के महामंडलेश्वरों को इस वास्तविकता को समझ लेना चाहिए.

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मुंबई. पिछले हफ्ते चक्रवाती तूफान ‘टाउते’ (Cyclone Tauktae) से गुजरात और महाराष्ट्र को भारी नुकसान हुआ. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चक्रवाती तूफान ‘टाउते से प्रभावित गुजरात को तत्काल राहत के लिए 1000 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता की घोषणा की. इस बीच महाराष्ट्र की सरकार इस बात से नाराज़ है कि उनके राज्य के लिए इतनी बड़ी सहायाता राषि का ऐलान नहीं किया गया. शिवसेना ने इसको लेकर राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी पर निशाना साधा है. सामना के संपादकीय में राज्यपाल पर भेदभाव का आरोप लगाया गया है.

सामना के संपादकीय में लिखा है, 'टाउते चक्रवाती तूफान से नुकसान हुआ. प्रधानमंत्री ने गुजरात के तूफान प्रभावितों को हजार करोड़ रुपए दिए. फिर महाराष्ट्र पर अन्याय क्यों करते हो? मेरे राज्य को भी 1500 करोड़ दो, ऐसी मांग करके राज्यपाल को ‘महाराष्ट्र’ की जनता का मन जीतना चाहिए. ये सब करने की बजाय राज्यपाल 6 महीने से एक फाइल की राजनीति कर रहे हैं. अब तो वह फाइल भी भूतों ने चुरा ली है. राजभवन में हाल के दिनों में किन भूतों का आना-जाना बढ़ा है? एक बार शांति यज्ञ करना होगा.'

राज्यपाल कुछ ज्यादा ही चर्चा में

शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में कहा है कि क्या महाराष्ट्र का राजभवन गतिशील प्रशासन की व्याख्या में नहीं आता है? ऐसा सवाल खड़ा हो गया है. वर्तमान समय में पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र के राज्यपाल कुछ ज्यादा ही चर्चा में रहते हैं. पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीश धनकड़ कुछ ज्यादा ही तेज तो महाराष्ट्र के राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी की गति कुछ मामलों में धीमी पड़ गई है. यह आलोचना न होकर वास्तविकता है.
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मनोनीत  सदस्यों का मामला

सामना ने संपादकीय में विधान परिषद में 12 मनोनित होने वाले सदस्यों का भी मुद्दा उठाया है. लिखा है, ' भारतीय जनता पार्टी के महामंडलेश्वरों को इस वास्तविकता को समझ लेना चाहिए. महाराष्ट्र के मंत्रिमंडल ने विधान परिषद में 12 सदस्यों को मनोनीत करने की सिफारिश की. इस सिफारिश को 6 महीने बीत गए. राज्यपाल निर्णय लेने को तैयार नहीं हैं. इस पर मुंबई हाई कोर्ट ने राज्यपाल से सवाल पूछा है.'

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