महाराष्ट्रः CM और राज्यपाल के बीच नहीं थमा विवाद, पुलिस स्मृति दिवस पर मंच साझा करने से इनकार!

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे

पुलिस स्मृति दिवस (Police Memorial Day) पर राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे मंदिर तनाव के बाद पहली बार मंच साझा करने वाले थे, तैयारियां भी पूरी हो चुकी थीं. राज्यपाल का प्रोटोकॉल भी तैयार हो चुका था, लेकिन अचानक देर शाम राज्यपाल का नए गांव स्थित कार्यक्रम में आना कैंसिल हो गया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 21, 2020, 10:50 PM IST
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मुंबई. महाराष्ट्र में मंदिर खोलने के मुद्दे पर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी (Bhagat Singh Koshyari) के बीच हुए चिट्ठी वार का असर अब भी लगातार दिख रहा है. पुलिस स्मृति दिवस (Police Memorial Day) पर राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे मंदिर तनाव के बाद पहली बार मंच साझा करने वाले थे, तैयारियां भी पूरी हो चुकी थीं. राज्यपाल का प्रोटोकॉल भी तैयार हो चुका था, लेकिन अचानक देर शाम राज्यपाल का नए गांव स्थित कार्यक्रम में आना कैंसिल हो गया.

हालांकि इसके पीछे राज्यपाल के स्वास्थ्य संबंधी कारण नहीं दिए गए हैं. मंगलवार की देर शाम बीएमसी के एक मुद्दे पर बीजेपी के एक डेलीगेशन ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात कर उनको ज्ञापन दिया था. अचानक राज्यपाल का कार्यक्रम में ना आना यह बताता है कि अब भी राज्यपाल और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बीच सब कुछ ठीक-ठाक नहीं है.

मुख्यमंत्री और राज्यपाल के बीच विवाद
बता दें कि राज्यपाल ने मंदिर खोलने के मुद्दे पर सीएम उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए कहा कि क्या वह सेकुलर हो गए हैं और मंदिर पर आस्था नहीं है. जिसके बाद सीएम उद्धव ठाकरे ने भी राज्यपाल को कड़े शब्दों में जवाब दिया. राज्यपाल और सीएम के बीच इस चिट्ठी के कारण विवाद पैदा हो गया.




मुख्यमंत्री ने भी इसका जवाब देते हुए कहा था कि उन्हें राज्यपाल से अपने हिंदुत्व का प्रमाण नहीं चाहिए. अब पार्टी के मुखपत्र सामना में राज्यपाल पर सवाल उठाए गए हैं. सामना में लिखा है कि राज्यपाल के पद पर आसीन व्यक्ति को कैसा व्यवहार नहीं करना चाहिए, यह भगत सिंह कोश्यारी ने दिखा दिया है. मुखपत्र में लिखा है कि राज्यपाल ने आ बैल मुझे मार जैसा व्यवहार किया लेकिन वे ये कैसे भूल गए कि यहां बैल नहीं बल्कि शेर है.
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