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Maharashtra Rain: महाराष्ट्र में बारिश का खौफनाक मंजर, पानी में समा गया पूरा का पूरा गांव

कोयना और कोलतेवाड़ी डैम से पानी छोड़ने के चलते रत्नागिरी के चिपलून और खेड़ कस्बा पूरी तरह जलमग्न हो गया है. (फोटो- AP)

कोयना और कोलतेवाड़ी डैम से पानी छोड़ने के चलते रत्नागिरी के चिपलून और खेड़ कस्बा पूरी तरह जलमग्न हो गया है. (फोटो- AP)

Maharashtra Rain: राज्य में कम से कम 1,35,313 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया गया है जिनमें पश्चिमी महाराष्ट्र के सांगली जिले के 78,111 और कोल्हापुर जिले में 40,882 लोग शामिल है. एक तरफ जहां बाढ़ से प्रभावित चिपलुन, खेड और महाड जैसे शहरों के लोग इस आपदा से उबरने का प्रयास कर रहे हैं.

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    मुंबई.  महाराष्ट्र में भारी बारिश (Maharashtra Rain) के चलते हर तरफ तबाही का मंज़र है. भूस्खलन और बाढ़ के कारण रायगढ़ ज़िले का तलिये गांव सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है. यहां के करीब 50 गांव या तो पहाड़ों में दब गए हैं या फिर पानी में बह गए हैं. पिछले तीन दिनों से यहां हो रही खरतनाक बारिश के चलते इस गांव के कम से कम 42 लोगों की मौत हो गई है. जबकि अब भी 39 लोग लापता हैं. इसके अलावा 6 लोग अस्पताल में ज़िंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं.

    पूरे राज्य में अब तक कम से कम 112 लोगों की मौत हो चुकी है. रायगढ़, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, सतारा, सांगली, कोल्हापुर, मुंबई र, पुणे और ठाणे सबसे ज्यादा प्रभावित हुए. एक सरकारी बयान में कहा गया है कि 59 लोग अब भी लापता हैं, जबकि 38 घायल हैं. बचाव दल ने अब तक 90,000 लोगों को निकाला है और रत्नागिरी में छह राहत शिविर खोले गए हैं.



    नहीं हो पा रहा है दाह संस्कार
    कोयना और कोलतेवाड़ी डैम से पानी छोड़ने के चलते रत्नागिरी के चिपलून और खेड़ कस्बा पूरी तरह जलमग्न हो गया है. सेलफोन नेटवर्क ठप है और कई इलाकों में अभी भी बिजली नहीं है. हालांकि जलस्तर कम होने लगा है. तलिये गांव में अब भी लोगों की तलाश जारी है. इस गांव में करीब 242 लोग रहते हैं. इसमें से आधी आबादी काम के लिए पलायन करती है. सूखी लकड़ी के अभाव में दाह संस्कार मुश्किल हो रहा है. लिहाजा शुक्रवार को बरामद 33 लोगों के शवों को दफनाना पड़ा.

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    सरकार पर लापरवाही का आरोप
    अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत करते हुए यहां के लोगों ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, ' घटना के 24-36 घंटे बाद अधिकारी पहुंचे.अगर तुरंत रेस्क्यू शुरू किया जाता तो हताहतों की संख्या कम होती. कई बचे लोग शुक्रवार रात तक भोजन और पानी के बिना थे. बाद में उन्हें कुछ नाश्ता उपलब्ध कराया गया था.'

    हर तरफ लोग जान बचाने के लिए चिल्ला रहे थे
    बबन सकपाल गुरुवार शाम अपने तीन बेटों के साथ पास की पहाड़ी का एक हिस्सा फिसलने के बाद सही समय से बाहर भाग गए. उन्होंने कहा कि उनके दो घर पूरी तरह से उजड़ गए हैं. उन्होंने बताया, 'भारी बारिश हो रही थी और मैं शाम 5 बजे के आसपास लोगों के चिल्लाने की आवाज सुनकर बाहर आया. मैंने पहाड़ी को टूटते हुए देखा और मैंने तुरंत अपने बेटों को बाहर आने को कहा.' सकपाल ने कहा कि वे दो दिनों से भोजन और पानी के लिए संघर्ष कर रहे थे, 24 घंटे से अधिक समय से कोई अधिकारी उन तक नहीं पहुंचा.

    परिवार के 6 लोगों की मौत
    भूस्खलन के समय काम पर होने के चलते विजय पांडे खुद तो बच गए. लेकिन उन्होंने पांच महीने के बेटे, 10 साल की बेटी, उनकी पत्नी, माता-पिता और बहन सहित छह लोगों के अपने पूरे परिवार को खो दिया. पांडे की भाभी करिश्मा कोंडलकर ने कहा, 'मैंने गुरुवार सुबह अपनी बहन रेशमा से बात की और उसने मुझे बताया कि बहुत बारिश हो रही है. दोपहर में, उसने एक दूसरे रिश्तेदार को कॉल किया जो पुणे में रहता है और उन्हें बताया कि बारिश के पानी के कारण मिट्टी फिसल रही है. फिर वह चिल्लाई और कहा कि पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा गिर गया है. उसके बाद फोन कट गया और हम उनमें से किसी तक भी नहीं पहुंच सके.'

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