महाराष्ट्र में नहीं मिले राज्यपाल कोश्यारी तो उन्हें नागपुर में घेरने पहुंचे कांग्रेसी नेता
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महाराष्ट्र में नहीं मिले राज्यपाल कोश्यारी तो उन्हें नागपुर में घेरने पहुंचे कांग्रेसी नेता
देशभर के राजभवन का घेराव करने पहुंचे कांग्रेसी नेता.

राजस्थान (Rajasthan) में मचे सियासी घमासान के बाद अब महाराष्ट्र (Maharashtra) में भी सबकुछ ठीक चलता नहीं दिख रहा है. उद्धव ठाकरे के बयान पर अब कांग्रेस ने आपत्ति दर्ज कराई है.

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  • Last Updated: July 27, 2020, 12:53 PM IST
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मुंबई. राजस्थान (Rajasthan) में सियासी घमासान तेज होता जा रहा है. सचिन पायलट (Sachin Pilot) के खेमे को हाईकोर्ट (High Court) से राहत मिलने के बाद अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) खेमे की बेचैनी बढ़ गई है. राजस्थान में मचे सियासी उठापटक के बीच आज कांग्रेस सभी राज्यों के राजभवनों का घेराव कर रही है. इसी कड़ी में महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता राजभवन का घेराव करने और राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी (Bhagat Singh Kosari) को ज्ञापन सौपने के लिए राजभवन पहुंचे. हालां​कि राज्यपाल के राजभवन में नहीं होने के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा.

बता दें कि देश में कांग्रेस की ओर से देशभर में राजभवन के घेराव के तहत महाराष्ट्र के राजभवन का घेराव करने और राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को ज्ञापन सौंपने के लिए महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बालासाहेब थोरात और अशोक चौहान सहित दूसरे कांग्रेस के नेता पहुंचे. हालांकि राजभवन में राज्यपाल कोश्यारी नहीं मिले. राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी 2 दिन पहले ही मुंबई से नागपुर चले गए हैं और अगले एक-दो दिन नागपुर में ही रहेंगे हालांकी राज्यपाल के नागपुर में होने की सूचना के बाद महाराष्ट्र कांग्रेस की नागपुर पदाधिकारियों ने नागपुर राजभवन को घेरने और राजभवन के बाहर प्रदर्शन करने के साथ राज्यपाल को ज्ञापन देने का फैसला किया.

उधर राजस्थान में मचे सियासी घमासान के बीच बागी विधायकों के मामले में विधानसभा स्पीकर सीपी जोशी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी थी, लेकिन इससे पहले ही स्पीकर ने याचिका वापस ले ली है. स्पीकर की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने कोर्ट में ये जानकारी दी. अब कांग्रेस राजस्थान में सियासत की लड़ाई अदालत में नहीं लड़ेगी, बल्कि अब राजनीतिक लड़ाई लड़ी जाएगी.



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सूत्रों का कहना है कि स्पीकर की सुप्रीम कोर्ट में जल्दबाजी में दाखिल की गई याचिका के कारण राजस्थान हाईकोर्ट को 1992 के खीटो होलहान जजमेंट का सहारा लेना पड़ा. होलहान जजमेंट एक नजीर बन गई है और हाईकोर्ट ने इसी को ध्यान में रखते हुए स्पीकर को 19 बागी विधायकों के खिलाफ कार्रवाई करने से रोक दिया. इसलिए अब स्पीकर ने याचिका वापस ली है.
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