सोनिया गांधी को अपने ही नेताओं ने चेताया- महाराष्ट्र में नहीं बनाई सरकार तो खत्म हो जाएगी कांग्रेस
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सोनिया गांधी को अपने ही नेताओं ने चेताया- महाराष्ट्र में नहीं बनाई सरकार तो खत्म हो जाएगी कांग्रेस
सोनिया को बताए गए कारणों में सबसे अहम था कि कांग्रेस के जीते हुए विधायक काफी बेचैन हो रहे हैं. उन सभी का कहना है कि वे अपने बल पर जीत कर यहां तक आए हैं किसी ने उन्हें कोई मदद नहीं की है. (फाइल फोटो)

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, CWC की बैठक के दौरान शिवसेना (Shiv Sena) को समर्थन देने को लेकर कांग्रेस (Congress) की अंतरिम अध्यक्ष पर अपने ही नेताओं ने दबाव बनाया था.

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  • Last Updated: November 13, 2019, 12:13 PM IST
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नई दिल्ली. राजधानी में सोमवार को हुई कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक के दौरान कुछ ऐसा हुआ कि पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने विपक्ष में बैठने की बात को छोड़ शिवसेना (Shiv Sena) को समर्थन देने के बारे में सोचना शुरू कर दिया. दरअसल, इस बैठक के दौरान कांग्रेस (Congress) के नेताओं ने एक सुर में सोनिया गांधी से कहा कि यदि इस बार कांग्रेस की सरकार महाराष्ट्र (Maharashtra) में नहीं बनी तो सूबे में कांग्रेस का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा. इस दौरान अशोक चव्हाण, बालासाहब थोराट, माणिकराव ठाकरे और रजनी पाटिल ने जोर दिया कि बीजेपी के हाथ से निकलते इस मौके को हर हाल में पकड़ना चाहिए और महाराष्ट्र में सरकार का निर्माण करना चाहिए.

अपने बल पर जीते हैं तो सरकार बननी ही चाहिए
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान सोनिया को बताए गए कारणों में सबसे अहम था कि कांग्रेस के जीते हुए विधायक काफी बेचैन हो रहे हैं. उन सभी का कहना है कि वे अपने बल पर जीत कर यहां तक आए हैं, किसी ने उन्हें कोई मदद नहीं की है. गौरतलब है कि कांग्रेस के सभी विधायक अभी जयपुर में हैं. कांग्रेस को डर है कि उनके विधायकों के साथ हॉर्स ट्रेडिंग की जा सकती है.

शिवसेना से हाथ मिलाने का विरोध भी
बैठक के दौरान एआईसीसी के वरिष्ठ नेता एके एंटनी, मुकुल वासनिक और पूर्व गृह मंत्री शिवराज पाटिल उन नेताओं में से थे, जिन्हें शिवसेना से हाथ मिलाना मंजूर नहीं था. इसके पीछे सभी का एक मुख्य कारण शिवसेना और खासकर ठाकरे की पूर्णतः हिंदुत्व की सोच होना बताया गया. वहीं, केसी वेणुगोपाल ने कहा कि कर्नाटक में जेडी(एस) जिस तरह से साथ चल नहीं सका ऐसा ही कुछ महाराष्ट्र में होने की भी आशंका है. वहीं, अशोक चव्हाण ने कहा कि ऐसा हो सकता है कि शिवसेना का साथ देने पर अल्पसंख्यक समुदाय का कांग्रेस पर से भरोसा उठ जाए. इस बैठक के बाद एंटनी और वेणुगोपाल ने मंगलवार सुबह एक बार फिर सोनिया गांधी के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की थी.



सोनिया ने दिखाई गंभीरता
हालांकि, सोनिया गांधी खुद शिवसेना को किसी भी हाल में समर्थन देने के लिए तैयार नहीं थीं, लेकिन स्‍थानीय नेताओं की बातों को उन्होंने गंभीरता से लिया. इस बारे में उन्होंने एनसीपी प्रमुख शरद पवार से गठबंधन के संबंध में बातचीत की. पवार ने इस दौरान कहा कि अभी सभी बातें निर्णायक दौर में नहीं पहुंची हैं, इसलिए कुछ भी कदम उठाना सही नहीं होगा. इसके बाद सोनिया गांधी ने खुद पर बनते दबाव के बीच अपने वरिष्ठ तीन नेताओं को पवार और एनसीपी के अन्य नेताओं से बात करने मुंबई भेजा था.

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