कोरेगांव-भीमा हिंसा मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर सकती है महाराष्ट्र सरकार

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस के एम जोसेफ की पीठ ने कहा था कि वह आरोपियों के खिलाफ ‘आरोपों’ को देखना चाहती है.

News18Hindi
Updated: December 8, 2018, 1:20 AM IST
कोरेगांव-भीमा हिंसा मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर सकती है महाराष्ट्र सरकार
महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस की फाइल फोटो-PTI
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Updated: December 8, 2018, 1:20 AM IST
महाराष्ट्र कोरेगांव भीमा हिंसा मामले में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के खिलाफ राज्य स्थित पुणे की एक अदालत में दाखिल की गई चार्जशीट को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महाराष्ट्र सरकार को कोरेगांव-भीमा हिंसा मामले में गिरफ्तार मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुणे की एक अदालत में दाखिल आरोपपत्र उसके समक्ष पेश करने का निर्देश दिया था.

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस के एम जोसेफ की पीठ ने कहा था कि वह आरोपियों के खिलाफ 'आरोपों' को देखना चाहती है. पीठ ने महाराष्ट्र सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी को पुणे की विशेष अदालत में राज्य पुलिस द्वारा दाखिल आरोपपत्र आठ दिसंबर तक उसके समक्ष पेश करने का निर्देश दिया था.

सोमवार को पीठ बंबई हाईकोर्ट के एक आदेश के खिलाफ राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई कर रही थी. हाईकोर्ट ने मामले में जांच रिपोर्ट दाखिल करने के लिए 90 दिन की समय सीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया था. पीठ ने अब अगली सुनवाई के लिए 11 दिसंबर की तारीख तय की है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने बंबई हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी.

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बंबई हाईकोर्ट ने निचली अदालत के उस आदेश को खारिज कर दिया था जिसमें पुलिस को आरोपियों के खिलाफ जांच रिपोर्ट दायर करने के लिये अतिरिक्त समय दिया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले महाराष्ट्र पुलिस द्वारा कोरेगांव-भीमा हिंसा के सिलसिले में गिरफ्तार किये गए पांच कार्यकर्ताओं के मामले में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया था और उनकी गिरफ्तारी के मामले में एसआईटी की नियुक्ति से इनकार कर दिया था.

पुणे पुलिस ने माओवादियों के साथ कथित संपर्कों को लेकर वकील सुरेंद्र गाडलिंग, नागपुर विश्वविद्यालय की प्रोफेसर शोमा सेन, दलित कार्यकर्ता सुधीर धवले, कार्यकर्ता महेश राउत और केरल निवासी रोना विल्सन को जून में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया था. पुणे में पिछले साल 31 दिसंबर को एलगार परिषद सम्मेलन के सिलसिले में इन कार्यकर्ताओं के दफ्तरों और घरों पर छापेमारी के बाद यह गिरफ्तारी हुई थी. पुलिस का दावा था कि इसकी वजह से अगले दिन भीमा-कोरेगांव हिंसा हुई. (एजेंसी इनपुट के साथ)

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