राज्यपाल ने अर्णब की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर की गृहमंत्री देशमुख से बातचीत

कोश्यारी ने गृहमंत्री से गोस्वामी के परिवार को उनसे मिलने एवं बातें करने की अनुमति देने को भी कहा है. (फाइल फोटो)
कोश्यारी ने गृहमंत्री से गोस्वामी के परिवार को उनसे मिलने एवं बातें करने की अनुमति देने को भी कहा है. (फाइल फोटो)

गोस्वामी और दो अन्य --फिरोज शेख और नीतीश सारदा को आर्किटेक्ट अन्वय नाईक एवं उनकी मां को कथित रूप से आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले के संबंध में चार नवंबर को रायगढ़ जिले की अलीबाग पुलिस ने गिरफ्तार किया था

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  • Last Updated: November 11, 2020, 8:11 PM IST
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मुंबई. महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी (Maharashtra's Governor Bhagat Singh Koshiyari) ने आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में पिछले सप्ताह गिरफ्तार किये गये रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्णब गोस्वामी (Arnab Goswami) की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य को लेकर अपनी चिंता प्रकट करने के लिए राज्य के गृहमंत्री अनिल देशमुख (Maharashtra's HM Anil Deshmukh) से फोन पर बात की. राज्यपाल कार्यालय की ओर से सोमवार को जारी बयान के अनुसार कोश्यारी ने गृहमंत्री से गोस्वामी के परिवार को उनसे मिलने एवं बातें करने की अनुमति देने को भी कहा है. बयान के मुताबिक जिस तरीके से गोस्वामी को गिरफ्तार किया गया, उसे लेकर राज्यपाल ने देशमुख के सामने पहले भी अपनी चिंता रखी थी.

गोस्वामी और दो अन्य --फिरोज शेख और नीतीश सारदा को आर्किटेक्ट अन्वय नाईक एवं उनकी मां को कथित रूप से आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले के संबंध में चार नवंबर को रायगढ़ जिले की अलीबाग पुलिस ने गिरफ्तार किया था. इन दोनों मां-बेटे ने आरोपियों की कंपनियों द्वार कथित रूप से भुगतान नहीं किये जाने को लेकर 2018 में आत्महत्या कर ली थी. यहां गोस्वामी को उनके आवास से गिरफ्तार करने के बाद अलीबाग ले जाया गया था जहां मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने उन्हें एवं दो अन्य को 18 नवंबर तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया था.

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उन्हें न्यायिक हिरासत में कथित रूप से मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए पाये जाने पर रविवार को रायगढ़ की तलोजा जेल ले जाया गया था.
सुप्रीम कोर्ट ने विधानसभा के सहायक सचिव को भेजा था कारण बताओ नोटिस
इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को महाराष्ट्र विधानसभा (Maharashtra Assembly) के सहायक सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर पूछा था कि पत्रकार अर्णब गोस्वामी को वह पत्र लिखने के कारण क्यों नहीं उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाये जिससे लगता है कि उन्हें कथित विशेषाधिकार हनन के प्रस्ताव के मामले में शीर्ष अदालत जाने की वजह से ‘धमकाया’ गया है.

इस बीच, शीर्ष अदालत ने महाराष्ट्र विधानसभा में लंबित कथित विशेषाधिकार हनन की कार्यवाही के मामले में अर्णब गोस्वामी को गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान कर दिया.

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न्यायालय ने विधान सभा के अधिकारी द्वारा 13 अक्टूबर को अर्णब गोस्वामी को भेजे पत्र के बयानों को ‘अभूतपूर्व’ बताया और कहा कि यह न्याय के प्रशासन में हस्तक्षेप करने वाला है और निश्चित ही यह ‘बहुत गंभीर’ तथा न्यायालय की अवमानना करना है.

न्यायालय ने कहा कि लगता है कि यह पत्र रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक को कानूनी राहत के लिये संविधान के अनुच्छेद 32 में प्रदत्त मौलिक अधिकार का इस्तेमाल करने के कारण सजा के लिये धमकी देने वाला है.
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