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महाराष्ट्र में सियासी उलट-फेरः शिवसेना को झेलना होगा सबसे ज्‍यादा नुकसान

Prashant LilaRamdas | News18Hindi
Updated: November 23, 2019, 12:59 PM IST
महाराष्ट्र में सियासी उलट-फेरः शिवसेना को झेलना होगा सबसे ज्‍यादा नुकसान
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा नुकसान शिवसेना को ही झेलना पड़ेगा. (फाइल फोटो)

महाराष्ट्र (Maharashtra) में बीजेपी (BJP) की सरकार बनने के साथ ही शिवसेना (Shiv Sena) बड़े नुकसान में आ जाएगी. पहले पार्टी ने एनडीए (NDA) से नाता तोड़ा ओर फिर उसके एकमात्र मंत्री से भी इस्तीफा दिलवा दिया गया, अब सत्ता से भी दूर हो गए.

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  • Last Updated: November 23, 2019, 12:59 PM IST
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मुंबई. महाराष्ट्र (Maharashtra) में हुए सियासी उलटफेर के बाद अब जो पार्टी सबसे ज्‍यादा नुकसान में दिख रही है वह है शिवसेना (Shiv Sena). शिवसेना ने अपना जिस तरह से एनडीए (NDA) से नाता तोड़ा और फिर पार्टी के एकमात्र मंत्री से भी इस्तीफा दिलवा दिया गया, वह अब उसके ‌लिए ही घातक हो गया. इतना करने के बाद भी शिवसेना को महाराष्ट्र की सत्ता नहीं मिलती दिख रही है. दूसरी तरफ कांग्रेस (Congress) को भी खासा नुकसान हो गया है. कांग्रेस ने अपनी विचारधारा को पीछे छोड़ते हुए शिवसेना के साथ जाने का फैसला लगभग ले ही लिया था. शिवसेना निश्चित तौर पर हिंदूवादी पार्टी कही जा सकती है क्योंक‌ि वे सावरकर को मानती है. ऐसे में कांग्रेस का वोट बैंक इससे हिल सकता है. वहीं एनसीपी (NCP) को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है. टूटने की स्थिति में एनसीपी को भी कोई फायदा नहीं होगा.

क्या केंद्र में मंत्री बनेंगी सुप्रिया?
केंद्र में सुप्रिया सुले के मंत्री बनाए जाने के बारे में जो भी चर्चाएं चल रही हैं उन्हें अटकलों के तौर पर ही लिया जाना चाहिए. जानकारों का कहना है कि यदि स्थि‌तियां बदलती हैं और केंद्र में सुप्रिया के मंत्री बनने की स्थिति आती भी है तो वे तब ही पद स्वीकार करेंगी जब शरद पवार चाहेंगे. हालांकि एक बड़ा वर्ग है जो यह मानता है कि शरद पवार ऐसा नहीं चाहेंगे. केंद्र में सुप्रिया सुले के मंत्री बनाए जाने के बाद शरद पवार को पार्टी की कमान अजित पवार के हाथों में सौंपनी पड़ेगी. शरद पवार यह कभी नहीं चाहेंगे कि पार्टी की पूरी कमान अजित पवार के हाथों में जाए.

शिवसेना के सामने क्या है विकल्प

शिवसेना के सामने विकल्प चाहे जो भी हो लेकिन अभी जो प्रेस कॉन्फ्रेंस होनी है उसके बाद ही तय हो पाएगा कि पार्टी की स्ट्रैटेजी क्या होगी. वैसे दिग्विजय सिंह ने जो कहा कि तीनों पार्टियों (कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना) को सड़कों पर उतर कर इसकी लड़ाई लड़नी चाहिए. दिग्विजय सिंह ने इस तरह के फैसले का विरोध करने का यह तरीका एक सुझाया है. जानकारों का यह भी कहना है कि इस मामले में फिलहाल सुप्रीम कोर्ट नहीं जाया जा सकता. क्योंकि सुप्रीम कोर्ट यह कहेगा कि निर्णय फ्लोर पर होना चाहिए क्योंकि सरकार बन चुकी है.

कांग्रेस क्या करेगी
जिस तरह से कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की योजना के बाद भी पार्टी ने ऐसा नहीं किया, उससे यह लग रहा है कि पार्टी फिलहाल अपने को इस पूरे घटनाक्रम से किनारे रखना चाह रही है. ऐसा माना जा रहा है कि इन दोनों के निर्णय के बाद ही कांग्रेसी अपनी भूमिका तय करेगी. यहां यह भी ध्यान देने वाली बात है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मुंबई में ही रुके हुए हैं.
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First published: November 23, 2019, 12:59 PM IST
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