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सिंचाई घोटाला मामले में एसीबी ने NCP नेता अजित पवार को दी क्लीन चिट

भाषा
Updated: December 6, 2019, 10:26 PM IST
सिंचाई घोटाला मामले में एसीबी ने NCP नेता अजित पवार को दी क्लीन चिट
अजित पवार पर आरोप लगाए गए थ‍े कि उन्होंने बढ़े हुए मूल्यों पर परियोजनाओं को मंजूरी दी थी. (फाइल फोटो)

एसीबी (ACB,) अधिकारियों ने कहा कि, सिंचाई घोटाले से जुड़े ऐसे किसी भी मामले को बंद नहीं किया गया है जिनमें कथित तौर पर अजित पवार (Ajit Pawar) का नाम है.

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नागपुर. महाराष्ट्र के भ्रष्टाचार निरोधी ब्यूरो/एसीबी (ACB) ने राकांपा नेता एवं पूर्व उप मुख्यमंत्री अजित पवार (Ajit Pawar) को विदर्भ सिंचाई घोटाला (Vidarbha Irrigation Scam) मामले में क्लीन चिट दे दी है. एसीबी ने बंबई हाईकोर्ट की नागपुर पीठ में दायर किए गए अपने हलफनामे में विदर्भ क्षेत्र में सिंचाई परियोजनाओं में कथित अनियमितताओं के मामलों में पवार की संलिप्तता से इनकार किया है. शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस की महा विकास आघाडी (एमवीए) सरकार के 28 नवंबर को शपथ ग्रहण से एक दिन पहले 27 नवंबर को हलफनामा पेश किया गया था.

अदालत ने इन मामलों में एसीबी को पूर्व जल संसाधन विकास मंत्री अजित पवार की भूमिका पर अपना पक्ष रखने को कहा था. पुणे जिले के बारामती से राकांपा विधायक पवार महाराष्ट्र में कांग्रेस-राकांपा गठबंधन की सरकार में 1999-2009 के दौरान जल संसाधन विकास मंत्री थे. पवार, विदर्भ सिंचाई विकास निगम (वीआईडीसी) के अध्यक्ष पद पर भी सेवाएं दे चुके हैं.

एजेंसियों की गलतियों के लिए मंत्री को नहीं ठहराया जा सकता जिम्मेदार
वीआईडीसी ने उन सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी दी थी जिनमें कथित अनियमितताएं दर्ज की गई थीं. हलफनामे के अनुसार कि निविदाओं का निष्पादन कराने वाली एजेंसियों, उनसे जुड़े इन परियोजनाओं के इंजीनियर, खंड लेखाकार और ठेकेदारों की तरफ से खामियां थीं. हलफनामे में कहा गया है, ‘निष्पादन एजेंसियों की गलतियों के लिए वीआईडीसी के अध्यक्ष/जल संसाधन विभाग के मंत्री (डब्ल्यूआरडी) को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है क्योंकि कानूनन उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं है.’

एसीबी बंद कर चुकी है 9 सिंचाई प्रोजेक्ट्स में अनियमितताओं की जांच
एसीबी 2012 में बंबई हाईकोर्ट की नागपुर पीठ के समक्ष दायर दो जनहित याचिकाओं के तहत वीआईडीसी की 45 परियोजनाओं से जुड़ी कुल 2,654 निविदाओं के बारे में पूछताछ कर रही है. महाराष्ट्र के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने 25 नवंबर को बताया कि उसने राज्य की नौ सिंचाई परियोजनाओं में कथित अनियमितताओं की जांच बंद कर दी है. एजेंसी ने इसके साथ ही स्पष्ट किया था कि ये मामले अजित पवार से जुड़े हुए नहीं हैं.

एसीबी ने पेश की जांच रिपोर्टएसीबी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने 27 नवंबर के हलफनामे के बारे में कहा कि अदालत ने एजेंसी को 28 नवंबर से पहले वीआईडीसी घोटाले पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा था. उन्होंने बताया कि एसीबी ने वीआईडीसी मामलों की जांच बंद नहीं की है. उन्होंने कहा, ‘हमने वीआईडीसी द्वारा जारी निविदाओं की जांच की स्थिति रिपोर्ट पेश कर दी है.’ उन्होंने कहा कि अदालत ने अमरावती में एक सिंचाई परियोजना के लिए निविदाओं के संबंध में अतुल जगताप द्वारा दायर जनहित याचिका पर एसीबी को रिपोर्ट देने के लिए कहा था. इस जनहित याचिका में पवार को प्रतिवादी नामित किया गया था. उन्होंने कहा, ‘इस संबंध में हमने अपने पिछले हलफनामे में लिखा था कि हम इस मामले पर सरकार की राय लेंगे. सरकार की तरफ से कहा गया है कि अजित पवार घोटाले में शामिल नहीं थे और हमने अदालत में इसकी सूचना दे दी थी.’

एसीबी अधिकारी ने कहा, ‘इसके अलावा अजीत पवार इन मामलों में कभी भी आरोपी नहीं थे और विदर्भ सिंचाई के निविदा मामलों की जांच जारी है.’ 27 नवंबर को दाखिल हलफनामे में कहा गया, ‘वीआईडीसी के (तत्कालीन) अध्यक्ष के खिलाफ दो आरोप हैं - (अ) निविदा को लागत मूल्य से अधिक में मंजूरी देना और (बी) निविदा पुस्तिका में जिक्र नहीं होने के बाद भी ठेकेदारों को अग्रिम मंजूरी देना.

70,000 करोड़ रुपए के घोटाले का था आरोप
अधिकारी ने बताया कि इस संबंध में विस्तृत जांच की गई है और तकनीकी मुद्दों पर जांच के दौरान सलाह के लिए सरकार द्वारा नियुक्त विशेषज्ञ समिति के सदस्यों की राय भी ली गई है. एसीबी ने कहा कि कई समितियों की रिपोर्ट को भी ध्यान में रखा गया था. हलफनामे में जनहित याचिकाएं निपटाने की मांग की गई थी. कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के गठबंधन सरकार में विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं में कथित भ्रष्टाचार, लागत मूल्य में वृद्धि और मंजूरी में अनियमितताओं से संबंधित लगभग 70,000 करोड़ रुपए का घोटाला होने का आरोप लगाया गया था.

केवल तीन दिनों तक उपमुख्यमंत्री रहे अजित पवार
पिछले महीने अजित पवार ने राकांपा से बगावत कर भाजपा से हाथ मिलाया और 23 नवंबर को महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. वह केवल तीन दिनों तक उपमुख्यमंत्री पद पर आसीन रहे और बाद उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया और फिर पार्टी में वापस लौट आए.

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First published: December 6, 2019, 7:00 PM IST
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