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कांग्रेस से शिवसेना में आए इकलौते मुस्लिम विधायक ने महाराष्‍ट्र में कैसे पाटी वैचारिक विरोधियों के बीच की खाई

उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस के नाराज नेता अब्‍दुल सत्‍तार को शिवसेना में शामिला कराया और सिलोद से विधानसभा चुनाव में प्रत्‍याशी बनाया. अब कांग्रेस में सत्‍तार का उदाहरण देकर शिवसेना का समर्थन कर सरकार बनाने की बात कही जा रही है.

उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस के नाराज नेता अब्‍दुल सत्‍तार को शिवसेना में शामिला कराया और सिलोद से विधानसभा चुनाव में प्रत्‍याशी बनाया. अब कांग्रेस में सत्‍तार का उदाहरण देकर शिवसेना का समर्थन कर सरकार बनाने की बात कही जा रही है.

मराठवाड़ा क्षेत्र के सिलोद (Sillod) से पूर्व पशुपालन मंत्री अब्‍दुल सत्‍तार (Abdul Sattar) ने औरंगाबाद से टिकट नहीं मिलने पर लोकसभा चुनाव 2019 से पहले कांग्रेस (Congress) छोड़कर शिवसेना का दामन थाम लिया था. वह उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) की मौजूदगी में पार्टी में शामिल हुए थे. सत्‍तार ने अलग विचारधारा वाली शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी (NCP) को महाराष्‍ट्र में सरकार बनाने के लिए साथ लाने में बड़ी भूमिका निभाई है.

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    प्रशांत लीला रामदास

    नई दिल्‍ली. महाराष्‍ट्र में सरकार बनाने के लिए शिवेसना (Shiv Sena) के कट्टर राजनीतिक (Political) और वैचारिक (Ideological) शत्रुओं के साथ आने की चर्चाएं अपने चरम पर हैं. महाराष्‍ट्र (Maharashtra) और बाहर के कांग्रेस (Congress) नेताओं के एक धड़े ने शिवसेना से किसी भी सूरत में हाथ नहीं मिलाने की बात कही थी. कांग्रेस कार्यकारी समिति (CWC) से लेकर केरल (Kerala) तक के नेताओं का कहना था कि इस नए गठबंधन (Alliance) के कारण अगले विधानसभा चुनाव (Assembly Polls) में पार्टी पर बुरा असर पड़ने का डर है. कांग्रेस किसी निर्णय पर पहुंचने से पहले हर स्‍तर पर अपने नेताओं से इस बारे में चर्चा कर रही थी. इस मामले में महाराष्‍ट्र के कांग्रेस नेताओं के बीच भी एकराय नहीं थी.

    महाराष्‍ट्र के राज्‍यपाल भगत सिंह कोश्‍यारी (Bhagat Singh Koshiyari) ने शिवसेना को सरकार बनाने का दावा करने के लिए उस दिन (11 नवंबर) शाम 7.30 बजे तक का समय मिला था लेकिन उसका समर्थन करने पर कांग्रेस के वरिष्‍ठ और युवा नेताओं के विचारों में अंतर साफ नजर आ रहा था. राज्‍यपाल (Governor) की ओर से दिया गया समय खत्‍म होने में ज्‍यादा देर नहीं बची थी. लेकिन इस मामले में कांग्रेस का अंदरूनी गतिरोध खत्‍म होने में नहीं आ रहा था. इस बारे में एक वरिष्‍ठ नेता ने बयान दिया कि सरकार बनाने की इच्‍छा रखने वाले नेता पार्टी में हावी हो गए हैं. पार्टी में सरकार बनाने को लेकर चर्चा तेज हो गई है. ये सब एक व्‍यक्ति का उदाहरण देकर किया गया था.

    सत्‍तार ने सिलोद में कांग्रेस को तीसरे नंबर पर धकेला
    मराठवाड़ा (Marathwada) क्षेत्र के सिलोद (Sillod) से पूर्व पशुपालन मंत्री अब्‍दुल सत्‍तार (Abdul Sattar) ने औरंगाबाद से टिकट नहीं मिलने पर लोकसभा चुनाव 2019 से पहले कांग्रेस छोड़कर शिवसेना का दामन थाम लिया था. वह शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) की मौजूदगी में पार्टी में शामिल हुए थे. उन्‍होंने बीजेपी (BJP) में शामिल होने के लिए देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) से भी मुलाकात की थी. लेकिन शिवसेना ने उन्‍हें अपने पाले में कर लिया और विधानसभा चुनावों में सिलोद से मैदान में उतारा. सत्‍तार ने न सिर्फ बहुत ही आसानी से चुनाव जीत लिया बल्कि क्षेत्र में कांग्रेस को तीसरे स्‍थान पर धकेल दिया.

    कांग्रेस छोड़कर शिवसेना में शामिल हुए सिलोद से विधायक अब्‍दुल सत्‍तार ने न सिर्फ बहुत ही आसानी से चुनाव जीत लिया बल्कि क्षेत्र में कांग्रेस को तीसरे स्‍थान पर धकेल दिया.


    खत्‍म हो चुका सांप्रदायिक बनाम धर्मनिरपेक्ष विभाजन
    सत्‍तार का मुकाबला एक निर्दलीय प्रत्‍याशी (Independent Candidate) से था, जिसे 90 हजार वोट मिले. वह दूसरे स्‍थान पर रहा. कांग्रेस में सरकार बनाने की चाहत रखने वाले नेताओं (Pro-government Formation) ने सत्‍तार के मामले को सामने रखा. उनका कहना था कि कांग्रेस पिछले कुछ साल में ऐसी ही सियासी गलतियां (Political Mistakes) करती रही है, जिनका बाद में खामियाजा भुगतना पड़ा है. अब राजनीति में सांप्रदायिक बनाम धर्मनिरपेक्ष (Communal vs Secular) विभाजन का पुराना प्रतिमान अप्रासंगिक हो चुका है. एक कांगेस नेता ने कहा कि एक मुस्लिम और पूर्व कांग्रेसी नेता शिवसेना में शामिल होता है और अल्‍पसंख्‍यक बाहुल्‍य विधानसभा क्षेत्र में आसानी से जीत जाता है. इससे साफ पता चलता है कि राजनीति में किस तरह के बदलाव आ रहे हैं.

    कांग्रेस विधायकों में अंतिम फैसले की बढ़ रही थी बेचैनी
    शिवसेना के साथ गठबंधन कर सरकार बनाने के लिए एक तर्क और दिया गया. कांग्रेस नेताओं का कहना था कि पार्टी विधायकों में सरकार बनाकर सत्‍ता में रहने या अगले पांच साल तक विपक्ष (Opposition) में बैठने को लेकर बेचैनी बढ़ती जा रही है. वहीं, बीजेपी लगातार विपक्ष के नेताओं को लुभाने की कोशिशों में जुटी है. ऐसे में महाराष्‍ट्र एक और कर्नाटक (Karnataka) में तब्‍दील हो सकता है. इन सभी तर्कों ने कांग्रेस के महाराष्‍ट्र में शिवसेना का समर्थन करने की जमीन तैयार की है. हालांकि, तुरंत किसी तरह का समर्थन पत्र जारी नहीं किया गया, लेकिन कांग्रेस ने शिवसेना और एनसीपी (NCP) के साथ मिलकर सरकार बनाने की संभावनाओं को तलाशने पर पहली बार विचार करना शुरू कर दिया था.

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