मुंबई में अब डॉक्टरी सलाह के बिना कोई भी करा सकेगा कोरोना टेस्ट, विशेषज्ञों ने भी बताया बेहद जरूरी

विशेषज्ञों के अनुसार देश में एक दिन में एक लाख परीक्षण करने की क्षमता है (AP Photo/Manish Swarup)

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में लोग अब बिना डॉक्टर की सलाह के भी कोरोना की जांच (Walk In Corona Test) करा सकेंगे. मुंबई देश का पहला ऐसा शहर है, जहां यह अनुमति दी गई है. एक्सपर्ट्स का भी मानना है कि कोरोना से जंग के लिए यह फैसला उचित है.

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    नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Coronavirus India) के बढ़ते प्रकोप के बीच महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में लोग अब बिना डॉक्टर की सलाह के भी कोरोना की जांच (Walk In Corona Test) करा सकेंगे. मुंबई देश का पहला ऐसा शहर है, जहां यह अनुमति दी गई है. एक्सपर्ट्स का भी मानना है कि कोरोना से जंग के लिए यह फैसला उचित है. भारत में अब तक एक करोड़ से अधिक टेस्ट हो चुके हैं, लेकिन 15 अगस्त तक 5 करोड़ लोगों की जांच करनी होगी, जिससे वायरस के बारे में अधिक जानकारी मिल सके और 1.3 अरब से अधिक लोगों की आबादी में संक्रमित ट्रेस कर आइसोलेट किये जा सकें.

    विशेषज्ञों के अनुसार देश में एक दिन में एक लाख परीक्षण करने की क्षमता है, लेकिन राज्यों में प्रशासनिक इच्छाशक्ति की जरूरत है. पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ और मालिक अदर पूनावाला ने कहा कि, 'हम पर्याप्त टेस्टिंग नहीं कर रहे हैं. भारत के पास पर्याप्त टेस्ट किट्स हैं. हम MyLabs  में हर सप्ताह बीस लाख टेस्ट कर सकते हैं और अब भारत में टेस्टिंग किट बनाने वाली कई अन्य कंपनियां हैं, लेकिन हम अभी और टेस्टिंग नहीं कर रहे हैं.'

    MyLabs आरटी-पीसीआर टेस्टिंग के लिए भारत का पहला स्थानीय निर्माता है और सीरम संस्थान ने इसकी क्षमता बढ़ाने में मदद की है. अमेरिका और ब्राजील के बाद दुनिया में कोविड -19 मामलों की तीसरी सबसे बड़ी संख्या के साथ भारत ने प्रति मिलियन लोगों पर 7,661 परीक्षण किए हैं, जो इसकी आबादी का 0.8% से भी कम है. वैश्विक तुलना की बात करें तो अमेरिका ने अपनी जनसंख्या का 11%, रूस 16% और यूके ने 15% का परीक्षण किया है.

     जांच की क्षमता को बढ़ाने के लिए एक मशीन लॉन्च
    MyLabs ने जांच की क्षमता को बढ़ाने के लिए मंगलवार को एक मशीन लॉन्च की. इस मशीन से 1 दिन में 400 लोगों की जांच की जा सकती है. इस बाबत पूनावाला ने कहा- 'यह मशीन हर दिन 400 टेस्टिंग कर सकती है और इसके लिए सिर्फ 1 विशेषज्ञ की जरूरत होगी. इससे हमारी श्रमशक्ति भी बचेगी और देश में टेस्टिंग को गति मिलेगी.'

    विशेषज्ञों का कहना है कि टेस्टिंग के लिए टूल्स और रिसोर्रसेज के साथ ही भारत में वॉक-इन टेस्टिंग्स की अनुमति दिये जाने की जरूरत है. पूर्व स्वास्थ्य सचिव और एचआईवी / एड्स के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत जेवीआर प्रसाद राव ने कहा 'किए जा रहे परीक्षणों की संख्या पर्याप्त नहीं है. भारत की आबादी को देखते हुए, हमें संक्रमित की पहचान करने और आइसोलेट करने के लिए एक दिन में एक लाख परीक्षण करना चाहिए और यह केवल मांग पर उपलब्ध कराया जा सकता है. आरटी-पीसीआर टेस्टिंग का इस्तेमाल कर के तेजी नहीं लायी जा सकती है इसलिए कम से कम 2-3% सकारात्मकता दर कम होने तक सामुदायिक परीक्षण को बढ़ाने के लिए एंटीजन परीक्षण को बड़े पैमाने पर किया जाना चाहिए.'

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