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साईं बाबा के जन्मस्थल पर विवाद: उद्धव सरकार बना सकती है इतिहासकारों की कमेटी

रविवार से अनिश्चित काल के लिए शिरडी बंद का ऐलान कर दिया गया है

रविवार से अनिश्चित काल के लिए शिरडी बंद का ऐलान कर दिया गया है

पिछले दिनों मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) ने पाथरी को साईं बाबा की जन्मभूमि बता दिया था, जिसके बाद हंगामा हो गया और लोग विरोध करने लगे.

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    मुंबई. साईं बाबा (Sai Baba Temple) के जन्मस्थान को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है. रविवार से अनिश्चित काल के लिए शिरडी बंद का ऐलान कर दिया गया. इस बीच विवाद को सुलझाने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने सोमवार को बैठक बुलाई है. कहा जा रहा है कि इस बैठक में सरकार इतिहासकारों की एक कमेटी बना सकती है. बता दें कि पिछले दिनों मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) ने पाथरी को साईं की जन्मभूमि बता दिया था, जिसके बाद हंगामा हो गया और लोग विरोध करने लगे.

    बन सकती है कमेटी
    सूत्रों के मुताबिक महाराष्ट्र सरकार ने सोमवार को होने वाली इस खास बैठक में सभी पक्षों को बुलाया है. कहा जा रहा है कि विवाद की गंभीरता को देखते हुए सरकार पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में कमेटी बनाने पर विचार कर रही है. इस कमेटी में पुरातत्व विभाग से जुड़े विशेषज्ञ और इतिहासकार रखे जा सकते हैं. सरकार तीन महीने के भीतर इस कमेटी को रिपोर्ट देने के लिए कह सकती है.

    शिरडी में तनाव
    इस बीच शिरडी गांव के लोगों ने सरकार को संकेत दे दिए हैं कि जब तक सरकार साईंजन्म स्थान पाथरी को मानने के अपने फैसले को वापस नहीं लेती है, तब तक वो शिरडी बंद रखेंगे.

    क्या है विवाद का असली जड़
    विवाद की शुरुआत तब हुई जब मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने परभणी जिले में स्थित पाथरी के विकास के लिए सौ करोड़ रुपये की राशि देने का ऐलान कर दिया. उन्होंने कहा कि वहां 100 करोड़ रुपये का विकास का काम करेंगे और पाथरी गांव में इस प्रोजेक्ट को अमल में लाया जाएगा. कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री के इस ऐलान के बाद साईं बाबा के जन्मस्थान गांव पाथरी के लोग खुशी से झूम उठे और जश्न मनाने लगे. कुछ श्रद्धालुओं का मानना है कि साईंबाबा का जन्म पथरी में हुआ था. वहीं दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने कहा कि जन्मस्थल पर विवाद के कारण पाथरी में श्रद्धालुओं को दी जाने वाली सुविधाओं का विरोध नहीं होना चाहिए. अहमदनगर जिले में स्थित शिरडी में 19वीं शताब्दी में साईंबाबा ने निवास किया था, जहां आज लाखों श्रद्धालु प्रतिवर्ष दर्शन करने जाते हैं.

    नेता कर रहे हैं सबूत देने का दावा
    एनसीपी नेता दुर्रानी अब्दुल्ला खान ने गुरुवार को दावा किया कि इसके पर्याप्त सबूत हैं कि साईबाबा का जन्म पथरी में हुआ था. उन्होंने कहा, 'शिरडी साईबाबा की कर्मभूमि है, जबकि पथरी उनकी जन्मभूमि है और दोनों स्थान का अपना महत्व है.' उन्होंने कहा कि देश और दुनिया के पर्यटक पथरी जाते हैं, लेकिन वहां ढांचागत सुविधाओं का अभाव है. खान ने कहा, 'शिरडी के लोगों को धन की समस्या नहीं है. वह पथरी को साईंबाबा का जन्मस्थल मानने को तैयार नहीं हैं.' खान ने आरोप लगाया कि शिरडी के निवासियों को डर है कि यदि पाथरी प्रसिद्ध हो गया तो श्रद्धालुओं की भीड़ वहां चली जाएगी.

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