महाराष्ट्र में फिर भड़की मराठा आरक्षण की चिंगारी, आज राज्यव्यापी बंद का ऐलान

मराठा आरक्षण को लेकर आज महाराष्ट्र में बंद का आह्वान किया गया है.
मराठा आरक्षण को लेकर आज महाराष्ट्र में बंद का आह्वान किया गया है.

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने 9 सितंबर को मराठियों के लिए राज्य में शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण (Reservation) की व्यवस्था करने संबंधी कानून के अमल पर रोक लगा दी थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 10, 2020, 1:23 PM IST
  • Share this:
मुंबई. महाराष्ट्र (Maharashtra) में मराठा आरक्षण (Maratha Reservation) की चिंगारी एक बार फिर उठने लगी है. मराठा आरक्षण को लेकर कई मराठा संगठनों ने आज पूरे राज्य में बंद का आह्वान किया है. बंद का समर्थन कर रहे मराठा संगठनों ने उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) सरकार से नौकरी और शिक्षा में मराठियों को आरक्षण (Reservation) देने की मांग की है.

बता दें​​ कि सुप्रीम कोर्ट ने 9 सितंबर को दिए अपने फैसले में कहा था कि महाराष्ट्र की 30 फीसदी आबादी मराठा है और इसकी तुलना सुदूर गांवों के हाशिए पर पड़े तबके के साथ नहीं की जा सकती. न्यायालय ने मराठा समुदाय के लिए राज्य में शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था करने संबंधी कानून के अमल पर रोक लगा दी थी.





बता दें कि महाराष्ट्र सरकार ने साल 2018 में सामाजिक और आर्थिक तौर पर पिछड़े वर्गों के लिए यह आरक्षण कानून बनाया था. जस्टिस एल नागेश्वर राव की तीन जजों की पीठ ने यह मामला कॉन्स्टीट्यूशन बेंच को सौंप दिया है. अब चीफ जस्टिस एसए बोबडे इसकी सुनवाई के लिए नई बेंच का गठन करेंगे. यह आरक्षण 30 नवंबर 2018 को महाराष्ट्र सरकार द्वारा मराठा समुदाय को दिया था, जो 16% आरक्षित था. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद विभिन्न मराठा संगठन अब राज्य सरकार पर कोर्ट के स्टे हटाने का दबाव बना रहे हैं.
इसे भी पढ़ें :- महाराष्ट्र में 30 फीसदी हैं मराठा, इन्हें हाशिए पर पड़ा समुदाय नहीं मान सकते: SC 

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धठ ठाकरे ने पहले ही प्रदर्शनकारियों से कहा है कि राज्य सरकार आरक्षण के मुद्दे पर फिर से सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी. मराठा महासंघ के नेता राजेंद्र कोंधारे ने कहा है कि सरकार हमें ईडब्ल्यूएस कोटे के तहत लाना चाहती है लेकिन राज्य सरकार के फैसले को हम मानने को तैयार नहीं हैं क्योंकि इससे किसी भी उद्देश्य की पूर्ति नहीं होती है. हमारी तात्कालिक मांग यह है कि राज्य सरकार को हमारे युवाओं के हितों की रक्षा करना चाहिए और एसईबीसी आरक्षण के तरहत शिक्षा और नौकरी में मराठा समाज के युवाओं को जगह मिलनी चाहिए.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज