एल्गार परिषद मामला: अदालत ने खारिज की गौतम नवलखा की वैधानिक जमानत
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एल्गार परिषद मामला: अदालत ने खारिज की गौतम नवलखा की वैधानिक जमानत
नवलखा ने इस साल 14 अप्रैल को राष्ट्रीय जांच एजेंसी के सामने आत्मसमर्पण किया था (File Photo)

एल्गार परिषद मामले (Elghar Parishad Case) के एक आरोपी - सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा (Gautam Navlakha) ने यह दावा करते हुए अपराध दंड प्रक्रिया संहिता (CRPC) की धारा 167 के तहत वैधानिक जमानत मांगी कि वह 90 से अधिक दिनों से हिरासत में हैं (लेकिन आरोपपत्र (Chargesheet) दायर नहीं किया गया है).

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मुंबई. मुंबई (Mumbai) की एक विशेष अदालत ने रविवार को एल्गार परिषद मामले (Elghar Parishad Case) के एक आरोपी - सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा (Gautam Navlakha) को वैधानिक जमानत देने से इनकार कर दिया. नवलखा ने यह दावा करते हुए अपराध दंड प्रक्रिया संहिता (CRPC) की धारा 167 के तहत वैधानिक जमानत मांगी कि वह 90 से अधिक दिनों से हिरासत में हैं (लेकिन आरोपपत्र (Chargesheet) दायर नहीं किया गया है). उन्होंने इस साल 14 अप्रैल को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (National Investigation Agency) के सामने आत्मसमर्पण किया था. वह नवी मुंबई की तलोजा जेल (Taloja Jail) में हैं. वह 2018 में 29 अगस्त से एक अक्टूबर तक घर में नजरबंद थे.

नवखला के वकील ने कहा कि अदालत को घर में उनके मुवक्किल को नजरबंद रखे जाने को भी जांच एजेंसियों (Investigation Agencies) की हिरासत की अवधि मानना चाहिए. दूसरा, जांच एजेंसी ने 90 दिनों की निर्धारित अवधि में आरोपपत्र दायर भी नहीं किया है. एनआईए (NIA) की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल अनिल सिंह ने कहा कि (नवलखा की) यह अर्जी विचारयोग्य नहीं है. उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय (High Court) ने नजरबंदी का आदेश दिया था और यह अवधि सीआरपीसी की धारा 167 के तहत हिरासत नहीं होगी.

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कोर्ट ने मानी चार्जशीट 180 दिन में दाखिल करने की मांग
एनआईए की बातों से सहमत होते हुए विशेष न्यायाधीश दिनेश कोलठालिकर ने यह दलील खारिज कर दी कि नजरबंदी को हिरासत अवधि माना जाए. अदालत ने कहा कि नवलखा नजरबंदी के दौरान जांच एजेंसियों की हिरासत में कभी नहीं रहे. नवलखा को अदालत ने दस दिनों के लिए एनआईए की हिरासत में भेजा था. जांच एजेंसी ने यह कहते हुए हिरासत की मांग की थी कि उसे इस मामले में साजिश का खुलासा करने के लिए उनसे पूछताछ करने की जरूरत है.

अदालत ने नवलखा और अन्य आरोपी सामाजिक कार्यकर्ता डॉ आनंद तेलटुम्बेडे (Anand Teltumbede) के खिलाफ आरोपपत्र दायर करने के लिए 90 दिनों को बढ़कर 180 दिन करने की एनआईए की मांग मान ली. नवलखा को एल्गार परिषद माओवादी लिंक मामले में अन्य के साथ गिरफ्तार किया गया था. इस साल जनवरी में यह मामला पुणे पुलिस से लेकर एनआईए को सौंपा गया था.

यह मामला 31 दिसंबर, 2017 में पुणे (Pune) के एल्गार परिषद सम्मेलन में कथित उत्तेजक भाषण देने से जुड़ा है. पुलिस के अनुसार इसी के बाद अगले दिन कोरेगांव भीमा वॉर मेमोरियल (Bhima Koregaon War Memorial) के पास हिंसा हुई थी.
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