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बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा- सिर्फ जबरदस्ती छूना यौन हमला नहीं, स्किन टू स्किन कॉन्टैक्ट जरूरी

बॉम्बे हाईकोर्ट
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बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay Highcourt) की नागपुर बेंच की जस्टिस पुष्पा गनेडीवाला ने 19 जनवरी को पारित एक आदेश में कहा कि यौन हमले का कृत्य माने जाने के लिए यौन मंशा (Sexual Offences) से स्किन से स्किन का संपर्क होना जरूरी है. उन्होंने अपने फैसले में कहा कि महज छूना भर यौन हमले की परिभाषा में नहीं आता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 25, 2021, 6:42 PM IST
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मुंबई. बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay Highcourt) ने नाबालिग से यौन उत्पीड़न को लेकर एक बड़ा फैसला दिया है. एक मामले में कोर्ट ने कहा कि किसी नाबालिग को निर्वस्त्र किए बिना उसके शरीर के अंगों को छूना यौन उत्पीड़न नहीं कहा जा सकता. अपने फैसले में हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह का कृत्य पॉक्सो अधिनियम (Protection of Children from Sexual Offences Act–POCSO) के तहत यौन हमले के रूप में परिभाषित नहीं किया जा सकता.

बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच की जस्टिस पुष्पा गनेडीवाला ने 19 जनवरी को पारित एक आदेश में कहा कि यौन हमले का कृत्य माने जाने के लिए यौन मंशा से स्किन से स्किन का संपर्क होना जरूरी है. उन्होंने अपने फैसले में कहा कि महज छूना भर यौन हमले की परिभाषा में नहीं आता है.





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जस्टिस गनेडीवाला ने एक सत्र अदालत के फैसले में संशोधन किया, जिसने 12 वर्षीय लड़की का यौन उत्पीड़न करने के लिए 39 वर्षीय व्यक्ति को तीन वर्ष कारावास की सजा सुनाई थी.

अभियोजन पक्ष और नाबालिग पीड़िता की अदालत में गवाही के मुताबिक, दिसंबर 2016 में आरोपी सतीश नागपुर में लड़की को खाने का कोई सामान देने के बहाने अपने घर ले गया.

हाईकोर्ट ने कहा, 'चूंकि आरोपी ने लड़की को निर्वस्त्र किए बिना उसके अंगों को छूने की कोशिश की, इसलिए इस अपराध को यौन हमला नहीं कहा जा सकता है. भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत महिला के सम्मान को भंग करने का अपराध है. धारा 354 के तहत जहां न्यूनतम सजा एक वर्ष की कैद है, वहीं पॉक्सो कानून के तहत यौन हमले की न्यूनतम सजा तीन वर्ष कारावास है.

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सत्र अदालत ने पॉक्सो कानून और भादंसं की धारा 354 के तहत उसे तीन वर्ष कैद की सजा सुनाई थी. दोनों सजाएं साथ-साथ चलनी थीं. बहरहाल, हाईकोर्ट ने उसे पॉक्सो कानून के तहत अपराध से बरी कर दिया और आईपीसी की धारा 354 के तहत उसकी सजा बरकरार रखी. अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यौन हमले की परिभाषा में शारीरिक संपर्क प्रत्यक्ष होना चाहिए या सीधा शारीरिक संपर्क होना चाहिए. (PTI इनपुट के साथ)
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