महाराष्ट्र साइबर सेल का दावा- किसान आंदोलन की आड़ में चल रहा खालिस्तानी मूवमेंट

किसान आंदोलन की आड़ में खालिस्तान समर्थकों का जमावड़ा लग गया है? (Photo-AP)

Kisan Andolan: केंद्र द्वारा पारित किए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलित हैं. सुरक्षा एजेंसियों को इस बात का शक है कि इस आंदोलन की आड़ में खालिस्तानी विचारधारा अपने कदम बढ़ा सकती है.

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    मुंबई. केंद्र सरकार द्वारा पास किए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन (Kisan Andolan) की आड़ में खालिस्तानी मूवमेंट्स (Khalistan Movements) चलाए जाने की आशंका है. कुछ सुरक्षा एजेंसियों ने दावा किया है कि इस आंदोलन के बीच खालिस्तानी विचारधारा के समर्थन सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं. महाराष्ट्र की साइबर सेल ने दावा किया है कि कई सोशल अकाउंट्स जो इस्तेमाल नहीं हो रहे थे, उन पर एक्टिविटी बढ़ गई है.

    एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कट्टर विचारधारा के लोगों ने बीते कुछ दिनों के भीतर आतंकी भिंडरावाले और खालिस्तान से जुड़ी पोस्ट्स शेयर की. महाराष्ट्र साइबर सेल ने दावा किया कि 16 दिनों में करीब 12,800 पोस्ट्स पाए गए जिसमें खालिस्तान का जिक्र है. जबकि 6321 पोस्ट्स में भिंडरावाले का जिक्र है.

    सेल ने दावा किया कि उनकी जांच में यह पाया गया कि अधिकतर अकाउंट्स का इस्तेमाल ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा और भारत से चलाए जा रहे हैं. कुछ अकाउंट्स नवंबर या दिसंबर में बनाए गए तो कुछ अकाउंट्स हैं जो अब तक इनएक्टिव थे लेकिन अचानक से उन पर गतिविधि बढ़ गई है.  जांच में पाया गया कि इन अकाउंट्स को चलाने वाले साइबर एक्सपर्ट्स हैं. ये लोग पहचान छिपाने के लिए अलग-अलग देशों के आईपी एड्रेस इस्तेमाल कर रहे हैं.



    एनआईए ने 16 आरोपियों के खिलाफ दायर किया आरोपपत्र
    बीते दिनों राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने देशविरोधी गतिविधियों में हिस्सा लेने और देश में क्षेत्रीयता और धर्म के आधार पर रंजिश बढ़ाने के आरोप में अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा में रहने वाले 16 लोगों के खिलाफ आतंक रोधी कानून यूएपपीए के तहत आरोपपत्र दाखिल किया.

    एनआईए के आरोपपत्र में कहा गया है कि अमेरिका से सात आरोपी, ब्रिटेन से छह और कनाडा से तीन आरोपी ‘खालिस्तान’ के गठन के लिए ‘रेफरेंडम 2020’ के बैनर तले अलगाववादी अभियान शुरू करने की साजिश में संलिप्त थे. विशेष अदालत के सामने गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम कानून (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोपपत्र दाखिल किया गया.

     युवाओं को कट्टर बनाने का अभियान चलाया
    आरोपियों में गुरपतवंत सिंह पन्नून, हरदीप सिंह निज्जर और परमजीत सिंह को गृह मंत्रालय द्वारा आतंक रोधी कानून के तहत आतंकवादी घोषित किया गया है. पन्नून अमेरिका में, निज्जर कनाडा में और परमजीत ब्रिटेन में है. आरोप पत्र में अवतार सिंह पन्नून, हरप्रीत सिंह, अमरदीप सिंह पुरेवाल, हरजाप सिंह, सरबजीत सिंह और एस हिम्मत (सभी आरोपी अमेरिका के), गुरप्रीत सिंह बग्गी, सरबजीत सिंह बन्नूर, कुलवंत सिंह मोठाद, दुपिंदरजीत सिंह और कुलवंत सिंह (सभी ब्रिटेन से) और जे एस धालीवाल और जतिंदर सिंह ग्रेवाल (कनाडा के) के नाम हैं.

    एनआईए के मुताबिक ये सभी लोग सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) के सदस्य हैं. यूएपीए के तहत इस संगठन को गैरकानूनी संगठन घोषित किया गया है. एनआईए के प्रवक्ता के मुताबिक मामले में जांच में पता चला कि ‘सिख फॉर जस्टिस’ पाकिस्तान समेत विदेशी सरजमीं से खालिस्तान आतंकवादी संगठनों का मुखौटा संगठन है. अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया समेत कुछ अन्य देशों में मानवाधिकार के पैराकार संगठन के नाम पर यह एक अलगाववादी संगठन है. फेसबुक, टि्वटर, वाट्सऐप समेत सोशल मीडिया के मंचों पर इसने देशद्रोही और धर्म तथा क्षेत्रीयता के आधार पर रंजिश बढ़ाने, शांति-सौहार्द बिगाड़ने, युवाओं को कट्टर बनाने का अभियान चलाया.

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