लॉकडाउन में भूख से न मर जाएं पक्षी, इसलिए रोज दाना-पानी की व्यवस्था करती हैं ये जूलॉजिस्ट
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लॉकडाउन में भूख से न मर जाएं पक्षी, इसलिए रोज दाना-पानी की व्यवस्था करती हैं ये जूलॉजिस्ट
महाराष्ट्र के थाने जिले में एक जूलॉजिस्ट लॉकडाउन के दौरान पक्षियों को मौत से बचा रही हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

महाराष्ट्र के थाने जिले के चांदीबाई हिम्मतमल मनसुखानी कॉलेज कैंपस में सिर्फ दो दिनों के भीतर करीब 30 पक्षियों की मौत हो गई थी. घटना के बाद कॉलेज की पूर्व टीचर और जूलॉजिस्ट (Zoologist) सरिता खानचंदानी (Sarita Khanchandani) हजारों पक्षियों के दाना-पानी की व्यवस्था कर रही हैं.

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  • Last Updated: June 22, 2020, 10:12 AM IST
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मुंबई. कोविड-19 (Covid-19) की वजह से 24 मार्च से भारत में शुरू हुए लॉकडाउन (Lockdown) की कीमत सिर्फ इंसानों ने नहीं चुकाई है. जानवर और पक्षी भी इससे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. देशभर में पशु-पक्षी भूखों मरने को मजबूर हुए हैं. इसी तरह अप्रैल के शुरुआती सप्ताह में महाराष्ट्र के थाने जिले के चांदीबाई हिम्मतमल मनसुखानी कॉलेज कैंपस में सिर्फ दो दिनों के भीतर करीब 30 पक्षियों की मौत हो गई थी. एकाएक इस घटना से कॉलेज प्रशासन चिंतित हुआ.

इस घटना की जानकारी मिलने पर कॉलेज की पूर्व टीचर और जूलॉजिस्ट सरिता खानचंदानी से कॉलेज प्रिंसिपल से संपर्क साधा. इसके बाद लगातार इन पक्षियों के दाना-पानी की व्यवस्था सरिता ही कर रही हैं. करीब दो महीने से इस काम में लगी सरिता ने कॉलेज में मौजूद हजारों पक्षियों की जान बचाई है.

कॉलेज कैंटीन बंद होने से शुरू हुई परेशानियां
हिंदुस्तान टाइम्स पर प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक कॉलेज की प्रिंसिपल मंजू पाठक का कहना है कि लॉकडाउन के पहले तक कॉलेज की कैंटीन से बचे खाने को बाहर डाल दिया जाता था और पक्षी आकर वहां आकर खा लेते थे. लेकिन एकाएक हुए लॉकडाउन की वजह से ये प्रक्रिया टूट गई. जब एक साथ कई पक्षियों की मौत हुई तो हम लोग चिंतित हो गए. एक पक्षी का पोस्टमॉर्टम करने वाले वेटनरी डॉक्टर ने बताया कि इनकी मौत भूख और प्यास की वजह से हो रही है. लेकिन इसके बाद सरिता ने जिम्मेदारी संभाली और बीते दो महीनों के दौरान सिर्फ एक पक्षी की मौत हुई है.
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'उनके लिए काम करना है जो अपनी आवाज नहीं उठा सकते'
हालांकि सरिता अब भी उन पक्षियों की मौत पर चिंतित हैं. प्राणी विज्ञान की स्कॉलर सरिता का कहना है कि मैं उन प्रजातियों के लिए ज्यादा काम करना चाहती हूं जो अपनी आवाज नहीं उठा सकते. हम पक्षियों और जानवरों की भाषा नहीं समझते लेकिन मुश्किल में तो वो भी होते हैं.

सैंकड़ों जगहों पर की दाना-पानी की व्यवस्था
सरिता ने पक्षियों को खाना खिलाने के लिए कॉलेज कैंपस में 541 जगहों पर व्यवस्था की. उन्होंने प्लास्टिक की थालियों और बोतलों को काटकर पानी पीने की व्यवस्था करवाई जिससे पक्षी भूखे-प्यासे न मरें. उन्होंने कहा कि ये कठिन काम नहीं था लेकिन ऐसा करने से हजारों पक्षियों के रोज दाना-पानी की व्यवस्था हो गई. कॉलेज प्रिंसिपल मंजू पाठक का कहना है कि सरिता के काम ने हमें याद दिलाया है कि अपनी डेली लाइफ में हमें उनके बारे में भी सोचना चाहिए जो अपनी बात नहीं कह सकते.
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