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महाराष्ट्र के समुद्री तटों में अब देखा गया ब्लू टाइड, जानें क्या है ये?

 ये ब्लू टाइड इंसानों, मछलियों, सेलफिश और अन्य समुद्री जीवों के लिए हानिकारक होते हैं. हाल ही में कुछ कई तटीय क्षेत्रों में ऐसा देखा गया था. (AP)
ये ब्लू टाइड इंसानों, मछलियों, सेलफिश और अन्य समुद्री जीवों के लिए हानिकारक होते हैं. हाल ही में कुछ कई तटीय क्षेत्रों में ऐसा देखा गया था. (AP)

'ब्लू टाइड' के रूप में जानी जाने वाली ये घटना काफी दुर्लभ होती है. जब फाइटो प्लैंक्टन (सूक्ष्म समुद्री वनस्पति) ज्यादा बड़े हो जाते हैं, तो उनसे एक टॉक्सिक निकलता है. इससे नीले रंग की झिलमिलाती छटा बनती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 26, 2020, 1:08 PM IST
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मुंबई. महाराष्ट्र में कई तटरेखाओं पर नीले ज्वार (Blue Tide) देखे गए हैं. क्षेत्रीय मौसम विभाग के मुताबिक मुंबई के जुहू, देवगढ़ और रत्नागिरि बीच पर नीले रंग की झिलमिलाती हुई छटा देखी गई है. 'ब्लू टाइड' के रूप में जानी जाने वाली ये घटना काफी दुर्लभ होती है. जब फाइटो प्लैंक्टन (सूक्ष्म समुद्री वनस्पति) ज्यादा बड़े हो जाते हैं, तो उनसे एक टॉक्सिक निकलता है. इससे नीले रंग की झिलमिलाती छटा बनती है. ये ब्लू टाइड इंसानों, मछलियों, शेलफिश और अन्य समुद्री जीवों के लिए हानिकारक होते हैं. हाल ही में कुछ कई तटीय क्षेत्रों में ऐसा देखा गया था.

समुद्री वैज्ञानिकों के मुताबिक फाइटोप्लैंक्टन (सूक्ष्म समुद्री वनस्पति) को आम तौर पर डाइनोफ्लैगलेट्स के रूप में जाना जाता है. इनके प्रोटीन में रासायनिक प्रतिक्रियाओं के माध्यम से हल्के का उत्पादन निकलता है. इससे नीली तरंगें निकलती हैं, जो एक कोशिकीय सूक्ष्म जीवों को परेशान करती हैं.

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ई. विवेकानंदन, सलाहकार और वैज्ञानिक (सेंट्रल मरीन फिशरीज रिसर्च इंस्टीट्यूट) के मुताबिक, 2016 के नवंबर और दिसंबर के बाद पश्चिम तट में हुई ये ऐसी पहली घटना है. इस समय सूक्ष्म समुद्री वनस्पति लूसिफ़ेरेज़ (ऑक्सीडेटिव एंजाइम) प्रोटीन निकालते हैं, जिसकी रासायनिक प्रतिक्रियाओं की एक श्रृंखला के कारण समुद्र में ऐसी नीली झिलमिलाती रोशनी दिखाई देती है.
समुद्री वैज्ञानिकों ने कहा कि इस घटना के लिए मुख्य कारकों में एक यूट्रोफिकेशन हो सकता है यानी समुद्र में ऑक्सीजन की कमी. ये फाइटोप्लांकटन को बहुत प्रभावी बनाता है.

वहीं, समुद्री शोधकर्ता और तटीय संरक्षण फाउंडेशन के निदेशक शौनक मोदी बताते हैं, 'जुहू कोलीवाड़ा में मंगलवार को 11.45 बजे ये घटना देखी गई. इस घटना को सनित आचरेकर नाम के शख्स ने देवगढ़ समुद्र तट से देखा था.

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वैज्ञानिकों के मुताबिक, ब्लू टाइड की तरह समुद्री तटों पर रेड टाइड भी देखे जाते हैं. ये भी एक तरह की प्राकृतिक घटना है. इस केस में सूक्ष्म वानस्पतिक जीव खुद से लाल तरह का लिक्विड छोड़ते हैं, जिससे लाल रंग की रोशनी बनती है. यह दुर्लभ घटना है.
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