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हेमंत नगराले: महाराष्ट्र के नए डीजीपी, 2 दिन में सुलझाया था मामला; नक्सलियों के बीच की थी शुरुआत

हेमंत नगराले (फोटो: Facebook)
हेमंत नगराले (फोटो: Facebook)

हेमंत नगराले (Hemant Nagrale) फिलहाल महाराष्ट्र पुलिस में डीजीपी लीगल और टेक्निकल हैं. इससे पहले वो साल 2016 में नवी मुंबई में पुलिस कमिश्नर की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 8, 2021, 11:45 AM IST
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मुंबई. महाराष्ट्र में 1987 बैच के आईपीएस अफसर हेमंत नगराले को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के तौर पर राज्य का अतिरिक्त प्रभार दिया है. वहीं, महा विकास अघाड़ी सरकार (Maha Vikas Aghadi Government) ने सुबोध जायसवाल (Subodh Jaiswal) को सेवा मुक्त कर दिया है. जयसवाल 1985 बैच के अधिकारी हैं. वो साल 2019 से राज्य की पुलिस का नेतृत्व कर रहे थे. गौरतलब है कि जायसवाल को केंद्र ने बीती 30 दिसंबर को सीआईएसएफ का मुखिया बनाया है.

58 वर्षीय नगराले को डीजीपी का प्रभार दे दिया गया है. अब यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन का पैनल जैसे ही उनकी नियुक्ति को अप्रूव करता है, वो औपचारिक तौर पर राज्य के डीजीपी बन जाएंगे. हालांकि, इस रेस में नगराले से आगे उनके सीनियर संजय पांडे चल रहे थे, लेकिन नगराले का नाम तय किया गया. जायसवाल गुरुवार को नगराले को डीजीपी का चार्ज सौंपेंगे.

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कौन हैं हेमंत नगराले 
हेमंत नगराले फिलहाल महाराष्ट्र पुलिस में डीजीपी लीगल और टेक्निकल हैं. इससे पहले वो साल 2016 में नवी मुंबई में पुलिस कमिश्नर की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं. इसके अलावा उन्होंने इंटरनेशनल स्टार जस्टिन बीवर के कार्यक्रम के दौरान पुलिस व्यवस्था संभाली थी, जिसे लेकर उनकी काफी तारीफ हुई थी. नगराले को अंडर-17 वर्ल्डकप के दौरान व्यवस्थाओं के लिए भी जाना जाता है. इसके अलावा उन्होंने 26/11 के हमलों के दौरान भी बड़ी भूमिका निभाई थी. उन्होंने घायलों को अस्पताल पहुंचाया था.

नगराले के करियर की शुरुआत नक्सल प्रभावित इलाकों से हुई थी. वो 1989-92 तक चंद्रपुर जिले के राजुरा में रहे. यहां उन्होंने एएसपी के तौर पर काम किया था. वहीं, 1998-02 तक उन्होंने सीबीआई के साथ काम किया. खास बात है कि वाशी स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा में हुई चोरी की घटना को भी तेजी से सुलझाया था. उन्होंने महज 2 दिनों के भीतर मामले का पर्दाफाश कर दिया था.

सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के अनुसार, डीजीपी की पोस्ट के लिए राज्य सरकार को डीजी रैंक के अधिकारियों की एक सूची यूपीएससी को भेजनी होती है. इसके बाद तीन सदस्यीय यूपीएससी समिति वरिष्ठता और योग्यता के आधार पर तीन नामों को तय करती है. इसके बाद इन नामों को राज्य सरकार के पास भेजा जाता है. आखिर में राज्य सरकार नाम पर मुहर लगाती है.
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