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महाराष्‍ट्र में सरकार बनाम राज्‍यपाल, राजभवन के अधिकारियों पर बरसे उद्धव ठाकरे

उद्धव ठाकरे ने राजभवन के अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया है. (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर- PTI)
उद्धव ठाकरे ने राजभवन के अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया है. (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर- PTI)

Maharashta Governor vs CM Uddhav: राज्यपाल कोश्यारी विमान प्रकरण पर राजभवन ने कहा कि सरकार ने उन्‍हें विमान के उपयोग की अनुमति नहीं दी. इस पर उद्धव ठाकरे ने अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 11, 2021, 6:26 PM IST
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मुंबई. महाराष्‍ट्र के राज्‍यपाल भगत सिंह कोश्‍यारी (Governor Bhagat Singh Koshyari) विमान प्रकरण को लेकर राजभवन और उद्धव ठाकरे सरकार (Uddhav Thackeray Government) के बीच तनातनी बढ़ गई है. इस पर राजभवन का कहना है कि 2 फरवरी को पत्र लिखकर राज्‍यपाल द्वारा सरकारी विमान के उपयोग की अनुमति मांगी गई थी. लेकिन राज्‍यपाल जब मुंबई एयरपोर्ट पहुंचे और सरकारी विमान में सवार हुए तो उनसे अनुमति नहीं मिलने की बात कही गई. इस पर मुख्‍यमंत्री उद्धव ठाकरे ने राजभवन के लोगों पर गलती और लापरवाही का आरोप लगाया है.

मुख्‍यमंत्री ठाकरे ने कहा, 'महाराष्ट्र के राजभवन को विमान उपलब्धता के बारे में पता किया जाना चाहिए. राज्यपाल जैसे सम्मानित व्यक्ति के साथ अच्छा नहीं हुआ. इसके जिम्मेदार राजभवन के अधिकारी हैं. राज्य सरकार ने 10 फरवरी को विमान यूज करने से मना कर दिया था और इस संबंध में राजभवन के अधिकारियों को मुख्यमंत्री ऑफिस में बात करके एक बार पता कर लेना चाहिए था. फिर राज्यपाल के आने का प्रबंध करना चाहिए था.' उन्‍होंने कहा कि इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए और राजभवन के संबंधित अधिकारी की जिम्‍मेदारी तय की जानी चाहिए.

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विपक्ष ने इस मामले पर साधा निशाना
भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र के राज्यपाल भगह सिंह कोश्यारी को सरकारी विमान से देहरादून की यात्रा करने की अनुमति नहीं देने को लेकर राज्य सरकार की गुरुवार को आलोचना की. उन्होंने शिवसेना नीत गठबंधन सरकार पर आरोप लगाया कि वह अहंकारी है और 'बचकाना हरकतें' कर रही है. पूर्व मुख्यमंत्री फडणवीस ने यह आरोप भी लगाया कि राज्य सरकार ने राज्यपाल के संवैधानिक पद का अपमान किया है.

वहीं, एमएनएस ने भी इसे राज्यपाल का अपमान बताकर उद्धव ठाकरे सरकार को घेरा है. एमएनएस नेता बाला नांदगांवकर ने कहा, 'जो कुछ हुआ वह बहुत बुरा है. महाराष्ट्र में पहले कभी ऐसा नहीं हुआ. राज्यपाल का पद संवैधानिक है और उनका सम्मान करना चाहिए. साथ ही राज्यपाल को भी राज्य सरकार का सम्मान करना चाहिए. मुख्यमंत्री और राज्यपाल अहम पद हैं और दोनों को एक दूसरे का सम्मान करना चाहिए.'
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