हिंदू और मुस्लिम महिलाओं ने एक-दूसरे के पतियों को डोनेट की किडनी

प्रतीकात्मक तस्वीर

दोनों ही परिवारों को किडनी की जरूरत थी पर रिश्तेदारों से किसी तरह की मदद नहीं मिल पा रही थी.

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    मामला ठाणे और बिहार के दो परिवारों का है, जो 6 महीने पहले तक एक-दूसरे से बिल्कुल नहीं जानते थे. दोनों का इलाज कर रहे नेफ्रॉलजिस्ट दोनों परिवारों को करीब लेकर आए और एक टीम के तौर पर मिलकर काम किया, जिसका नतीजा पिछले सप्ताह सफल ट्रांसप्लांटेशन के तौर पर मिला.

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    वर्ल्ड किडनी डे के मौके पर 14 मार्च को सैफी हॉस्पिटल में हुई सर्जरी के बाद ठाणे निवासी नदीम (51) और नजरीन (45) की बिहार निवासी रामस्वार्थ यादव (53) और उनकी पत्नी सत्यादेवी (45) के साथ जान पहचान हुई थी. एक तरफ जहां 3 बच्चों के पिता नदीम पिछले 4 सालों से डायलिसिस पर चल रहे हैं, वहीं किडनी की बीमारी से ग्रस्त रामस्वार्थ को इलाज की वजह से नालासोपारा को ही दूसरा घर बनाना पड़ा था.

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    दोनों ही परिवारों को किडनी की जरूरत थी पर रिश्तेदारों से किसी तरह की मदद नहीं मिल पा रही थी. जब उसी अस्पताल में नेफ्रॉलजिस्ट के तौर पर काम कर रहे हेमल शाह को इस बात का पता चला तो उन्होंने किडनी स्वैप की योजना बनाई. इसके बाद रामस्वार्थ का ब्लड ग्रुप (A) नाजरीन के साथ मैच कर गया, जबकि नदीम का ब्लड ग्रुप (B) सत्यादेवी के साथ मैच कर गया. एक महीने तक सोच-विचार के बाद दोनों ही परिवार स्वैप ट्रांसप्लांटेशन के लिए राजी हो गए. अभी दोनों का स्वास्थ्य ठीक बताया जा रहा है.
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