हाईकोर्ट ने नागपुर विश्वविद्यालय से शोमा सेन को 5 लाख रुपये देने को कहा
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हाईकोर्ट ने नागपुर विश्वविद्यालय से शोमा सेन को 5 लाख रुपये देने को कहा
प्रोफेसर शोमा सेन की फाइल फोटो

सेन 2018 में गिरफ्तारी (arrest) के बाद से ही जेल में हैं. उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा उनकी ग्रेच्युटी और भविष्य निधि (Gratuity and provident fund) रोके जाने के फैसले को उच्च न्यायालय (High court) की नागपुर पीठ के समक्ष चुनौती दी थी.

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नागपुर. बंबई उच्च न्यायालय (Bombay High Court) ने राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय (Rashtrasant Tukadoji Maharaj Nagpur University) को पूर्व प्रोफेसर शोमा सेन को पांच लाख रुपये देने का निर्देश दिया है. यह रकम उनके सेवानिवृत्ति लाभ (retirement benefits) के मद्देनजर दी जानी है. पूर्व प्रोफेसर सेन को एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले (Elgar Council-Maoist Relations Matters) में गिरफ्तार किया गया है. न्यायमूर्ति आरके देशपांडे और न्यायमूर्ति एनबी सूर्यवंशी की खंडपीठ ने गुरुवार को सेन की याचिका पर एक अंतरिम आदेश (interim order) में विश्वविद्यालय (university) को एक सप्ताह के भीतर धनराशि जारी करने का आदेश दिया.

सेन 2018 में गिरफ्तारी (arrest) के बाद से ही जेल में हैं. उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा उनकी ग्रेच्युटी और भविष्य निधि (Gratuity and provident fund) रोके जाने के फैसले को उच्च न्यायालय (High court) की नागपुर पीठ के समक्ष चुनौती दी थी. सेन विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के परास्नातक विभाग (post graduate section) की प्रमुख थीं और जुलाई 2018 में सेवानिवृत्त हुई थीं.

2018 में विश्वविद्यालय ने निलंबित कर सेवानिवृत्ति के लाभ पर लगा दी थी रोग
सेन की गिरफ्तारी के बाद जून 2018 में विश्वविद्यालय ने उन्हें निलंबित कर दिया था और उनके सेवानिवृत्ति लाभ पर रोक लगा दी थी.
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उच्च न्यायालय ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि विश्वविद्यालय इस बात का संतोषजनक विवरण देने में नाकाम रहा कि क्यों लाभ रोक दिया गया? मामले में अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद के लिए तय की गई.
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