शरद पवार और उद्धव ठाकरे को आयकर विभाग का नोटिस, बोले- कुछ लोगों को हमसे ज्यादा प्यार है

शरद पवार और उद्धव ठाकरे की फाइल फोटो
शरद पवार और उद्धव ठाकरे की फाइल फोटो

महाराष्ट्र के दो नेताओं मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (uddhav thackeray) और शरद पवार (Sharad Pawar) को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने नोटिस भेजा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 22, 2020, 2:17 PM IST
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मुंबई. महाराष्ट्र (Maharashtra) की राजनीति के दो धुरों मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (uddhav thackeray) और शरद पवार (Sharad Pawar) को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने नोटिस भेजा है. यह नोटिस ऐसे समय में पहुंचा है जब संसद में सरकार और विपक्ष के बीच तनातनी जारी है और महाराष्ट्र की राज्य सरकार कई मामलों में बीजेपी के निशाने पर है. दोनों को यह नोटिस बीते इलेक्शन में दिए गए एफिडेविट को लेकर भेजे गए हैं. जिन नेताओं को आयकर विभाग का नोटिस मिला है उसमें ठाकरे और पवार के साथ ही आदित्य ठाकरे, पवार की बेटी सुप्रिया सुले भी शामिल हैं.

पवार ने कहा कि मुझे कल इनकम टैक्स का नोटिस मिला है. सुप्रिया को भी आज या कल नोटिस मिल जाएगा, अच्छी बात है कि सभी संसद सदस्यों में से हमें ही नोटिस मिल रहा है और हमें ही चुना जा रहा है, कुछ लोगों को हमसे अधिक प्रेम है इसलिए नोटिस मिल रहा है.

गौरतलब है कि कृषि बिल के मुद्दे पर जहां एनसीपी ने अपोजिशन का समर्थन किया है वहीं कंगना, सुशांत सिंह राजपूत और कोरोना में सरकारी बदइंतजामियों के चलते शिवसेना सरकार बीजेपी के निशाने पर है.



क्या है इन नेताओं पर आरोप?
जानकारी के मुताबिक महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ दल शिवसेना और उनकी सहयोगी​ पार्टी एनसीपी के इन नेताओं पर आरोप है कि इन लोगों ने चुनाव के समय चुनाव आयोग को जो हलफनामा दिया है उसमें कई जानकारी गलत भरी हैं और कई अधूरी जानकारी दी गई हैं. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक शिकायतकर्ताओं ने अपने दावे के समर्थन में कुछ दस्तावेज भी सौंपे हैं, जिससे पता चलता है कि इन नेताओं ने हलफनामे में गलत जानकारी दी है. इन दस्तावेजों को देखने के बाद ही चुनाव आयोग ने इसकी जांच सीबीडीटी के पास भेजी है.

चुनाव आयोग अब सीबीडीटी की जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रही है. ऐसे में अगर इन नेताओं पर लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो रिप्रजेटेंशन ऑफ पीपल एक्ट की धारा 125 ए के तहत सीबीडीटी इस मामले में केस दर्ज कर सकती है. इस सेक्शन के तहत अधिकतम 6 महीने की जेल या जुर्माना या फिर दोनों का प्रावधान है.

चुनाव से पहले चुनाव में खड़े होने वाले उम्मीदवार को चुनाव आयोग के सामने अपनी सभी तरह की जानकारी देनी होती है. इसमें आपराधिक पृष्ठभूमि, संपत्ति, देनदारी और शैक्षिक योग्यता का ब्योरा सबसे अहम है. साल 2013 में चुनाव आयोग ने तय किया था कि हर उम्मीदवार की ओर से दी गई लिखि​त जानकारी की जांच सीबीडीटी को करनी होगी.

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