एल्गार परिषद केस: कवि वरवर राव की तबीयत बिगड़ी, मुंबई के जेजे अस्पताल में भर्ती
Maharashtra News in Hindi

एल्गार परिषद केस: कवि वरवर राव की तबीयत बिगड़ी, मुंबई के जेजे अस्पताल में भर्ती
वरवर राव और नौ अन्य कार्यकर्ताओं को एल्गार परिषद-माओवादी संपर्क मामले में गिरफ्तार किया गया है. (PTI)

वरवर राव (Varavara Rao) और नौ अन्य कार्यकर्ताओं को एल्गार परिषद-माओवादी संपर्क (Elgar Parished Case) मामले में गिरफ्तार किया गया है. इस मामले की शुरुआत में पुणे पुलिस ने जांच की थी, लेकिन इस साल जनवरी में इसे राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंप दिया गया.

  • Share this:
मुंबई. एल्गार परिषद-माओवादी (Elgar Parished Case) संबंधों के मामले में गिरफ्तार कवि और कार्यकर्ता वरवर राव (Varavara Rao) को चक्कर आने की शिकायत के बाद मंगलवार को यहां सरकारी जे जे अस्पताल में भर्ती कराया गया. राव (80) पिछले करीब दो साल से जेल में बंद हैं. उन्हें नवी मुंबई की तलोजा जेल में रखा गया है.

कार्यकर्ता और उनके परिवार के सदस्यों ने दावा किया है कि वह कुछ समय से अस्वस्थ हैं. परिवार ने जेल प्राधिकारियों से उन्हें तत्काल चिकित्सकीय सेवा मुहैया कराए जाने की मांग की थी.

कार्यकर्ता के वकील आर सत्यनारायण अय्यर ने कहा, ‘राव को चक्कर आने के बाद सोमवार रात जे जे अस्पताल ले जाया गया. अस्पताल उनकी कुछ जांचें कर रहा है.’राव ने अस्थायी जमानत का अनुरोध करते हुए सोमवार को बंबई हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. इसके लिए उन्होंने अपने बिगड़ते स्वास्थ्य और वर्तमान कोविड-19 महामारी का हवाला दिया था.



कार्यकर्ता ने अदालत से यह भी अनुरोध किया था कि वह जेल प्राधिकारियों को उनका मेडिकल रिकॉर्ड पेश करने और उन्हें किसी अस्पताल में भर्ती कराए जाने का निर्देश दे.
एल्गार परिषद मामला: अदालत ने खारिज की गौतम नवलखा की वैधानिक जमानत

राव ने अपने वकील आर सत्यनारायण अय्यर के माध्यम से हाईकोर्ट में दो याचिकाएं दायर की थीं. एक में विशेष एनआईए अदालत द्वारा 26 जून को उनकी जमानत याचिका खारिज किये जाने को चुनौती दी गई थी, जबकि दूसरी याचिका में नवी मुंबई की तलोजा जेल के अधिकारियों को उनका मेडिकल रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया.

बता दें कि वरवर राव और नौ अन्य कार्यकर्ताओं को एल्गार परिषद-माओवादी संपर्क मामले में गिरफ्तार किया गया है. इस मामले की शुरुआत में पुणे पुलिस ने जांच की थी, लेकिन इस साल जनवरी में इसे राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंप दिया गया.

यह मामला 31 दिसंबर, 2017 में पुणे के एल्गार परिषद सम्मेलन में कथित उत्तेजक भाषण देने से जुड़ा है. पुलिस के अनुसार इसी के बाद अगले दिन कोरेगांव भीमा वार स्मारक के पास हिंसा हुई थी.

पुलिस ने यह भी दावा किया था कि इस सम्मेलन का जिन लोगों ने आयोजन किया था, उनका कथित रूप से माओवादियों से संबंध था. (PTI इनपुट)
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading