महाराष्‍ट्र की सियासत पर केसी त्‍यागी का बड़ा बयान, बोले-पहले भी राज्यपाल की भूमिका पर उठते रहे हैं सवाल

केसी त्यागी ने सीएए और एनआरसी के मुद्दे पर एनडीए की बैठक बुलाने की मांग की.
केसी त्यागी ने सीएए और एनआरसी के मुद्दे पर एनडीए की बैठक बुलाने की मांग की.

जेडीयू के प्रधान महासचिव केसी त्यागी (KC Tyagi) ने महाराष्ट्र (Maharashtra) के सियासी संकट को लेकर कहा है कि राज्यपाल (Governor) की भूमिका पर पहले भी सवाल खड़े होते रहे हैं. उनका ये बयान भाजपा (BJP) के लिए परेशानी बन सकता है.

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नई दिल्‍ली. जेडीयू के प्रधान महासचिव केसी त्यागी (KC Tyagi) ने महाराष्ट्र (Maharashtra) के मौजूदा सियासी संकट के बीच कहा है कि राज्यपाल (Governor) की भूमिका पर पहले भी सवाल खड़े होते रहे हैं. खासतौर से उन्होंने बिहार का उदाहरण दिया, जब बूटा सिंह ने नीतीश कुमार (Nitish Kumar) को मुख्यमंत्री पद पर आसीन होने से रोका था. उन्‍होंने कहा कि उस वक्त बिहार के राज्यपाल के पद पर बूटा सिंह आसीन थे, जिसके बाद लालकृष्ण आडवाणी (LK Advani) और नीतीश कुमार के नेतृत्व में विधायकों की परेड कराई गई थी. जबकि उत्तर प्रदेश में राज्यपाल रोमेश भंडारी (Romesh Bhandari) की भूमिका पर भी सवाल खड़ा करते हुए केसी त्यागी ने कहा कि रोमेश भंडारी का आचरण भी बूटा सिंह की तरह ही था.

इस वजह से कटघरे में राज्‍यपालों के फैसले
हालांकि जेडीयू नेता केसी त्‍यागी ने साफ किया कि जब संविधान सभा में भी कहा गया था कि रिटायर्ड जज और सिविल सोसायटी के लोग ही राज्यपाल बनेंगे, लेकिन समय के साथ पार्टी के चहते लोगों की इस पद पर नियुक्ति होने लगी. यकीनन इसी वजह से राज्यपालों के फैसले पर ही सवाल खडे होने लगे हैं. जबकि त्‍यागी ने महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की भूमिका को लेकर फिलहाल टिप्पणी करने से मना कर दिया. त्यागी का कहना है कि महाराष्ट्र में मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, लिहाजा उस पर टिप्पणी उचित नहीं है.

महाराष्‍ट्र का सियासी खेल
दरअसल, महाराष्ट्र में चल रहे सियासी ड्रामे के बीच विपक्षी दल खासकर शिवसेना की तरफ से राज्यपाल की भूमिका पर सवाल खड़े किए गए हैं. यही नहीं, इस बीच बीजेपी की दूसरी सहयोगी जेडीयू की तरफ से भी राजनीतिक दलों के लोगों की राज्यपाल पद पर नियुक्ति पर ही सवाल खड़ा कर दिया गया है. बीजेपी के लिए यह परेशानी का कारण हो सकता है, लेकिन एक बात साफ है कि विरोधियों को हमले का मौका मिल गया है. जबकि आरजेडी ने बीजेपी के सहयोगी दलों को ही सचेत करना शुरू कर दिया है. आरजेडी सांसद मनोज झा ने बीजेपी पर अपने विरोधियों से ज्यादा सहयोगियों को ही निगलने का आरोप लगा दिया है. फिलहाल इस सवाल को लेकर सियासत जारी रहने वाली है. वहीं आरोप-प्रत्यारोप के इस खेल में बिहार भी अछूता नहीं है और महाराष्ट्र की सियासी हलचल का असर बिहार पर भी दिख रहा है.



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