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आरे कॉलोनी में पेड़ काटने पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, हिरासत में लिए गए सभी लोगों को छोड़ने का आदेश

News18Hindi
Updated: October 7, 2019, 11:31 AM IST
आरे कॉलोनी में पेड़ काटने पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, हिरासत में लिए गए सभी लोगों को छोड़ने का आदेश
आरे कॉलोनी में जंगल की कटाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई.

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई (Mumbai) के आरे कॉलोनी (Aarey Colony) में पेड़ों की कटाई पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है. अब इस मामले पर 21 अक्टूबर को अलगी सुनवाई होगी.

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  • Last Updated: October 7, 2019, 11:31 AM IST
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नई दिल्ली. देश की आर्थिक राजधानी मुंबई (Mumbai) के आरे कॉलोनी (Aarey Colony) में पेड़ों की कटाई पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है. अब इस मामले पर 21 अक्टूबर को अलगी सुनवाई होगी. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद महाराष्ट्र सरकार का पक्ष रख रहे तुषार मेहता ने कहा कि अब सरकार कोई पेड़ नहीं काटेगी. जस्टिस मिश्रा ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार रिपोर्ट दे और कोर्ट को बताए कि अबतक आरे में कितने पेड़ काटे गए हैं?

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को आदेश दिया कि आरे में पेड़ों की कटाई का विरोध कर रहे जिन लोगों को हिरासत में लिया गया था, उन्हें तुरंत रिहा किया जाए. इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को भी इस केस में एक पार्टी के तौर पर शामिल किया जाए.

क्या आरे जंगल या इको सेंसेटिव जोन था?
मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से पूछा कि क्या आपके पास इस बात का सबूत हैं कि आरे पहले जंगल या इको सेंसेटिव जोन में आता था और अगर ऐसा था तो क्या सरकार ने इसे बदला? कोर्ट ने कार्यकर्ताओं से कहा कि इसके लिए आप हमें प्रोपर डॉक्यूमेंट दिखाएं, मीडिया रिपोर्ट नहीं. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता महाराष्ट्र सरकार की ओर से अपना पक्ष रख रहे हैं. जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस अशोक भूषण की स्पेशल बेंच मामले पर सुनवाई की.


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बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई थी पेड़ों की कटाई
कानून की पढ़ाई करने वाले की ओर से पेड़ों को काटने के विरोध में लिखे पत्र को सुप्रीम कोर्ट ने जनहित याचिका के तौर पर स्वीकार कर लिया था. इसके साथ ही मामले पर सुनवाई के लिए भी राजी हो गया. रविवार को ही कोर्ट ने स्पेशल बेंच का गठन भी कर दिया था. मेट्रो कार शेड बनाने के लिए आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई की जा रही है. बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद बीएमसी ने पेड़ों की कटाई शुरू की थी.

कानून के छात्र की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने माना PIL
कानून की पढ़ाई कर रहे ऋषभ रंजन की ओर से पेड़ों की कटाई रोकने के लिए लिखे गए पत्र को सुप्रीम कोर्ट ने जनहित याचिका (PIL) के तौर पर स्वीकार कर लिया है. याचिकाकर्ता का कहना है कि सरकार बहुत जल्दाबाजी में यह फैसला ले रही है. आरे में कुल 2,700 पेड़ काटे जाने की योजना है. कहा जा रहा है कि इसमें से ज्यादातर पेड़ों को गिरा दिया गया है.

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First published: October 7, 2019, 10:25 AM IST
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