महाराष्‍ट्र में इस बार नवरात्रि पर नहीं होगा गरबा-डांडिया, करने होंगे ये काम

इस बार नहीं है गरबा और डांडिया की अनुमति. (Pic- Social Media)
इस बार नहीं है गरबा और डांडिया की अनुमति. (Pic- Social Media)

महाराष्‍ट्र सरकार (Maharashtra) ने 16 बिंदुओं का सर्कुलर जारी करके जानकारी दी है कि नवरात्रि (Navratri), दुर्गापूजा और दशहरा जैसे त्‍योहारों को बेहद सरल तरीके से मनाए जाने की जरूरत है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 30, 2020, 8:28 AM IST
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मुंबई. कोरोना वायरस (Coronavirus) के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए महाराष्‍ट्र सरकार (Maharashtra) ने इस बार नवरात्रि (Navratri 2020) के दौरान राज्‍य में होने वाले गरबा और डांडिया समेत अन्‍य सांस्‍कृतिक कार्यक्रमों पर रोक लगा दी है. नवरात्रि को 20 दिनों से भी कम का समय बचा है. साथ ही महाराष्‍ट्र में कोरोना वायरस संक्रमण की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है. राज्‍य सरकार ने 16 बिंदुओं का सर्कुलर जारी करके जानकारी दी है कि नवरात्रि, दुर्गापूजा और दशहरा जैसे त्‍योहारों को बेहद सरल तरीके से मनाए जाने की जरूरत है. इस साल नवरात्रि 17 अक्‍टूबर को शुरू हो रही है. औश्र दशहरा 25 अक्‍टूबर को पड़ेगा.

सरकार द्वारा जारी किए गए दिशानिर्देश के अनुसार भीड़ को आकर्षित करने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करने वालों को सरकार ने सलाह दी है कि वे इन आयोजनों की जगह स्‍वास्‍थ्‍य संबंध कैंप जैसे आयोजन करें. जैसे वे ब्‍लड डोनेशन कैंप लगा सकते हैं. मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी के अनुसार सरकार के 'माजे कुतुम्ब मजी जजबाबदरी (मेरा परिवार, मेरी जिम्मेदारी)’ पहल को प्रचारित किया जाना चाहिए. इसके अलावा कोरोना वायरस, मलेरिया और डेंगू के खिलाफ भी सावधानी बरतने की जरूरत है.

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गरबा आयोजनों पर प्रतिबंध लगाने पर, कोरा केंद्र डांडिया के संयोजक गणेश नायडू ने कहा, 'हम दिशानिर्देशों का पालन करने के लिए तैयार हैं, लेकिन बेहतर होता कि सरकार हमें विश्वास में लेती. आईपीएल (इंडियन प्रीमियर लीग) की तरह, हम मैदान से परफॉर्मेंस का प्रसारण करना प्रस्‍तावित कर सकते थे. कम से कम इससे कलाकारों को मदद मिलती. लेकिन मौजूदा दिशानिर्देश उस पहलू पर स्पष्ट नहीं हैं.'
नवरात्रि और दुर्गा पूजा के लिए सरकार ने प्लास्टर ऑफ पेरिस या मिट्टी से बनी पारंपरिक मूर्तियों के बजाय धातु से बनी मूर्तियों का इस्‍तेमाल करने की सलाह दी है. ऐसे मामलों में जहां धातु-आधारित मूर्तियों का उपयोग नहीं किया जाता है, वहां लोगों से पर्यावरण के अनुकूल आधारित मूर्तियों की पूजा करने का आग्रह किया गया है. जिन्हें घर या कृत्रिम विसर्जन टैंकों में विसर्जित किया जा सकता है.

मंडलों के लिए 4 फीट और घर की पूजा के लिए मूर्ति की ऊंचाई 2 फीट निर्धारित की गई है. मूर्ति के आगमन या दर्शन के लिए कोई जुलूस नहीं निकाला जाना चाहिए. राज्‍य सरकार ने साफ कहा है कि कंटेनमेंट जोन में आयोजनों की अनुमति नहीं दी जा सकती. सरकार ने भजन, आरती और कीर्तन कार्यक्रमों में भीड़ से बचने पर जोर दिय. कहा गया है कि जहां तक ​​संभव हो 'देवी दर्शन' और अन्य आयोजनों के प्रसारण के लिए ऑनलाइन माध्यम और केबल नेटवर्क का उपयोग किया जाना चाहिए.
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