NEWS18-IPSOS एग्जिट पोल: नांदेड़ का गढ़ बचाने में नाकामयाब हो गए हैं अशोक चव्हाण

चुनाव बाद इस सीट पर हुए NEWS18-IPSOS एग्जिट पोल के मुताबिक अशोक चव्हाण अपना गढ़ बचाने में नाकामयाब दिखाई दे रहे हैं. उन्हें शिवसेना के प्रताप चिखलीकर हराते दिखाई दे रहे हैं.

News18Hindi
Updated: May 21, 2019, 2:42 AM IST
NEWS18-IPSOS एग्जिट पोल: नांदेड़ का गढ़ बचाने में नाकामयाब हो गए हैं अशोक चव्हाण
महाराष्‍ट्र के नांदेड़ का गढ़ बचाने में असफल हो सकते हैं अशोक चव्‍हाण
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Updated: May 21, 2019, 2:42 AM IST
महाराष्ट्र की नांदेड़ लोकसभा सीट पर 18 अप्रैल को मतदान हुए थे. इस सीट को महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के वर्तमान अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण के गढ़ के रूप में पहचाना जाता है. उनके पिता शंकर राव चव्हाण भी यहां से जीतते रहे हैं. शिवसेना ने यहां से प्रताप चिखलीकर को उतारा है. चुनाव बाद इस सीट पर हुए NEWS18-IPSOS एग्जिट पोल के मुताबिक अशोक चव्हाण अपना गढ़ बचाने में नाकामयाब दिखाई दे रहे हैं. उन्हें शिवसेना के प्रताप चिखलीकर हराते दिखाई दे रहे हैं.

अन्य उम्मीदवार



शिवसेना के अलावा यहां से समाजवादी पार्टी (सपा) ने अब्दुल समद को टिकट दिया है. वहीं वंचित बहुजन आघाडी ने भिंगे यशपाल नरसिंह राव को चुनाव मैदान में उतारा है. लेकिन मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही है.

क्या है इस सीट का इतिहास

आजादी के बाद अगर 1957 के उपचुनाव को छोड़ दें तो 1977 तक यहां लगातार कांग्रेस का ही राज रहा. 1957 के उपचुनाव में यहां से शेड्यूल कास्ट फेडरेशन के हरिहर राव सोनुले जीते थे और इमरजेंसी के बाद हुए 1977 के चुनाव जयप्रकाश नारायण की चुनावी आंधी में यहां से डॉ. केशवराव ढोंढगे ने जीत दर्ज की थी. हालांकि 1980 में अशोक चव्हाण के पिता शंकर राव चव्हाण ने यह सीट कब्जा ली थी. बाद में वो यहां 1984 का चुनाव भी जीते. फिर 1986 में जब वो महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनाए गए तो उन्होंने सीट खाली कर दी.

1987 में हुए उपचुनाव में पहली बार यहां से अशोक चव्हाण जीते. फिर राजीव गांधी की सरकार के खिलाफ चली लहर में जब देश भर में वीपी सिंह की आंधी चली तो कांग्रेस को यह सीट गंवानी पड़ी. जनता दल के डॉ. वेंकटेश काबदे यहां से जीते. इसके बाद के चुनाव में कांग्रेस का इस सीट पर लगातार कब्जा रहा जब पहली बार 2004 में बीजेपी दिगंबर बापू जी पाटिल ने यहां से जीत दर्ज की.

2009 में कांग्रेस के टिकट पर बास्कर राव बापूराव खटगांवकर जीते जो शंकर राव चव्हाण के दामाद हैं. खटगांवकर ने यह सीट 1998 और 99 के चुनाव में भी जीती थी. 2014 के चुनाव में अशोक चव्हाण यहां से लड़े और ये सीट उन दो सीटों में थी जिसे कांग्रेस बचा पाई थी.
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अशोक चव्हाण के पिता की विरासत

अशोक चव्हाण के पिता शंकर राव चव्हाण की महाराष्ट्र की राजनीति में बहुत इज्जत की जाती है. वो दो बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे. राजीव गांधी की सरकार (1984-1989) में और गृह मंत्री और वित्त मंत्री जैसे अहम पदों पर रहे. 1991 से 1996 तक पीवी नरसिम्हा राव की सरकार में देश के गृह मंत्री रहे.

कौन हैं शिवसेना के प्रताप चिखलीकर

प्रताप चिखलीकर की शुरुआती राजनीति अशोक चव्हाण के पिता शंकर राव चव्हाण के सानिध्य में ही शुरू हुई थी. प्रताप को शंकर राव के बेहद करीबियों में शुमार किया जाता था. लेकिन बाद में अशोक चव्हाण के साथ उनकी तल्खियां बढ़ीं तो वो पूर्व मुख्यमंत्री विलास राव देशमुख के खेमे में चले गए. 2004 में विधायक बने प्रताप ने नांदेड़ जिले में ही प्रताप पाटिल चिखलिकर मित्र मंडल नाम का एक संगठन बनाया और कांग्रेस के खिलाफ उम्मीदरवार उतारे. बाद में प्रताप ने 2012 में एनसीपी ज्वाइन और फिर 2014 में उन्होंने शिवसेना ज्वाइन कर ली थी.

चुनावी गणित

नांदेड़ सिख धर्मस्थल के रूप में मशहूर है. यहां का सचखंड गुरुद्वारा सिख आस्था का केंद्र है. शहर की आबादी 23 लाख के आस-पास है, जिसमें करीब 60 प्रतिश से ज्यादा लोग गांवों में रहते हैं और करीब 35 प्रतिशत लोग शहरी निवासी है. यहां मराठा और दलित वोटर दोनों ही निर्णायक भूमिका में हैं. ये कांग्रेस के परंपरागत वोटर माने जाते हैं. मुस्लिम मतदाता भी सामान्य तौर पर कांग्रेस के लिए ही वोट करते हैं.

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