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पांच मस्जिदों में विराजे गणपति, हिंदू-मुसलमान दोनों कर रहे पूजा

पांच मस्जिदों में गणेश प्रतिमा विराजित की गई हैं. यहां हिंदू और मुस्लिम मिलकर राज्य के सबसे बड़ा धार्मिक उत्सव मना रहे हैं. कोल्हापुर जिले का कुरुंद कस्बा सर्वधर्म सद्भाव का नई इबारत लिख रहा है.
पांच मस्जिदों में गणेश प्रतिमा विराजित की गई हैं. यहां हिंदू और मुस्लिम मिलकर राज्य के सबसे बड़ा धार्मिक उत्सव मना रहे हैं. कोल्हापुर जिले का कुरुंद कस्बा सर्वधर्म सद्भाव का नई इबारत लिख रहा है.

पांच मस्जिदों में गणेश प्रतिमा विराजित की गई हैं. यहां हिंदू और मुस्लिम मिलकर राज्य के सबसे बड़ा धार्मिक उत्सव मना रहे हैं. कोल्हापुर जिले का कुरुंद कस्बा सर्वधर्म सद्भाव का नई इबारत लिख रहा है.

  • Last Updated: September 17, 2018, 5:39 PM IST
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संदीप राजगोलकर

महाराष्ट्र की छवि राजनीतिक और सामाजिक रूप से एक प्रगतिशील राज्य की रही है. अब इस परंपरा में एक और नया अध्याय जुड़ गया है. राज्य के कोल्हापुर जिले में पांच मस्जिदों में गणेश प्रतिमाएं विराजित की गई हैं. राज्य के सबसे बड़े धार्मिक उत्सव को यहां हिंदू और मुसलमान मिलकर पूरे उत्साह से मना रहे हैं. दोनों समुदायों के लोग यहां पर गणपति की पूजा कर रहे हैं और गणेशोत्‍वसव मना रहे हैं.

कोल्हापुर जिले के कुरुंद कस्बे में सर्वधर्म सद्भाव की नई इबारत लिखी जा रही है. कोल्हापुर और सांगली जिले की सीमा पर बसे इस ब्रिटिशकालीन शहर के पांच मस्जिदों में इस बार गणेश उत्सव मनाया जा रहा है.



सामाजिक समरसता का संदेश देने वाले कुरुंद में पिछले कई सालों में ऐसा हुआ है जब मस्जिद में गणेश उत्सव का उत्साह देखा गया. लेकिन इस बार 36 साल बाद ऐसा हुआ जब मुहर्रम और गणेश उत्सव एक साथ आए हैं, इस वजह से शहर में धार्मिक सद्भाव का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है. इस वजह से मस्जिदों में मुहर्रम के पंजे के साथ गणपति प्रतिमाएं भी विराजित की गई हैं.
शहर की बैरागदार, कारखाना परी, शेलके, ढेपनपुर और कुडेखान पीर मस्जिद में एक ही वक्त गणपति और मुहर्रम के पंजे की आराधना होती है. पूरे मनोभाव के साथ दोनों परंपराओं का निर्वाह किया जाता है.

देश के कई शहरों में गणेश उत्सव और मुहर्रम एक साथ होने की वजह से पुलिस के लिए कानून व्यवस्था बनाए रखना बड़ी चुनौती बना हुआ है. वही, कुरुंद कस्बे में पुलिस के लिए इस तरह का कोई तनाव नहीं है. पुलिस बगैर किसी तनाव के सारे जरूरी  इंतजाम में जुटी हुई है. उम्मीद की जा रही है कि शहर में साल दर साल इसी परंपरा को सहेजा जाएगा और इस मिसाल को दूसरे शहर भी अपनाएंगे.
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