दूसरों की भूख मिटाने वाले 'डब्बावाले' खुद के लिए दो वक्त की रोटी नहीं जुटा पा रहे
Maharashtra News in Hindi

दूसरों की भूख मिटाने वाले 'डब्बावाले' खुद के लिए दो वक्त की रोटी नहीं जुटा पा रहे
डब्बा वालों ने मुंबई के गार्डियन मंत्री के साथ 2 घंटे बैठक की (सांकेतिक फोटो)

लॉकडाउन (Lockdown) में ऑफिस बंद होने की वजह से पिछले ढाई महीने से डब्बे वाले अपने घरों पर है, उन्हें न तो सरकार (Government) की तरफ से न किसी दूसरी संस्था की तरफ से कोई मदद मिली जिसके बाद अब उनके लिए सबसे बड़ी दिक्कत रोजी-रोटी की समस्या की हो गई है.

  • Share this:
(अभिषेक पांडे)

मुंबई. जिन डब्बेवालों (Dabbawala) को एक मुंबई (Mumbai) का एक पिलर समझा जाता है, आज वही डब्बे वाले अपना जीविकोपार्जन भी नही कर पा रहे हैं. जिन डब्बे वालों के ऊपर कई दूसरे विश्वविद्यालयों (Universities) ने स्टडी किया. उनके टाइम मैनेजमेंट (Time Management) पर अपनी थिअरी बनाई. आज उन्हीं डब्बे वाले वालों का टाइम खराब हो गया है.

लॉकडाउन (Lockdown) में ऑफिस बंद होने की वजह से पिछले ढाई महीने से डब्बे वाले अपने घरों पर है, उन्हें न तो सरकार (Government) की तरफ से, न किसी दूसरी संस्था की तरफ से कोई मदद मिली जिसके बाद आज उनके लिए सबसे बड़ी दिक्कत रोजी-रोटी की समस्या की हो गई है.



मंत्री ने दिया हर महीने राशन देने का आश्वासन, 2 हजार प्रति माह पर दिया चर्चा का आश्वासन
आखिरकार डब्बे वाले थक-हार कर सरकार के पास पहुंचे और सरकार के मंत्री असलम शेख के साथ उन्होंने मीटिंग की अपनी परेशानी बताई और सरकार से उस परेशानी के हल निकालने के लिए गुजारिश की. डब्बावालों की दिक्कत को देखते हुए सरकार की तरफ से मुंबई के गार्डियन मंत्री असलम शेख डब्बे वालों के साथ करीब 2 घंटे तक बैठक की, जिसमें डब्बे वालों ने सरकार के मंत्री असलम शेख के सामने 2 मांगे प्रमुख तौर पर रखी, पहला जब तक लॉकडाउन (Lockdoen) नहीं खुल रहा है तब तक उन्हें हर महीने राशन उपलब्ध कराएं और दूसरी मांग लॉकडाउन खुलने तक उन्हें भी ₹2000 महीना दिया जाए.

जिस पर मंत्री असलम शेख ने एक मांग को तुरंत पूरा करते हुए मुंबई के सभी डब्बे वालों को हर महीने राशन देने का आश्वासन दिया साथ ही हर महीने ₹2000 की मांग पर उन्होंने डब्बे वालों को आश्वासन दिया कि कैबिनेट में इस बात पर चर्चा होगी.

सरकार की ओर उम्मीद भरी नज़र से देख रहे डब्बावाले
डब्बे वालों को लेकर मंत्री असलम से बताते हैं कि डब्बे वाले मुंबई (Mumbai) के दूसरी लाइफ लाइन पिछले 100 साल से ज्यादा समय से डब्बावाले मुंबई के लाखों लोगों का पेट डब्बा पहुंचा कर सकते हैं लेकिन आज खुद डब्बे वाले मुसीबत में हैं और अपने घर का राशन चलाने के लिए सरकार के पास आए हैं.

डब्बावाले फिलहाल इस समय मुश्किल दौर में हैं और सरकार के तरफ इस उम्मीद से देख रहे हैं शायद सरकार उन्हें भी दूसरे सेक्टर की तरह मदद देगी और फिर से डब्बे वाले अपनी पुरानी जिंदगी जी सकेंगे. जो लॉकडाउन के बाद पूरी तरीके से खत्म हो चुकी है.

यह भी पढ़ें: सोनू सूद पर शिवसेना ने उठाए सवाल तो राजनाथ बोले-संकट में श्रमिकों की मदद की है
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज