मुझे लगा पूरा धारावी खत्म हो जाएगा- भारत की सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती की कोरोना पर विजय की कहानी
Mumbai News in Hindi

मुझे लगा पूरा धारावी खत्म हो जाएगा- भारत की सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती की कोरोना पर विजय की कहानी
धारावी ने पाया कोरोना पर काबू.

अप्रैल में जब धारावी (Dharavi) में कोरोना वायरस (Covid 19) का पहला मामला आया था तो कई लोगों को ऐसा डर था कि धारावी में यह बीमारी बड़े स्‍तर पर फैलेगी और घनी आबादी वाला यह क्षेत्र कई लोगों की कब्रगाह बन जाएगा.

  • Share this:
नई दिल्‍ली. देश में कोरोना वायरस (Coronavirus) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. मुंबई (Mumbai) में भी हालात चिंताजनक है. मुंबई में ही स्थित है देश की सबसे बड़ी झुग्‍गी बस्‍ती धारावी (Dharavi). अप्रैल में जब इस बस्‍ती में कोरोना वायरस (Covid 19) का पहला मामला आया था तो कई लोगों को ऐसा डर था कि धारावी में यह बीमारी बड़े स्‍तर पर फैलेगी और माना जा रहा था कि यह घनी आबादी वाला क्षेत्र कई लोगों की कब्रगाह बन जाएगा.

लेकिन 3 महीने बाद अब हालात अलग हैं. धारावी ने अब लोगों के सामने बड़ा उदाहरण पेश किया है कि आखिर कैसे संक्रमण को रोका जा सकता है. शहर की अफसर किरण दिघावकर के अनुसार धारावी में आक्रामक रणनीति अपनाई गई और इस बात पर ध्‍यान दिया गया कि वायरस से कैसे आगे निकलना है, न कि आपदा का इंतजार किया गया.

धारावी में करीब 10 लाख ऐसे लोग रहते हैं जो, फैक्‍टरी में काम करके या मुंबई के संपन्‍न लोगों के यहां खाना बनाने का काम करते हैं. धारावी में एक ही कमरे में करीब 12 लोग तक रहते हैं. एक ही सार्वजनिक शौचालय का इस्‍तेमाल सैकड़ों लोग करते हैं. ऐसे में अधिकारियों को यह पता था कि यहां मानक मापदंडों का उपयोग नहीं हो सकता.



दिघावर ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि धारावी में सोशल डिस्‍टेंसिंग कभी मुमकिन नहीं थी, होम आइसोलेशन भी यहां संभव नहीं था. कॉन्‍टेक्‍ट ट्रेसिंग भी यहां बड़ी समस्‍या थी क्‍योंकि यहां बड़ी संख्‍या में लोग एक ही टॉयलेट इस्‍तेमाल करते हैं.



मुंबई में उमस भरी गर्मी के कारण स्‍वास्‍थ्‍य कर्मियों को धारावी की गलियों में पीपीई सूट के अंदर घुटन होती थी. ऐसे में घर-घर जाकर स्‍क्रीनिंग करने के विकल्‍प को छोड़ दिया गया. लेकिन, संक्रमण तेजी से बढ़ रहा था और कोविड 19 के लक्षणों की पहचान के लिए सिर्फ 50,000 लोगों की जांच की गई थी. अधिकारियों को जल्‍द कुछ करने की जरूरत महसूस हो रही थी. इसके बाद उन्‍होंने 'मिशन धारावी' शुरू किया.

हर दिन स्‍लम के अलग-अलग हिस्‍सों में फीवर कैंप लगाए गए. ऐसा इसलिए किया गया ताकि इसमें वहां के निवासियों के अंदर मौजूद कोविड 19 के लक्षणों की पहचान हो सके. वहां के स्‍कूल, वेडिंग हॉल और स्‍पोर्ट कॉप्‍लेक्‍स को क्‍वारंटाइन सेंटर के रूप में बदले गए. वहां लोगों को खाना, दवाएं और लॉफ्टर योग दिया जा रहा था.

अफसरों की ओर से कोरोना वायरस के हॉटस्‍पॉट इलाकों में बेहद सख्‍ती बरती गई. इनमें 1,25,000 लोग रहते थे. उन पर ड्रोन से निगरानी की गई. अगर वे आवाजाही करते थे तो पुलिस को सूचना दी जाती थी. बड़ी संख्‍या में वॉलंटियर को तैनात किया गया. लोग भूखे ना रहें, इसके लिए उन्‍हें राशन दिया गया.

निर्माण कार्य करने वाले वर्कर ने धारावी के अंदर ही एक पार्क में 200 बेड का फील्‍ड अस्‍पताल जल्‍दी से तैयार किया था. कई बॉलीवुड स्‍टार और बिजनेसमैन ने इसके लिए चंदा दिया था. इससे मेडिकल उपकरण खरीदे गए. जून तक धारावी की करीब आधी आबादी को कोविड 19 के लक्षण के लिए जांचा गया. वहीं 12000 लोगों की कोरोना जांच की गई. धारावी में कुल 82 लोगों की मौत हुई. जबकि पूरे मुंबई में 4500 से अधिक लोगों ने जान गंवाई.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading