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महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019: सीट बंटवारे पर BJP-शिवसेना के बीच क्यों फंसा पेंच?

लोकसभा चुनाव 2019 से पहले उद्धव ठाकरे और अमित शाह ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बराबर-बराबर सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया था (फाइल फोटो)

लोकसभा चुनाव 2019 से पहले उद्धव ठाकरे और अमित शाह ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बराबर-बराबर सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया था (फाइल फोटो)

शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने 50-50 के फॉर्मूले की मांग कर दोनों दलों के बीच तल्खी और बढ़ा दी है. बीजेपी-शिवसेना में मतभेद सिर्फ सीटों को लेकर नहीं है बल्कि मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर भी दोनों दलों में आपसी समहमति नहीं बनी है.

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नई दिल्ली. महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस और एनसीपी ने सीटों का बंटवारा पूरा कर लिया है लेकिन बीजेपी और शिवसेना में मामला बनता दिखाई नहीं दे रहा है. लोकसभा चुनाव 2019 में बीजेपी ने भले ही शिवसेना की बात मान ली हो लेकिन विधानसभा चुनाव में बीजेपी शिवसेना की किसी भी शर्त को मानने को तैयार नहीं है. शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने 50-50 के फॉर्मूले की मांग कर दोनों दलों के बीच तल्खी और बढ़ा दी है. बीजेपी-शिवसेना में मतभेद सिर्फ सीटों को लेकर नहीं है बल्कि मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर भी दोनों दलों में आपसी समहमति नहीं बनी है.

50-50 के लिए तैयार नहीं है महाराष्ट्र BJP
सूत्रों की मानें तो महाराष्ट्र बीजेपी शिवसेना को किसी भी कीमत पर विधानसभा की कुल 288 सीटों में सिर्फ एक-तिहाई सीटों से ज्यादा देने को तैयार नहीं है. ज्यादा दबाव पड़ने पर इस संख्या को पार्टी 100 तक कर सकती है जबकि शिवसेना बराबर-बराबर सीटों की मांग पर अड़ी है. बीजेपी के स्थानीय नेताओं का मानना है कि ये शिवसेना बाल ठाकरे के जमाने की शिवसेना नहीं है जिसे बराबर-बराबर सीटें देनी पड़े. शिवसेना से राज ठाकरे के अलग हो जाने से उसका कोर वोट बैंक कमजोर हुआ है, 2014 के विधानसभा चुनाव में शिवसेना से कम सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद बीजेपी को शिवसेना से करीब-करीब दोगुना सीटों पर जीत मिली थी. ऐसे में पार्टी बराबर-बराबर सीटों पर चुनाव क्यों लड़ें लेकिन बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व के कुछ नेता कुछ सीटों के लिए शिवसेना से वर्षों पुराना साथ नहीं छोड़ना चाहते. ऐसे में ये नेता चाहते हैं कि पार्टी बराबर-बराबर नहीं लेकिन शिवसेना के लिए सम्मानजन सीटें छोड़ दे. लेकिन सूत्र बताते हैं कि किसी भी हालात में ये आकड़े 100 से ज्यादा नहीं होगा.

CM फेस के साथ चुनाव लड़ेगी BJP
बात सिर्फ सीटों के बटवारे तक ही सीमित नहीं है बल्कि चुनाव से पहले मुख्यमंत्री उम्मीदवार का चेहरा घोषित करने को लेकर भी दोनों पार्टियों (शिवसेना और बीजेपी) में मतभेद सामने आ रहे हैं. शिवसेना चाहती है कि पहले की तरह इस बार भी बीजेपी चुनाव से पूर्व अपने मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित न करे. लेकिन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के करीबी समझे जाने वाले कई नेता शिवसेना की इस मांग का खुलकर विरोध कर रहे हैं. सूत्रों की मानें तो बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व भी इस बार तीनों चुनावी राज्यों (महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड) में मुख्यमंत्री के चेहरा घोषित कर चुनाव लड़ने की तैयारी में है ऐसे में इस मामले पर बीजेपी शिवसेना की बात मान जाए इसकी उम्मीद कम नजर आ रही है.

नहीं बनी बात तो क्या होगा आगे
ऐसे हालात में शिवसेना ने भी अपना एक्शन प्लान तैयार कर लिया है. शिवसेना के करीबी सूत्रों की मानें तो गठबंधन में सहयोगी बीजेपी पर दबाव बनाने के लिए पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाने की तैयारी है. पिछले विधानसभा चुनाव में 63 सीटें जीतने वाली शिवसेना इस बार 120 से कम सीटों पर चुनाव लड़ने को तैयार नहीं है. इससे कम सीटें मिलने की हालत में पार्टी अकेले चुनाव लड़ने पर भी विचार कर सकती है.

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