COVID-19 in India: कोरोना से देश में रोजाना हो रही एक हजार से अधिक मौतें, महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा मृतक

देश में कोरोना से होने वाली मौत का आंकड़ा एक लाख को पार कर गया है.
देश में कोरोना से होने वाली मौत का आंकड़ा एक लाख को पार कर गया है.

देश में पिछले महीने कोरोना वायरस (Coronavirus) से मरने वालों (Corona Death) की संख्या हर दिन 1000 रिकॉर्ड की गई थी. सिर्फ एक दिन ऐसा था, जिसमें 776 मौतें रिपोर्ट हुई हैं. पिछले महीने 33,390 मौतें रिकॉर्ड हुईं जो कुल आंकड़ों का एक तिहाई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 4, 2020, 10:23 PM IST
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नई दिल्ली. पिछले बुधवार को कर्नाटक (Karnataka) के दावणगेरे शहर के 84 वर्षीय निवासी दारुर कट्टीमनी धर्मान्ना अपने काम से कहीं जा रहे थे. रास्ते में उन्हें कोविड-19 (Covid-19) के पहले लक्षण दिखे. धर्मान्ना को हल्का जुकाम, बुखार और पेट में दर्द का अनुभव हुआ. उनको शहर में बापूजी अस्पताल में भर्ती कराया गया. शुरुआती उपचार के बाद भी उनका ऑक्सीजन का स्तर तेजी से नीचे जाने लगा और उनके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया. अस्पताल में 6 दिन रहने के बाद आखिरकार 28 सितंबर को उन्होंने दम तोड़ दिया.

धर्मन्ना के पोते गौड़ किरण कुमार ने कहा कि उनकी दादी दरुर रजम्मा जो 76 वर्ष की है उनकी कोरोना रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई थी लेकिन उनमें लक्षण नहीं दिखे. दादा और दादी दोनों उनके मामा और उनकी पत्नी के साथ रहते थे जो एक स्वास्थ्य अधिकारी हैं. दादा-दादी को संक्रमण होने से पहले वह खुद क्वारंटीन हुईं थीं. किरण कुमार ने कहा कि मेरे 84 वर्षीय दादा फिट थे और उन्हें अन्य किसी भी तरह की बीमारी नहीं थी. हमने उम्मीद की थी कि वह आराम से 100 साल तक जिंदा रहेंगे. यह बुरा और जागने का समय है. हमने निरंतर अलर्ट रहना शुरू नहीं किया तो कई घरों में अपने बड़े लोगों को खो देंगे.





देश में पिछले महीने कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या हर दिन 1000 रिकॉर्ड की गई थी. सिर्फ एक दिन ऐसा था, जिसमें 776 मौतें रिपोर्ट हुई हैं. पिछले महीने 33,390 मौतें रिकॉर्ड हुईं जो कुल आंकड़ों का एक तिहाई है. कोरोना वायरस से मरने वालों और इससे जुड़ी बातों पर भारत में पिछले 9 महीनों में गर्म बहस हुई है. डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों ने विभिन्न तरीकों से इस बीमारी की चपेट में आने वालों के लिए मौत का कारण बताया है. कुछ राज्यों में मौत के आंकड़ों की रिपोर्टिंग नहीं करने की बात भी सामने आई है.


भारत में अब दुनियाभर में सबसे ज्यादा कोरोना केस आ रहे सामने

कोरोना वायरस के मामलों में अमेरिका के बाद भारत दूसरे स्थान पर है. इसके अलावा हर दिन आने वाले मामलों में भी भारत अब पहले नंबर पर है. देश में कम मृत्यु दर इसे उच्च संचयी और क्षमता वाले देशों की लिस्ट में खड़ा कर देती है. गुरुवार को भारत में मृत्यु दर 1.56 थी. विशेषज्ञों का मानना है कि संक्रमण का घातक अनुपात और भी कम हो सकता है. संक्रमण और मृत्यु दर पर विज्ञान की गतिशीलता की अनुपस्थिति है. इसमें कम मृत्यु दर के पीछे के कारणों की जानकारी नहीं है. हालांकि विशेषज्ञों ने कुछ प्रशंसनीय स्पष्टीकरण प्रस्तूत किए हैं. भारत के पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन थिंक टैंक के महामारीविद डॉक्टर गिरिधर आर बाबू ने कहा है कि कम मृत्यु दर पूरे दक्षिण एशिया क्षेत्र में देखी गई है लेकिन भौगोलिक क्षेत्र ने भारत के लिए एक अहम भूमिका अदा की है. भारतीयों की युवा उम्र भी इसमें मुख्य कारण माना गया है.

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भारत में कैसे तय किया जाता है मौत का आंकड़ा
नए संक्रामक रोग के आने के साथ, राज्य स्वास्थ्य विभाग और केंद्र सरकार को कोविड 19 के कारण होने वाली मौतों को सही और पर्याप्त रूप से पकड़ने के लिए एक नए प्रोटोकॉल का पालन करना महत्वपूर्ण है. भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने भारत में कोविड-19 से संबंधित मौतों को दर्ज करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश तैयार किए हैं. दिशानिर्देशों में कहा गया था कि अस्थमा और मधुमेह जैसी स्थितियों को मृत्यु का अंतर्निहित कारण नहीं माना जाता क्योंकि वे सीधे कोविड 19 से मृत्यु का कारण नहीं हो सकते. यह भी कहा गया कि हार्ट अटैक को भी मौत का कारण नहीं माना जा सकता.

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महाराष्ट्र सरकार ने बदले नियम
महाराष्ट्र सरकार द्वारा मौतों के ऑडिट के लिए गठित पैनल के डॉक्टर अविनाश सुपे ने कहा कि अप्रैल और मई में मौतों के संबंध में कुछ मुद्दों को ठीक करके मौतों के डाटा का मिलान किया गया. किसी भी पॉजिटिव की मौत आत्महत्या या जलने के अलावा हुई है, उसे काविड 19 के कारण मृत माना जाता है. एक वृद्ध चिकित्सक जेकब जॉन ने कहा है कि सामान्य परिस्थितियों में भी हमारे पास बीमारी की घटनाओं को पकड़ने की खराब व्यवस्था है. अब हम कोरोना वायरस से हुई मौतों की गिनती कर रहे हैं लेकिन पहले के राष्ट्रीय सर्वे में कोरोना वायरस के मामले में 80-120 रेशियो में छूटे हैं.

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अन्य बीमारियां भी कोरोना से हो रही मौत का बन रहीं कारण
महाराष्ट्र में देश के सबसे अधिक कोरोना मामले देखे गए हैं. यहां 13 लाख से ज्यादा मामले और 36662 मौतें हुई हैं. राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने संक्रमण को देखते हुूए कई सबक सीखे हैं. डॉक्टर सुपे ने बताया कि महारष्ट्र में मुंबई और पुणे से अन्य जगहों पर संक्रमण फ़ैल गया और वे इस बीमारी के प्रारंभिक रहस्य को भी महसूस करते हैं. शुरुआत में कोरोना का पता देरी से चलने और अस्पताल में भर्ती प्रक्रिया में देरी के कारण मृत्यु दर ज्यादा थी. उस क्षेत्र में सुधार जरूर हुआ है लेकिन महामारी का कलंक अभी भी बना हुआ है. डॉक्टर सुपे ने यह भी कहा कि साथ में अन्य बीमारियां मृत्यु में बड़ी भूमिका निभा रही है.
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