शिवसेना का बुर्काबंदी के बाद अब लॉन्जरी पर हमला, जारी किया ये फरमान

शिवसेना पार्षद शीतल म्हात्रे का कहना है कि इस तरह महिलाओं के लॉन्जरी का प्रदर्शन करने से उनको शर्म महसूस होती है. कई गलत लोग ऐसे पुतलों पर कमेंट कर लड़कियों पर भद्दी टिप्पणियां भी करते हैं.

Jyotsna Gangane | News18Hindi
Updated: June 19, 2019, 11:35 PM IST
शिवसेना का बुर्काबंदी के बाद अब लॉन्जरी पर हमला, जारी किया ये फरमान
शीतल महात्रे का कहना है कि इस तरह महिलाओं के अंतर्वस्त्रों का प्रदर्शन करने से उनको शर्म महसूस होती है. (Demo Pic)
Jyotsna Gangane | News18Hindi
Updated: June 19, 2019, 11:35 PM IST
मुंबई में शिवसेना ने एक बड़ा ही अजीब फरमान जारी किया है. महिलाओं के अंत:वस्त्र (लॉन्जरी) पुतलों को पहनाकर उसका प्रदर्शन कर बेचने पर शिवसेना पार्षद शीतल म्हात्रे ने आपत्ति जताते हुए बीएमसी प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि सड़कों पर चलने वालीं दुकानों में और बड़ी दुकानों में अगर पुतलों को महिलाओं के लॉन्जरी पहनाकर प्रदर्शन करने पर दुकानों का लाइसेंस रद्द कर दुकानदार पर कार्रवाई की जाए. इसके लिए बीएमसी ने दुकानदारों को 15 दिन का समय दिया है.

शीतल म्हात्रे का कहना है कि इस तरह महिलाओं के लॉन्जरी का प्रदर्शन करने से उनको शर्म महसूस होती है. कई गलत लोग ऐसे पुतलों पर कमेंट कर लड़कियों पर भद्दी टिप्पणियां भी करते हैं. इसकी वजह से इनका प्रदर्शन करना गलत है.

पुतलों को देखकर शॉपिंग करना आसान
वहीं दूसरी तरफ महिलाओं के लॉन्जरी बेचने वाले दुकानदारों का मानना है कि इससे उनके व्यवसाय पर असर पड़ेगा. प्रशासन ऐसे मामलों में केवल छोटे दुकानों पर कार्रवाई करता है. लेकिन बड़े मॉल्स में इस तरह की कार्रवाई की बात नहीं करता. इस बात को लेकर न्यूज18 ने पिछले 26 साल से महिलाओं के लॉन्जरी बेचने वाले मुंबई के दुकानदार टोनू पात्रा से बात की तो उनका कहना था कि आप यह खुद नोटिस करें कि लॉन्जरी की दुकान में खुद आदमी और औरतें दोनों काम करते हैं. ग्राहक को जिनके साथ सुविधापूर्ण लगता है, उनके साथ वे शॉपिंग करती हैं. कई महिलाओं को अलग-अलग वैरायटी की जानकारी नहीं होती. ऐसे में उनके लिए पुतलों को देखकर शॉपिंग करना आसान होता है.

लॉन्जरी को बाकी के कपड़ों की तरह देखने की जरूरत
इस बात को लेकर जब न्यूज18 ने कॉलेज की लड़कियों से बातचीत की तब उनका रवैया इस बात को लेकर काफी ओपन और समझदारी वाला था. लड़कियों का कहना है कि अंत:वस्त्र ये सिर्फ लड़कियां नहीं पहनती, ये लड़का लड़की सभी के लिए हैं. और इसमें छिपाने वाली बात कुछ भी नहीं है. ये सब की जरूरत है. लड़कियों के लिए जैसे बाकी कपड़ों में लड़कों के मुकाबले ज्यादा वैरायटी होती है वैसे ही अंतर्वस्त्र में भी यह ज्यादा वैरायटी होती है. इसको छिपाने से इसके बारे में और भी ज्यादा क्यूरोसिटी बढ़ती है. इन कपड़ों कों हमें बाकी के कपड़ों की तरह देखने की जरूरत है.

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