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सर्च ऑपरेशन बंद कराना चाहते हैं महाड के ग्रामीण, कहा- मलबे में ही करा दें मृतकों का अंतिम संस्कार

भूस्खलन के बाद मृतकों के शव निकालते NDRF के जवान  (National Disaster Response Force via AP)

भूस्खलन के बाद मृतकों के शव निकालते NDRF के जवान (National Disaster Response Force via AP)

Maharashtra Flood: महाराष्ट्र के रायगढ़ स्थित महाड तालुका के तलिये गांव में भारी बारिश के बाद मलबे से अब तक कम से कम 53 लोगों के शव निकाले जा चुके हैं 31 और लोगों के अभी भी मलबे में दबे होने की आशंका है. गांव के सरपंच कहते हैं कि ये शव सड़ चुके हैं, इसलिए उन्हें बाहर निकालना बहुत मुश्किल है.

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    रायगढ. महाराष्ट्र (Maharashtra) स्थित रायगढ (Raigadh) के महाड तालुका (Mahad) के एक गांव में भारी बारिश के बीच एक पहाड़ी के कुछ हिस्सों के ढहने से अब तक कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई. दुर्घटना के तीन दिन बाद अब अधिकारी, जनप्रतिनिधि और मृतकों के रिश्तेदार एक ऐसा फैसला करने जा रहे हैं जो उनको सारी उम्र परेशान कर सकता है. उनका कहना है कि मृतकों को मलबे के नीचे छोड़ दें और वहीं उनका अंतिम संस्कार कर दिया जाए. अधिकारियों के अनुसार रविवार को तलिये गांव से 11 शव बरामद किए गए और 31 और लोगों के अभी भी मलबे में दबे होने की आशंका है. भूस्खलन में अपने माता-पिता को खोने वाले स्थानीय निवासी किशोर पोल ने कहा, 'शवों को अब निकाला नहीं किया जाना चाहिए, उन्हें मृत घोषित कर दिया जाना चाहिए.'

    सरपंच संपत चांडेकर ने कहा, 'दरअसल, शव सड़ चुके हैं, इसलिए उन्हें बाहर निकालना बहुत मुश्किल है. उन्हें बाहर निकालते देखते हुए परिजनों को दुख होगा. यह अच्छा नहीं है. हमने रविवार दोपहर इस पर चर्चा करने के लिए एक बैठक की और मृतकों के सभी रिश्तेदारों में सहमति बन गई है.' महाड के शिवसेना विधायक भरतशेत गोगावले ने कहा, 'अब तीन दिन हो गए हैं और शव सड़ने लगे हैं. मृतकों का सम्मान होना चाहिए. ग्रामीणों और लापता लोगों के रिश्तेदार ऑपरेशन को रोकना चाहते हैं और उन्हें मृत घोषित करना चाहते हैं और दुर्घटना स्थल पर उनका अंतिम संस्कार करना चाहते हैं.'



    विधायक बोले- मैंने सरपंच से बात की
    अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार विधायक ने कहा, 'सरपंच और मैंने ग्रामीणों से बात की है और उन सभी की एक ही मांग है. किसी को आपत्ति नहीं है. हमने इस बारे में जिला कलेक्टर को अवगत करा दिया है और इस पर चर्चा की है कि इसे कैसे किया जाए. बचाव दल को भी लगता है कि किसी के भी बचने की कोई उम्मीद नहीं है.

    हालांकि, परिजन आवश्यक कागजी कार्रवाई  लेकर चिंतित हैं. किशोर पोल ने कहा, 'प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि आवश्यक कागजी कार्रवाई की जाए और मृत्यु प्रमाण पत्र दिया जाए.' अधिकारियों ने कहा कि जिला प्रशासन के लिए यह आसान फैसला नहीं है.

    कलेक्टर ने क्या कहा?
    जिला कलेक्टर निधि चौधरी ने कहा, 'स्थानीय निवासी और पीड़ितों के रिश्तेदार मांग कर रहे हैं कि प्रशासन ऑपरेशन को बंद कर दे और लापता लोगों को मृत घोषित कर दे. हालांकि, जिले की आपदा प्रबंधन टीम के आखिरी लापता व्यक्ति के मिलने तक ऑपरेशन को अंजाम देने की उम्मीद है. कुछ दिनों के बाद भी पीड़ितों के जीवित पाए जाने की संभावना है.'

    चौधरी ने कहा, 'मैंने यह समझाने की कोशिश की कि आखिरी लापता व्यक्ति के मिलने तक हम ऑपरेशन जारी रखेंगे और यह हमारी नीति है. लेकिन उन्होंने बता दिया है कि वे चाहते हैं कि ऑपरेशन बंद कर दिया जाए. हम ग्रामीणों की इच्छाओं का अनादर नहीं करना चाहते और उनकी भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाना चाहते हैं.'

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