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महाराष्ट्र में किसकी सरकार: क्या इस बार भी संकटमोचक की भूमिका निभाएंगे नितिन गडकरी

अमिताभ सिन्हा | News18India
Updated: November 6, 2019, 3:55 PM IST
महाराष्ट्र में किसकी सरकार: क्या इस बार भी संकटमोचक की भूमिका निभाएंगे नितिन गडकरी
अनुशासित सिपाही की तरह पार्टी के कामों में लगे रहते हैं गडकरी

नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) बीजेपी (BJP) के संकटमोचक माने जाते हैं. सभी राजनैतिक दलों में उनके मित्र हैं फिर चाहे वो शिवसेना हो, कांग्रेस हो, समाजवादी पार्टी हो या फिर आरजेडी. कहा जाता है कि बतौर अध्यक्ष जिन पार्टियों से संबंध सुधारने का काम उन्होंने शुरु किया उसे बतौर मंत्री उन्होंने और पुख्ता कर लिया. अब महाराष्ट्र में आए संकट को लेकर भी उनसे उम्मीदें की जा रही हैं

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  • Last Updated: November 6, 2019, 3:55 PM IST
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नई दिल्ली. मुझे याद है कि जब केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) को बीजेपी का अध्यक्ष (BJP President) बनाने का फैसला हो चुका था, तब वो बीजेपी के संगठन महासचिव रामलाल (Ramlal) से मिलने दिल्ली आए थे. ठंड का मौसम शुरू हो चुका था और उन्होंने जैकेट तक नहीं पहना हुआ था. मुलाकात के बाद उन्होंने ये तो नहीं बताया कि वो बीजेपी अध्यक्ष बनने जा रहे हैं, बस इतना कहा कि उन्हें दिल्ली के रास्ते तक नहीं पता, मौसम तो दूर की बात है. बहरहाल आने वाले दिनों में उनकी बिंदास राजनीति ने दिल्ली में उनका डंका जरुर बजा दिया. इस घटना को 10 साल बीत गए हैं लेकिन गडकरी की पकड़ और अहमियत कम होती नजर नहीं आ रही है.

बुधवार को कांग्रेस (Congress) के दिग्गज और सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) के करीबी अहमद पटेल (Ahmad Patel) जब गडकरी से मिलने पहुंचे तो कई कयास लगने शुरू हो गए. खुद अहमद पटेल ने कह दिया कि वो सड़क दुर्घटनाओं के बारे में बात करने आए थे. चलो ये बात मान भी लेते हैं कि वो सड़क दुर्घटनाओं के बारे में बात करने आए थे, लेकिन महाराष्ट्र (Maharashtra) में चल रही राजनीति सरगर्मियों के बीच वो गडकरी के घर आए ये बात मायने रखती है, यही नितिन गडकरी की अहमियत दर्शाती है.

संकटमोचक की भूमिका में गडकरी
वर्ष 2014 में गडकरी को दरकिनार कर दिल्ली ने देवेंद्र फडणवीस को महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री चुना था, लेकिन 2019 में सहयोगी शिवसेना अड़ गई है. विधानसभा चुनावों के दौर में भी गडकरी को हाशिए पर रखने की बात उड़ी थी लेकिन खुद गडकरी ने उन्हें खारिज कर दिया था, लेकिन मामला अटका तो फिर सबको संकटमोचक नितिन गडकरी की याद आई. सोमवार को देवेंद्र फडनवीस दिल्ली में थे. अमित शाह और महाराष्ट्र प्रभारी भूपेंद्र यादव से मिलने के बाद फडणवीस गडकरी के पास ही गए और काफी देर तक माथापच्ची की. दरअसल मातोश्री और बाला साहेब ठाकरे से गडकरी के संबंधों के बार में सभी जानते हैं. यहां तक की एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार और गडकरी के गहरे संबंधों के बारे में भी कुछ छिपा नहीं है. ऐसे में बीजेपी आलाकमान और देवेंद्र फडणवीस को उनकी याद आना वाजिब ही था.

सूत्र बताते हैं कि संघ के शीर्ष नेताओं से देवेंद्र फडणवीस की मुलाकात में भी संकेत दिए गए कि गडकरी ही समाधान निकालने का प्रयास करें. हालांकि बीजेपी ने भी संकेत दिए हैं कि वो मुख्यमंत्री पद छोड़ कर बाकी सभी मसलों पर शिवसेना से बात कर सकती है लेकिन बातचीत का रास्ता अब तक नहीं खुला. गडकरी ने अब तक ये संकेत नहीं दिए हैं कि वो क्या कर रहे हैं लेकिन पार्टी के अनुशासित सिपाही की तरह दो दिन से खामोशी से वो मुहिम में लग गए हैं.

News - पार्टी लाइन से हटकर अपनी दोस्ती के लिए जाने जाते हैं नीतिन गडकरी, Nitin Gadkari and Uddhav thackeray
सियासी हलके में नितिन गडकरी पार्टी लाइन से हटकर अपनी दोस्ती के लिए जाने जाते हैं (फाइल फोटो)


सभी पार्टियों में हैं गडकरी के दोस्त
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संकटमोचक के रुप में गडकरी का रोल खासा अहम माना जाता रहा है. बतौर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय सडक परिवहन मंत्री गडकरी ने तमाम दलों से और उनके नेताओं से सीधा तार जोड़ा है. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से भले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह का 36 का आंकड़ा रहा हो लेकिन केजरीवाल अपनी परियोजनाओं के लिए गडकरी से हमेशा मिलते रहे हैं. पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट एनएच 24 को पूरा करने के लिए दिल्ली में रास्तों को चौड़ा करने के लिए जमीन की जरुरत पड़ी तो केजरीवाल ने गडकरी की राह में कभी रोड़े नहीं अटकाए और रिकार्ड समय में दिल्ली का कॉरीडोर पूरा हो गया. इसके साथ ही मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव भी उनके अच्छे मित्रों मे रहे हैं. लालू प्रसाद यादव भी जेल जाने से पहले अपने बेटे तेजस्वी यादव को लेकर गडकरी से उनके कार्यालय में मिलने आए थे, और ये कह कर गए थे कि मेरे बेटे को भी अपनी तरह की राजनीति सिखा दो. तमिलनाडु की दोनों बड़ी राजनीतिक पार्टियों से भी उनके मधुर संबंध रहे हैं, यानी बतौर अध्यक्ष जिन पार्टियों से संबंध सुधारने का काम शुरू किया उसे मंत्री बनने पर उन्होंने और पुख्ता किया.

मुश्किल कामों का ज़िम्मा
गोवा में जब बीजपी विश्वनीयता के संकट से जूझ रही थी, तब उन्होंने मनोहर पर्रिकर को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर चुनावों की हवा बदल दी थी, और 16 विधायक आने के बावजूद भी उन्होंने वहां सरकार बनवा दी थी. दूसरी तरफ 2014 में नरेन्द्र मोदी को पीएम पद का उम्मीदवार घोषित किया गया तब आडवाणी को मनाने का जिम्मा उन्हें ही सौंपा गया था. साथ ही केंद्र में सरकार बनने के बाद सुषमा स्वराज को मंत्रिमंडल के लिए मनाने में भी उनकी भूमिका थी. सरकार बनने के बाद गडकरी को हाशिए पर रखने की चर्चा जब भी उड़ी, उन्होंने अपने काम से उन सब पर जीत हासिल की. 2019 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ राज्यों के विधानसभा चुनावों में भी सड़कों और हाईवे का निर्माण मोदी सरकार के कामकाज के बखान का एक मुद्दा जरुर था. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और पार्टी के प्रति उनकी कमिटमेंट पर उंगली उठाने वाला कोई नहीं, इसलिए पर्दे के पीछे ही सही गडकरी फिलहाल बीजेपी के संकटमोचक बनते जरुर नजर आ रहे हैं.

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First published: November 6, 2019, 3:24 PM IST
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