ग्राउंड रिपोर्ट: धारावी को कोरोना वायरस से क्यों लगता है डर

धारावी की गलियां में ड्रोन नजर रखी जा रही है

धारावी की गलियां में ड्रोन नजर रखी जा रही है

Coronavirus in Mumbai: मायानगरी की दो अहम लोकेशन बांद्रा और माहिम के बीच बसी है एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी धारावी, जहां हर दिन खतरे की घंटी बढ़ती जा रही है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 12, 2020, 11:54 AM IST
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मुंबई. धारावी की पृष्ठभूमि पर बनी मूवी गली बॉय ने पिछले साल बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त धूम मचाई थी. जोया अख्तर की इस फिल्म की खासियत यह थी कि वह अधिकांश समय धारावी की गलियों में ही केंद्रित रही थी. मुंबई की सुपरिचित लोकेशन की मोह में नहीं पड़ते हुए डायरेक्टर ने धारावी की गलियों को ही फोकस रखा था. करीब सालभर बाद वही धारावी एक बार फिर फोकस में है, कोरोना के खिलाफ जंग में यह सेंटर पॉइंट बना हुआ है.

मायानगरी की दो अहम लोकेशन बांद्रा और माहिम के बीच बसी है एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी धारावी, जहां हर दिन खतरे की घंटी बढ़ती जा रही है. दुनियाभर में कहर बरपा रहे कोरोना वायरस ने इस बस्ती को टाइम बम बना दिया है. मार्च का महीना जिस डर के साये में गुजर गया, उसी डर ने अप्रैल महीने की पहली तारीख को इंसानों की इस बस्ती में अपनी दस्तक दे दी. 56 साल का एक शख्स सबसे पहले कोरोना पॉजिटिव निकला था. इसके बाद तो दिन ब दिन इस महामारी ने धारावी में अपने पैर पसारना शुरू कर दिए है. यहां अब तक 28 लोगों को कोरोना अपनी गिरफ्त में ले चुका है. शनिवार को 80 वर्षीय बुजुर्ग की मौत के साथ ही धारावी में इस जानलेवा वायरस से मरने वालों की संख्या 4 हो गई है.

धारावी में डर क्यों लगता है..?

स्पेन, इटली और दुनिया की महाशक्ति अमेरिका भी कोरोना के सामने बेबस नजर आ रहा है. आबादी के सघन घनत्व ने यहां हजारों लोगों को कोरोना का शिकार बना दिया. अब वैसा ही खतरा धारावी पर भी मंडरा रहा है. यहां कोविड 19 के कम्यूनिटी ट्रांसफर का खतरा बढ़ता दिखाई दे रहा है. लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग ही इससे निपटने के लिए सबसे कारगर उपाय हैं. भारत में 24 मार्च को लॉकडाउन शुरू हुआ था, लेकिन धारावी में लॉकडाउन तो छोड़िए सोशल डिस्टेसिंग भी असंभव है.


अंग्रेजों के दौर में 1884 में बसाई गई धारावी में लाखों की संख्या में दिहाड़ी मजदूर और छोटे कारोबारी रहते हैं. इकॉनामिक फोरम की एक रिपोर्ट के मुताबिक धारावी में जनसंख्या का घनत्व 270,000 प्रति स्क्वेयर किलोमीटर है. यहां की आबादी को लेकर अलग-अलग आंकडे सामने आते रहे है, लेकिन एक अनुमान के तहत यहां करीब दो किलोमीटर का दायरा 10 लाख लोगों के लिए आशियाना है. ऐसे में छह फीट के सोशल डिस्टेसिंग के नियम का पालन करने के लिए मौजूदा धारावी के क्षेत्रफल से तीन गुना ज्यादा जगह की जरूरत होगी. इसी आबादी ने धारावी को टाइम बम बना दिया है. तमाम कोशिशों के बावजूद यहां कम्यूनिटी स्प्रेडिंग का डर बढ़ता ही जा रहा है.

आबादी कोरोना से लड़ाई में सबसे बड़ी समस्या



धारावी में कोरोना के खिलाफ जंग में जो समस्या सबसे बड़ी है, वो है यहां की सघन आबादी और बुनियादी सुविधाओं का अभाव. विशेषज्ञों का मानना है कि आबादी वाले इलाकों में लोग एक-दूसरे से आसानी से मेल-जोल करते है, वहां कोरोना जैसी बीमारी को महामारी का रूप लेने में वक्त नहीं लगता है. ऐसी जगहों पर कोई भी वायरस तेजी से फैलता है.

एक नजर धारावी झुग्गी पर


समाजसेवी अनिल शिवराम कासारे ने एक मीडिया इंटरव्यू में कहा कि धारावी की हालात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहां 1500 लोगों पर एक टॉयलेट उपलब्ध है. टॉयलेटों की कमी अब मुसीबत के दौर में खतरे का सबसे बड़ा सबब बन गई है. तमाम कोशिशों के बावजूद लोग यहां एक-दूसरे के संपर्क में आने से बच नहीं सकते है. इस वजह से इस बस्ती में हर कदम पर कोरोना वायरस फैलने का खतरा मंडरा रहा है. अब इन टॉयलेट्स की हर घंटे फायर ब्रिगेड के स्पीडजेट पम्प्स से सेनिटाइजेशन किया जाएगा.

ऐसा नहीं है कि केवल टॉयलेट ही धारावी में कोरोना वायरस को खुला निमंत्रण दे रही है. यहां सफाई तो दूर बुनियादी सुविधाओं तक की कमी है. आबादी का एक बड़ा तबका तंग गलियों में खुली गटर के पास रहता है. एक अनुमान के तहत धारावी में करीब एक लाख घर है. इनमें से अधिकांश घर दो मंजिला है. करीब 100 स्क्वेयर फीट की जगह में 6 से 8 लोगों का परिवार रहता है. अधिकांश लोग काम की वजह से दिन के ज्यादातर घंटे घर से बाहर ही रहते है. अब लॉकडाउन की वजह से पूरा परिवार इकठ्ठा है तो कई लोग बाहर गलियों में रहने को मजबूर है. ऐसे में धारावी को सोशल डिस्टेंसिंग के लिहाज से सील करना लगभग असंभव है.

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चुनौती बड़ी है!

महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने भी स्वीकार किया कि धारावी की जनसंख्या के घनत्व और वहां के रहने वाले लोगों की तंगहाली को देखते हुए सरकार की चिंता बढ़ गई है. उन्होंने बताया, 'हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि धारावी में लॉकडाउन के नियमों का सख्ती से पालन हो. हम भीड़ को इकठ्ठा होने की इजाजत नहीं देते हैं लेकिन यह आसान नहीं है. वहां जगह की कमी है, लोग गरीब हैं और उनके पास कोई काम नहीं है. निश्चित रूप से चुनौतियां बड़ी हैं.' सरकार ने इस चुनौती से निपटने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास शुरू कर दिए है. सरकार ने जो प्लान बनाया है, उसके मुताबिक

-धारावी में घर घर जाकर स्क्रीनिंग शुरू की गई.

-प्रायव्हेट डॉक्टर्स और मुंबई मनपा के वैद्यकीय कर्मचारियों की टीम की टीम धारावी के हर एक घर में पहुंचकर लोगों से टेम्परेचर और ट्रैवल हिस्ट्री की जानकारी ले रहे हैं.

-इस स्क्रीनिंग में संदिग्ध (कोरोना या उससे संबंधित लक्षण दिखाई दे रहे है) निकले लोगों की तुरंत जांच की जाएगी और इसकी रिपोर्ट मनपा को सौपी जाएगी. उनकी कोरोना टेस्ट की जाएगी.

दुनिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती धारावी


150 डॉक्टरों ने शुरू किया मिशन 'धारावी'

स्थानीय सांसद राहुल शेवाले के आह्वान के बाद इंडियन मेडिकल कौंसिल और महाराष्ट्र मेडिकल कौंसिल भी मदद के लिए आगे आया है. दोनों ने मिलकर 150 डॉक्टरों की टीम बनाई है. अब दो निजी डॉक्टर, मनपा के दो हेल्थ ऑफिसर और एक सहायक ऐसे पांच लोगों की टीम बनाई गई है. यह टीम धारावी की तंग गलियों में एक-एक व्यक्ति की जांच कर रही है.

सील किए गए जोन में ड्रोन से मॉनिटरिंग

धारावी की गलियां ऐसी है कि यहां पुलिस चाहकर भी हर जगह पर नजर नहीं रख सकती है. ऐसे में अब भीड़ जमा होने से रोकने के लिए पुलिस ड्रोन की मदद ले रही है. पुलिस को जहां भी लोगों के इकठ्ठा होने की खबरें मिलती है, तुरंत ड्रोन से तस्वीरें लेकर पुलिस कार्रवाई कर रही है.

गली बॉय का एक फेमस संवाद है, जिसमें एमसी शेर कहता है कि तेरे अंदर का लावा फटके बाहर आने दे. धारावी के अंदर भी एक लावा दहक रहा है. उम्मीद की जाना चाहिए कि ये लावा फटे नहीं और अंदर ही शांत हो जाए और धारावी के लोग अपने 'बहुत ही हार्ड' स्टाइल में कोरोना का मात देकर फिर से कहेंगे 'अपना टाइम आएगा.'

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