महाराष्ट्र में बाल ठाकरे का विकल्प कहे जाने वाले राज ठाकरे का जादू आखिर क्यों पड़ा फीका

राज ठाकरे (Raj Thackeray) महाराष्ट्र की राजनीति में अपना असर खो चुके हैं. कभी धूमकेतु की तरह चमके राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) का 2019 के चुनावों में भी बुरा हाल है. 2014 के चुनावों में मनसे का एक विधायक था, इन चुनावों में भी उसे एक ही सीट पर बढ़त मिलती दिख रही है. अगर ऐसा होता है तो मनसे के लिए एक बड़ा झटका होगा.

राज ठाकरे (Raj Thackeray) महाराष्ट्र की राजनीति में अपना असर खो चुके हैं. कभी धूमकेतु की तरह चमके राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) का 2019 के चुनावों में भी बुरा हाल है. 2014 के चुनावों में मनसे का एक विधायक था, इन चुनावों में भी उसे एक ही सीट पर बढ़त मिलती दिख रही है. अगर ऐसा होता है तो मनसे के लिए एक बड़ा झटका होगा.

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मुंबई. महाराष्ट्र (Maharashtra) की राजनीति में कभी बालासाहब ठाकरे (Balasahab Thackeray) का विकल्प माने जाने वाले राज ठाकरे (Raj Thackeray) का जादू अब फीका पड़ गया है. पहले 2014 के चुनाव और अब 2019 के विधानसभा चुनावों (Assembly election) के परिणाम ये संकेत दे रहे हैं कि राज ठाकरे महाराष्ट्र की राजनीति में अपना असर खो चुके हैं. कभी धूमकेतु की तरह चमके राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का 2019 के चुनावों में भी बुरा हाल है. 2014 के चुनावों में मनसे का एक विधायक था, इन चुनावों में भी उसे एक ही सीट पर बढ़त मिलती दिख रही है. अगर ऐसा होता है तो मनसे के लिए एक बड़ा झटका होगा.

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने इन चुनावों में 104 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन उसे कामयाबी मिलती नहीं दिख रही है. उसे सिर्फ 2.53 फीसदी वोट मिलते दिख रहे हैं. इन चुनावों में भी वह लोकसभा की तरह कांग्रेस, एनसीपी के मुकाबले शिवसेना और बीजेपी पर ज्यादा हमलावर रहे. लोकसभा चुनावों में उन्होंने अपना कोई कैंडीडेट खड़ा नहीं किया था, लेकिन बीजेपी और पीएम मोदी के विरोध में खूब रैलियां की थीं, लेकिन इसका फायदा भी उन्हें नहीं मिला.

2009 में राज ठाकरे की पार्टी के पास 14 विधायक थे. फोटो :पीटीआई


राज ठाकरे का उदय
जब बाल ठाकरे ने अपने उत्तराधिकारी के रूप में राज ठाकरे की बजाए उद्धव को चुना तो उन्होंने शिवसेना से अपने रास्ते अलग कर लिए. इसके बाद उन्होंने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का गठन किया. 2008 तक आते-आते महाराष्ट्र की राजनीति में राज ठाकरे का कद इतना बढ़ गया था कि उन्होंने उस मुंबई को थाम दिया था, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह शहर कभी रुकता नहीं है. 2008 में बालासाहब ठाकरे की स्टाइल में राज ठाकरे और उनकी पार्टी के वर्करों ने मुंबई की रफ्तार को रोक दिया था. इस बंद के दौरान स्कूलों की छुट्टी कर दी गई, परीक्षा रद्द कर दी गई, बसों में आग लगा दी गई और भी हिंसा की घटनाएं हुईं.

2009 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव
राज ठाकरे की पार्टी ने 2009 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में अपनी ताकत का प्रदर्शन किया. लोकसभा में भले इस पार्टी का कोई उम्मीदवार नहीं जीता, लेकिन उसने कई सीटों पर शिवसेना उम्मीदवारों से ज्यादा वोट हासिल कर ये जता दिया कि अब उसे कोई रोक नहीं पाएगा. उसी साल हुए विधानसभा चुनावों में मनसे के 14 विधायक जीतकर आए. इसके बाद हुए नगर निगम चुनावों में भी मनसे ने शानदार प्रदर्शन किया. नाशिक नगर निगम पर मनसे का कब्जा हो गया. और बीएमसी में उसके 27 कॉरपोरेटर्स चुनकर आए.

बीजेपी की ताकत बढ़ने से घटी मनसे
राज ठाकरे अपनी ताकत बरकरार नहीं रख पाए. भारतीय राजनीति में नरेंद्र मोदी के साथ बीजेपी ने जैसे- जैसे अपनी ताकत बढ़ाई, मनसे कमजोर होती गई. पहले 2014 में उन्होंने बीजेपी के सामने अपने उम्मीदवार खड़े नहीं किए बाद में विधानसभा में उनका सिर्फ एक उम्मीदवार जीता. और अब 2019 में भी वही कहानी दोहराई जाती दिख रही है.

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