कांग्रेस नेता अशोक चव्हाण ने की नितिन गडकरी की तारीफ, बोले- सही आदमी गलत पार्टी में

चव्हाण ने ये बातें मोदी सरकार के 7 साल पूरे होने पर आयोजित के एक वर्चुअल प्रेस कॉन्फेंस में कही.

चव्हाण ने ये बातें मोदी सरकार के 7 साल पूरे होने पर आयोजित के एक वर्चुअल प्रेस कॉन्फेंस में कही.

कांग्रेस नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री अशोक चव्हाण (Ashok Chavan) ने कहा कि नागपुर के सांसद नितिन गडकरी के बारे में अच्छे शब्द कहे जा सकते हैं. अलग विचारधारा के बावजूद वो दूसरे दलों के साथ बातचीत करते रहते हैं. वो गलत पार्टी में सही व्यक्ति हैं.

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मुंबई. महाराष्ट्र सरकार के मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक चव्हाण  (Ashok Chavan) ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) की जमकर तारीफ की है. उन्होंने कहा है कि गडकरी एक अच्छे आदमी हैं, लेकिन वो गलत पार्टी में फंस गए हैं. चव्हाण ने ये बातें मोदी सरकार के 7 साल पूरे होने पर आयोजित के एक वर्चुअल प्रेस कॉन्फेंस में कही. उन्होंने इस मौके पर मोदी सरकार की जम कर आलोचना भी की. चव्हाण ने कहा कि सरकार कोरना महामामारी से निपटने में पूरी तरह नाकाम रही. साथ ही उन्होंने कहा कि महामारी के चलते 12.21 करोड़ नौकरियां खत्म हो गई.

प्रेस कॉन्फेंस में जब अशोक चव्हाण से पूछा गया कि क्या मोदी सरकार में उनका कोई पसंदीदा मंत्री भी है? तो इस सवाल के जवाब में उन्होंने नितिन गडकरी का नाम लिया. अशोक चव्हाण ने कहा, 'केंद्रीय मंत्री और नागपुर के सांसद नितिन गडकरी के बारे में अच्छे शब्द कहे जा सकते हैं. अलग विचारधारा के बावजूद वो दूसरे दलों के साथ बातचीत करते रहते हैं. वो गलत पार्टी में सही व्यक्ति हैं. उनका महाराष्ट्र के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण है, लेकिन उनकी ताकतों को लगातार कम किया जा रहा है.'

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चव्हाण ने कहा कि केंद्र ने सभी फैसले लेने की शक्तियां अपने हाथों में रख ली हैं, लेकिन अब कोरोना के प्रकोप के बाद राज्य सरकारों पर दोष मढ़ रही है. उन्होंने आगे कहा, ' पेट्रोल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है. करीब 12.21 करोड़ लोगों ने अपनी नौकरी खो दी है. बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति आय अब भारत की तुलना में ज्यादा है. केंद्र की नीतियों ने देश को तबाह कर दिया है.'


अशोक चव्हाण ने मराठा आरक्षण के मुद्दे पर भी बीजेपी पर हमला किया. उन्होंने केंद्र से इसका समाधान तलाशने को कहा. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 5 मई को समुदाय को नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण देने वाले राज्य के कानून को रद्द कर दिया है.

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